Loading...

Behavior of Real Gases | वास्तविक गैसों का व्यवहार

July 17, 2026 |

गैसों का अणुगति सिद्धांत (Kinetic Theory of Gases) यह मानता है कि गैसें आदर्श व्यवहार प्रदर्शित करती हैं और सभी ताप व दाब पर आदर्श गैस समीकरण $$ PV = nRT $$ का पूर्णतः पालन करती हैं। लेकिन प्रायोगिक तौर पर यह पाया गया है कि कोई भी गैस पूर्णतः आदर्श (Ideal) नहीं होती है। हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी वास्तविक गैसें (Real gases) विशेष रूप से उच्च दाब और निम्न ताप पर आदर्श व्यवहार से काफी विचलन (Deviation) प्रदर्शित करती हैं।

इस लेख में हम वास्तविक गैसों के आदर्श व्यवहार से विचलन के कारणों, संपीड्यता गुणांक, वाण्डर वाल्स अवस्था समीकरण (van der Waals Equation) की व्युत्पत्ति, बॉयल ताप, और जूल-थॉमसन प्रभाव का गहराई से अध्ययन करेंगे।

1. आदर्श व्यवहार से विचलन के कारण (Causes of Deviation from Ideal Behaviour)

वास्तविक गैसें आदर्श गैस समीकरण का पालन क्यों नहीं करती हैं, इसे समझने के लिए हमें अणुगति सिद्धांत के उन दो प्रमुख अभिगृहीतों (Postulates) को देखना होगा जो उच्च दाब और निम्न ताप पर त्रुटिपूर्ण (flawed) साबित होते हैं:

  • अणुओं का नगण्य आयतन (Negligible Volume of Molecules): आदर्श गैस सिद्धांत मानता है कि गैस के अणुओं का अपना वास्तविक आयतन, गैस द्वारा घेरे गए कुल आयतन (पात्र का आयतन) की तुलना में नगण्य होता है। लेकिन उच्च दाब पर जब गैस को संपीडित (compress) किया जाता है, तो गैस का कुल आयतन बहुत कम हो जाता है। इस स्थिति में अणुओं का अपना आयतन नगण्य नहीं माना जा सकता।
  • आकर्षण बलों का अभाव (Absence of Intermolecular Forces): अणुगति सिद्धांत यह भी मानता है कि गैस के अणुओं के बीच कोई आकर्षण या प्रतिकर्षण बल नहीं होता। परंतु उच्च दाब और निम्न ताप पर, जब अणु एक-दूसरे के बेहद करीब आ जाते हैं, तो उनके मध्य वाण्डर वाल्स आकर्षण बल (van der Waals attractive forces) प्रभावी हो जाते हैं।

2. संपीड्यता गुणांक (Compressibility Factor - \( Z \))

वास्तविक गैसों का आदर्श व्यवहार से विचलन नापने के लिए एक नए स्थिरांक का प्रयोग किया जाता है जिसे संपीड्यता गुणांक (Compressibility Factor) कहते हैं, जिसे \( Z \) से प्रदर्शित किया जाता है。

गणितीय सूत्र:

$$ Z = \frac{PV}{nRT} $$

आदर्श गैस के लिए हमेशा \( Z = 1 \) होता है।

विभिन्न ताप एवं दाब से \( Z \) का संबंध:

  1. अत्यंत निम्न दाब पर (At very low pressure): सभी गैसों के लिए \( Z \approx 1 \) होता है, अर्थात वे आदर्श गैस की तरह व्यवहार करती हैं।
  2. मध्यम दाब पर (At moderate pressure): अधिकांश गैसों (जैसे \(CH_4\), \(CO_2\)) के लिए \( Z < 1 \) होता है। इसे ऋणात्मक विचलन (Negative deviation) कहते हैं। इस स्थिति में गैसें आदर्श गैस की तुलना में अधिक आसानी से संपीडित (compressible) होती हैं।
  3. उच्च दाब पर (At high pressure): सभी गैसों के लिए \( Z > 1 \) होता है (धनात्मक विचलन)। इस स्थिति में प्रतिकर्षण बल हावी हो जाते हैं और गैसों को दबाना (compress करना) कठिन हो जाता है।
  4. हाइड्रोजन और हीलियम का विशिष्ट व्यवहार: \(H_2\) और \(He\) गैसों के लिए सभी दाबों पर हमेशा \( Z > 1 \) होता है। इसका कारण इनके अणुओं का बहुत छोटा द्रव्यमान और अत्यंत कम अंतर-आण्विक आकर्षण बल है।

3. वाण्डर वाल्स अवस्था समीकरण की व्युत्पत्ति (Derivation of van der Waals Equation)

सन् 1873 में जोहान्स वाण्डर वाल्स (Johannes van der Waals) ने आदर्श गैस समीकरण \( PV = nRT \) में दो महत्वपूर्ण संशोधन (Corrections) करके वास्तविक गैसों के लिए एक नया समीकरण प्रस्तुत किया。

(i) आयतन संशोधन (Volume Correction)

वास्तविक गैस के अणुओं का अपना एक निश्चित आयतन होता है। अतः गैस को घूमने के लिए उपलब्ध वास्तविक मुक्त आयतन (Ideal Volume) पात्र के कुल आयतन \( V \) से कम होता है。

यदि एक मोल गैस के अणुओं का प्रभावी (excluded) आयतन \( b \) है, तो \( n \) मोल गैस के लिए वर्जित आयतन \( nb \) होगा। अतः आदर्श आयतन होगा:

$$ V_{ideal} = V - nb $$

जहाँ \( b \) को वाण्डर वाल्स स्थिरांक (सह-आयतन / Co-volume) कहा जाता है。

(ii) दाब संशोधन (Pressure Correction)

पात्र की दीवार से टकराने वाले अणु को पीछे की ओर मौजूद अन्य अणु अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इस अंदरूनी खिंचाव के कारण, दीवार पर लगने वाला वास्तविक दाब (\( P \)), आदर्श दाब से कम होता है।

अतः आदर्श दाब निकालने के लिए हमें मापे गए दाब \( P \) में एक संशोधन पद (\( p' \)) जोड़ना पड़ता है:

$$ P_{ideal} = P + p' $$

यह अंदरूनी खिंचाव गैस के घनत्व (density) के वर्ग के समानुपाती होता है। घनत्व \( \rho \propto \frac{n}{V} \) होता है। अतः:

$$ p' \propto \left(\frac{n}{V}\right)^2 \implies p' = \frac{an^2}{V^2} $$

जहाँ \( a \) एक अन्य वाण्डर वाल्स स्थिरांक है जो गैस के अणुओं के बीच आकर्षण बल की माप है。

पूर्ण वाण्डर वाल्स समीकरण: आदर्श गैस समीकरण \( P_{ideal} \times V_{ideal} = nRT \) में दोनों मान रखने पर:

$$ \left( P + \frac{an^2}{V^2} \right) (V - nb) = nRT $$

4. वास्तविक गैसों के व्यवहार को समझाने में वाण्डर वाल्स समीकरण के अनुप्रयोग

वाण्डर वाल्स समीकरण संपीड्यता गुणांक \( Z \) के विभिन्न विचलनों को बहुत अच्छी तरह स्पष्ट करता है:

  • अत्यंत निम्न दाब पर: आयतन \( V \) इतना अधिक होता है कि \( \frac{a}{V^2} \) और \( b \) को नगण्य माना जा सकता है। समीकरण \( PV = RT \) बन जाता है (\( Z = 1 \))।
  • मध्यम दाब पर: आयतन कम होने पर \( \frac{a}{V^2} \) को नगण्य नहीं किया जा सकता, लेकिन \( b \) अब भी \( V \) की तुलना में बहुत छोटा होता है। अतः \( (P + \frac{a}{V^2}) V \approx RT \implies PV + \frac{a}{V} = RT \implies PV = RT - \frac{a}{V} \)। \( PV \) का मान \( RT \) से कम होता है, इसलिए \( Z < 1 \) होता है।
  • उच्च दाब पर: दाब बहुत अधिक होने से \( P \) की तुलना में \( \frac{a}{V^2} \) नगण्य हो जाता है। अतः \( P(V - b) = RT \implies PV = RT + Pb \)। इस स्थिति में \( PV \) का मान \( RT \) से अधिक होता है, इसलिए \( Z > 1 \) होता है।

5. बॉयल ताप (Boyle Temperature - \( T_b \))

परिभाषा: वह तापमान जिस पर कोई वास्तविक गैस दाब की एक विस्तृत परास (range) तक आदर्श गैस नियमों का पालन करती है, बॉयल ताप (\( T_b \)) कहलाता है。

बॉयल ताप को वाण्डर वाल्स स्थिरांकों (\( a \) और \( b \)) के पदों में निम्न प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है:

$$ T_b = \frac{a}{Rb} $$

6. जूल-थॉमसन प्रभाव एवं गैसों का द्रवीकरण (Joule-Thomson Effect and Liquefaction of Gases)

जूल-थॉमसन प्रभाव (Joule-Thomson Effect): जब किसी वास्तविक गैस को रुद्धोष्म परिस्थितियों (Adiabatic conditions) में उच्च दाब वाले क्षेत्र से निम्न दाब वाले क्षेत्र (जैसे सरंध्र प्लग / porous plug के माध्यम से) में फैलने दिया जाता है, तो गैस के तापमान में गिरावट (Cooling) आती है। इसे जूल-थॉमसन प्रभाव कहते हैं。

कारण: प्रसार (expansion) के दौरान गैस के अणुओं को एक-दूसरे के वाण्डर वाल्स आकर्षण बलों (van der Waals attractive forces) के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है। इस कार्य के लिए वे अपनी ही आंतरिक ऊर्जा (Internal energy) का उपयोग करते हैं, जिससे उनकी गतिज ऊर्जा घट जाती है और तापमान गिर जाता है。

गैसों का द्रवीकरण (Liquefaction of Gases): किसी गैस को द्रव अवस्था में बदलने के लिए उसका तापमान क्रांतिक ताप (Critical Temperature - \( T_c \)) से नीचे लाना और दाब को बढ़ाना आवश्यक होता है। जूल-थॉमसन प्रभाव का उपयोग लिंडे विधि (Linde's method) और क्लॉड विधि (Claude's method) में गैसों को अत्यधिक ठंडा करने और अंततः उन्हें द्रवीकृत (Liquefy) करने के लिए किया जाता है。

7. परीक्षा स्तर के जटिल आंकिक प्रश्न (Solved Numericals)

प्रश्न 1: (वाण्डर वाल्स बनाम आदर्श गैस समीकरण)
27°C पर 20 लीटर के एक फ्लास्क में 1 मोल जल वाष्प (Water vapour) रखी गई है। गैस का दाब ज्ञात करें यदि: (a) गैस आदर्श व्यवहार करती है, (b) गैस वाण्डर वाल्स गैस की तरह व्यवहार करती है।
(दिया गया है: \( R = 0.0821 \text{ L atm K}^{-1} \text{mol}^{-1} \), \( a = 5.464 \text{ L}^2 \text{atm mol}^{-2} \), \( b = 0.0305 \text{ L mol}^{-1} \))

विस्तृत हल:

यहाँ: \( n = 1 \text{ mol} \), \( V = 20 \text{ L} \), \( T = 27^\circ\text{C} = 27 + 273 = 300 \text{ K} \)

(a) आदर्श गैस समीकरण (\( PV = nRT \)) से:

$$ P = \frac{nRT}{V} = \frac{1 \times 0.0821 \times 300}{20} $$ $$ P = \frac{24.63}{20} = 1.2315 \text{ atm} $$

(b) वाण्डर वाल्स समीकरण से:

$$ \left( P + \frac{an^2}{V^2} \right) (V - nb) = nRT $$ $$ \left( P + \frac{5.464 \times (1)^2}{(20)^2} \right) (20 - 1 \times 0.0305) = 1 \times 0.0821 \times 300 $$ $$ \left( P + \frac{5.464}{400} \right) (19.9695) = 24.63 $$ $$ (P + 0.01366) = \frac{24.63}{19.9695} $$ $$ P + 0.01366 = 1.2333 $$ $$ P = 1.2333 - 0.01366 = 1.2196 \text{ atm} $$
उत्तर: आदर्श दाब 1.2315 atm है, जबकि वास्तविक (वाण्डर वाल्स) दाब 1.2196 atm है।

प्रश्न 2: (बॉयल ताप की गणना)
कार्बन डाइऑक्साइड (\(CO_2\)) गैस के लिए वाण्डर वाल्स स्थिरांक \( a = 3.59 \text{ L}^2 \text{atm mol}^{-2} \) और \( b = 0.0428 \text{ L mol}^{-1} \) हैं। \(CO_2\) का बॉयल ताप (\(T_b\)) ज्ञात कीजिए। (\( R = 0.0821 \text{ L atm K}^{-1} \text{mol}^{-1} \))

विस्तृत हल:

बॉयल ताप (\(T_b\)) का सूत्र है:

$$ T_b = \frac{a}{Rb} $$

मान रखने पर:

$$ T_b = \frac{3.59}{0.0821 \times 0.0428} $$ $$ T_b = \frac{3.59}{0.00351388} \approx 1021.6 \text{ K} $$
उत्तर: \(CO_2\) गैस का बॉयल ताप लगभग 1021.6 K होगा।

प्रश्न 3: (संपीड्यता गुणांक \(Z\) का निर्धारण)
300 K तापमान और 50 atm दाब पर एक वास्तविक गैस के 2 मोल 0.5 लीटर आयतन घेरते हैं। इस गैस के लिए संपीड्यता गुणांक (\(Z\)) की गणना करें। क्या यह गैस आदर्श गैस की तुलना में अधिक संपीड्य (Compressible) है या कम? (\( R = 0.0821 \text{ L atm K}^{-1} \text{mol}^{-1} \))

विस्तृत हल:

दिया गया है: \( P = 50 \text{ atm} \), \( V = 0.5 \text{ L} \), \( T = 300 \text{ K} \), \( n = 2 \text{ mol} \)

संपीड्यता गुणांक \(Z\) का सूत्र है:

$$ Z = \frac{PV}{nRT} $$ $$ Z = \frac{50 \times 0.5}{2 \times 0.0821 \times 300} $$ $$ Z = \frac{25}{49.26} \approx 0.507 $$
उत्तर: संपीड्यता गुणांक \(Z = 0.507\) है। चूँकि \(Z < 1\) है, अतः यह ऋणात्मक विचलन (Negative deviation) दर्शाता है। इसका अर्थ है कि अणुओं के बीच वाण्डर वाल्स आकर्षण बल प्रबल हैं और यह गैस आदर्श गैस की तुलना में अधिक आसानी से संपीडित (More compressible) की जा सकती है।