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Ionic Equilibrium and Electrolytes | आयनिक साम्य और विद्युत अपघट्य

July 16, 2026 |

भौतिक रसायन विज्ञान (Physical Chemistry) में आयनिक साम्य (Ionic Equilibrium) का अध्ययन विलयनों के व्यवहार को समझने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण आधारस्तंभ है। जब किसी पदार्थ को जल में घोला जाता है, तो वह आयनों में टूट सकता है। इन आयनों और अवियोजित अणुओं के बीच स्थापित साम्य को आयनिक साम्य कहते हैं। इस लेख में हम आहीनियस के सिद्धांत, ओस्टवाल्ड के तनुता नियम की गणितीय व्युत्पत्ति, अम्ल-क्षार के आधुनिक सिद्धांतों और परीक्षा उपयोगी जटिल आंकिक प्रश्नों का गहन अध्ययन करेंगे।

1. आहीनियस का विद्युत वियोजन का सिद्धान्त (Arrhenius Theory of Electrolytic Dissociation)

सन् 1884 में सवान्ते आहीनियस (Svante Arrhenius) ने विद्युत अपघट्यों (Electrolytes) के व्यवहार को समझाने के लिए अपना सिद्धांत प्रस्तुत किया। इस सिद्धांत के अनुसार:

  • जब किसी विद्युत अपघट्य को जल में घोला जाता है, तो वह धनावेशित (Cations) और ऋणावेशित आयनों (Anions) में टूट जाता है।
  • अम्ल (Acids): वे पदार्थ जो जलीय विलयन में हाइड्रोजन आयन \( (H^+) \) देते हैं। उदाहरण: \( HCl \rightarrow H^+ + Cl^- \)।
  • क्षार (Bases): वे पदार्थ जो जलीय विलयन में हाइड्रॉक्सिल आयन \( (OH^-) \) देते हैं। उदाहरण: \( NaOH \rightarrow Na^+ + OH^- \)।

प्रबल व दुर्बल विद्युत अपघट्य (Strong and Weak Electrolytes)

आयनन की मात्रा के आधार पर विद्युत अपघट्यों को दो भागों में बांटा गया है:

  • प्रबल विद्युत अपघट्य (Strong Electrolytes): ये जलीय विलयन में लगभग पूर्णतः (100%) आयनित हो जाते हैं। उदाहरण: \( HCl, NaOH, NaCl \)। इन पर ओस्टवाल्ड का नियम लागू नहीं होता।
  • दुर्बल विद्युत अपघट्य (Weak Electrolytes): ये जलीय विलयन में केवल आंशिक रूप से आयनित होते हैं, जिससे आयनों और अवियोजित अणुओं के मध्य एक 'साम्य (Equilibrium)' स्थापित हो जाता है। उदाहरण: \( CH_3COOH, NH_4OH \)।

2. अम्ल-क्षार साम्य की आधुनिक अवधारणाएं (Modern Concepts of Acid-Base Equilibrium)

आहीनियस सिद्धांत की सीमाओं (जैसे, यह केवल जलीय विलयन तक सीमित था) को दूर करने के लिए नई अवधारणाएं प्रस्तुत की गईं:

(i) ब्रॉन्स्टेड-लॉरी अवधारणा (Bronsted-Lowry Concept)

इस अवधारणा के अनुसार:

  • अम्ल (Acid): कोई भी अणु या आयन जो प्रोटॉन दान (Proton Donor) कर सकता है।
  • क्षार (Base): कोई भी अणु या आयन जो प्रोटॉन ग्रहण (Proton Acceptor) कर सकता है।

संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म (Conjugate Acid-Base Pair): जब एक अम्ल प्रोटॉन दान करता है, तो वह अपने 'संयुग्मी क्षार' में बदल जाता है। उदाहरण के लिए:

$$ HCl + H_2O \rightleftharpoons H_3O^+ + Cl^- $$

यहाँ \( HCl \) अम्ल है और \( Cl^- \) इसका संयुग्मी क्षार है。

(ii) लुईस अवधारणा (Lewis Concept)

जी. एन. लुईस के अनुसार:

  • लुईस अम्ल (Lewis Acid): वह प्रजाति जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण (Electron pair acceptor) कर सकती है। (उदा. \( BF_3, AlCl_3 \))
  • लुईस क्षार (Lewis Base): वह प्रजाति जो इलेक्ट्रॉन युग्म दान (Electron pair donor) कर सकती है। (उदा. \( :NH_3, H_2O: \))

3. ओस्टवाल्ड का तनुता नियम (Ostwald's Dilution Law)

विल्हेम ओस्टवाल्ड ने दुर्बल विद्युत अपघट्यों के आयनिक साम्य पर द्रव्यमान अनुपाती क्रिया के नियम (Law of Mass Action) को लागू किया। इस नियम के अनुसार, किसी दुर्बल विद्युत अपघट्य के वियोजन की मात्रा \( (\alpha) \) उसकी सांद्रता \( (C) \) के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है

समीकरण की विस्तृत व्युत्पत्ति (Detailed Derivation)

माना एक दुर्बल द्विअंगी (Binary) विद्युत अपघट्य \( AB \) है, जिसे जल में घोला गया है :

$$ AB \rightleftharpoons A^+ + B^- $$

यदि विलयन की प्रारंभिक सांद्रता \( C \) मोल/लीटर है और साम्यावस्था पर वियोजन की मात्रा \( \alpha \) है :

  • प्रारंभिक सांद्रता: \( [AB] = C \), \( [A^+] = 0 \), \( [B^-] = 0 \)
  • साम्य पर सांद्रता: \( [AB] = C(1-\alpha) \), \( [A^+] = C\alpha \), \( [B^-] = C\alpha \)

द्रव्यमान अनुपाती क्रिया के नियम (Law of Mass Action) के अनुसार, वियोजन स्थिरांक \( (K) \) होगा:

$$ K = \frac{[A^+][B^-]}{[AB]} $$ $$ K = \frac{(C\alpha)(C\alpha)}{C(1-\alpha)} $$ $$ K = \frac{C^2\alpha^2}{C(1-\alpha)} = \frac{C\alpha^2}{1-\alpha} $$

चूँकि दुर्बल विद्युत अपघट्यों के लिए वियोजन की मात्रा \( \alpha \) बहुत कम होती है (\( \alpha \ll 1 \)), इसलिए हर (denominator) में \( (1-\alpha) \approx 1 \) माना जा सकता है。

अतः सरलीकृत समीकरण होगा:

$$ K = C\alpha^2 $$ $$ \alpha^2 = \frac{K}{C} $$ $$ \alpha = \sqrt{\frac{K}{C}} $$

यदि 1 मोल पदार्थ \( V \) लीटर आयतन में घुला हो, तो \( C = 1/V \) होगा। अतः:

$$ \alpha = \sqrt{KV} $$

ओस्टवाल्ड नियम की सीमाएं (Limitations)

  1. यह नियम केवल दुर्बल विद्युत अपघट्यों (जैसे \( CH_3COOH, HCN \)) के लिए ही सत्य है।
  2. प्रबल विद्युत अपघट्यों की विफलता: प्रबल विद्युत अपघट्य लगभग पूर्णतः आयनित होते हैं, इसलिए उनके लिए \( (1-\alpha) \) को 1 नहीं माना जा सकता।
  3. डिबाई-हकल सिद्धांत (Debye-Huckel Theory): उच्च सांद्रता पर प्रबल आयनों के बीच प्रबल स्थिर-वैद्युत आकर्षण (Electrostatic attraction) कार्य करने लगता है, जिससे विलयन का आदर्श व्यवहार समाप्त हो जाता है।

4. दुर्बल अम्लों का आयनन स्थिरांक (Ionization Constant of Weak Acids, \( K_a \))

माना एक दुर्बल अम्ल \( HA \) जल में इस प्रकार आयनित होता है:

$$ HA + H_2O \rightleftharpoons H_3O^+ + A^- $$

साम्य स्थिरांक (Acid Dissociation Constant, \( K_a \)) को निम्न प्रकार लिखा जाता है:

$$ K_a = \frac{[H^+][A^-]}{[HA]} $$

ओस्टवाल्ड के नियम से, यदि प्रारंभिक सांद्रता \( C \) है, तो:

$$ K_a = \frac{C\alpha \times C\alpha}{C(1-\alpha)} \approx C\alpha^2 $$

हाइड्रोजन आयन की सांद्रता \( [H^+] \) की गणना:

$$ [H^+] = C\alpha $$

चूँकि \( \alpha = \sqrt{\frac{K_a}{C}} \) है, तो इसे उपर्युक्त समीकरण में रखने पर:

$$ [H^+] = C \times \sqrt{\frac{K_a}{C}} = \sqrt{K_a \cdot C} $$

\( K_a \) का मान जितना अधिक होगा, अम्ल की शक्ति उतनी ही अधिक होगी。

5. जटिल आंकिक प्रश्न (Solved Numericals)

प्रश्न 1: 0.1 M एसीटिक अम्ल (\( CH_3COOH \)) का आयनन 1.33% होता है। इसके आयनन स्थिरांक (\( K_a \)) और विलयन के pH की गणना करें। (दिया है: \(\log(1.33) = 0.1239\))

विस्तृत हल:

यहाँ दिया गया है:

  • सांद्रता (\( C \)) = 0.1 M
  • वियोजन की मात्रा (\( \alpha \)) = 1.33% = 0.0133

\( K_a \) की गणना के लिए ओस्टवाल्ड का सूत्र उपयोग करें:

$$ K_a = C\alpha^2 $$ $$ K_a = 0.1 \times (0.0133)^2 $$ $$ K_a = 0.1 \times 0.00017689 \approx 1.76 \times 10^{-5} $$

अब, \( [H^+] \) आयन सांद्रता की गणना करें:

$$ [H^+] = C\alpha = 0.1 \times 0.0133 = 1.33 \times 10^{-3} \text{ M} $$

pH की गणना:

$$ pH = -\log[H^+] = -\log(1.33 \times 10^{-3}) $$ $$ pH = 3 - \log(1.33) = 3 - 0.1239 = 2.8761 $$
उत्तर: \( K_a = 1.76 \times 10^{-5} \) और \( pH \approx 2.88 \)

प्रश्न 2: (सम-आयन प्रभाव / Common Ion Effect) 0.1 M \( CH_3COOH \) और 0.05 M \( HCl \) के मिश्रण में \( CH_3COOH \) के वियोजन की मात्रा (\( \alpha \)) ज्ञात कीजिए। (\( CH_3COOH \) का \( K_a = 1.8 \times 10^{-5} \))

विस्तृत हल:

यह सम-आयन प्रभाव (Common ion effect) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। चूँकि \( HCl \) एक प्रबल अम्ल है, यह पूरी तरह आयनित होकर 0.05 M \( H^+ \) आयन प्रदान करेगा।

$$ HCl \rightarrow H^+ + Cl^- $$

दुर्बल अम्ल \( CH_3COOH \) का साम्य:

$$ CH_3COOH \rightleftharpoons CH_3COO^- + H^+ $$

माना \( CH_3COOH \) की वियोजित सांद्रता \( x \) है। तो साम्यावस्था पर :

  • \( [CH_3COOH] = 0.1 - x \approx 0.1 \text{ M} \) (चूँकि \( x \) बहुत छोटा है)
  • \( [CH_3COO^-] = x \)
  • \( [H^+] = x + 0.05 \approx 0.05 \text{ M} \) (\( HCl \) की अधिकता के कारण \( x \) को 0.05 के मुकाबले नगण्य माना गया है)

अब \( K_a \) के सूत्र में मान रखने पर:

$$ K_a = \frac{[CH_3COO^-][H^+]}{[CH_3COOH]} $$ $$ 1.8 \times 10^{-5} = \frac{x \times 0.05}{0.1} $$ $$ x = \frac{1.8 \times 10^{-5} \times 0.1}{0.05} = 3.6 \times 10^{-5} \text{ M} $$

वियोजन की मात्रा (\( \alpha \)):

$$ \alpha = \frac{x}{C} = \frac{3.6 \times 10^{-5}}{0.1} = 3.6 \times 10^{-4} $$
उत्तर: \( HCl \) की उपस्थिति में एसीटिक अम्ल के वियोजन की मात्रा अत्यंत कम होकर \( 3.6 \times 10^{-4} \) हो जाती है।

प्रश्न 3: (तनुता का प्रभाव) एक दुर्बल एक-क्षारकीय (Monobasic) अम्ल अपने 0.1 M विलयन में 1% आयनित होता है। यदि इस विलयन को तनु (dilute) करके इसकी सांद्रता 0.001 M कर दी जाए, तो इसके आयनन का नया प्रतिशत क्या होगा?

विस्तृत हल:

दिया गया है:

  • प्रारंभिक सांद्रता (\( C_1 \)) = 0.1 M
  • प्रारंभिक आयनन (\( \alpha_1 \)) = 1% = 0.01
  • नई सांद्रता (\( C_2 \)) = 0.001 M

ओस्टवाल्ड के तनुता नियम से, तापमान स्थिर रहने पर \( K_a \) का मान नहीं बदलता :

$$ K_a = C_1 \cdot \alpha_1^2 = C_2 \cdot \alpha_2^2 $$

अतः:

$$ \alpha_2^2 = \frac{C_1 \cdot \alpha_1^2}{C_2} $$ $$ \alpha_2^2 = \frac{0.1 \times (0.01)^2}{0.001} $$ $$ \alpha_2^2 = \frac{0.1 \times 0.0001}{0.001} = \frac{0.00001}{0.001} = 0.01 $$ $$ \alpha_2 = \sqrt{0.01} = 0.1 $$

नई आयनन मात्रा प्रतिशत में:

$$ \text{प्रतिशत } \alpha_2 = 0.1 \times 100 = 10\% $$
उत्तर: विलयन को 0.001 M तक तनु करने पर अम्ल का आयनन बढ़कर 10% हो जाएगा। यह स्पष्ट रूप से ओस्टवाल्ड के नियम (तनुता बढ़ने पर आयनन बढ़ता है) की पुष्टि करता है।