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Circulatory System | इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG)

July 18, 2026 |

मानव शरीर विज्ञान (Human Physiology) और परिसंचरण तंत्र (Circulatory System) के अध्ययन में हृदय की कार्यप्रणाली का मापन अत्यंत महत्वपूर्ण है। हृदय चक्र (Cardiac Cycle) के दौरान हृदय की पेशियों में होने वाले विद्युत परिवर्तनों (Electrical changes) के ग्राफीय निरूपण (Graphical representation) को इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (Electrocardiogram - ECG) कहा जाता है। जिस उपकरण या मशीन का उपयोग इस ग्राफ को प्राप्त करने के लिए किया जाता है, उसे इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफ (Electrocardiograph) कहते हैं। (यह प्रतियोगी परीक्षाओं का एक अत्यंत भ्रमित करने वाला बिंदु है, जहाँ मशीन को 'ग्राफ' और ग्राफ को 'ग्राम' कहा जाता है।) विलेम आइंटहोवेन (Willem Einthoven) को ECG का जनक (Father of ECG) माना जाता है।

ECG हृदय के चालन तंत्र (Conducting system of the heart) के स्वास्थ्य, उसकी लय (Rhythm) और किसी भी प्रकार की असामान्यता (Abnormality) का पता लगाने के लिए एक स्वर्ण मानक (Gold standard) नैदानिक उपकरण है।


1. ECG मशीन और इलेक्ट्रोड संयोजन (ECG Machine and Lead Placement)

एक मानक ECG (Standard ECG) प्राप्त करने के लिए मरीज को मशीन से विशेष तारों (Leads) के माध्यम से जोड़ा जाता है। शरीर पर इलेक्ट्रोड लगाने की प्रक्रिया निम्नलिखित है:

  • मानक 3-लीड ECG (Standard 3-Lead ECG): सामान्य मापन के लिए रोगी को तीन विद्युत लीडों (Electrical leads) से जोड़ा जाता है:
    • एक दाईं कलाई (Right wrist) पर।
    • एक बाईं कलाई (Left wrist) पर।
    • एक बाएँ टखने (Left ankle) पर।
    यह त्रिकोण (Einthoven's Triangle) हृदय की विद्युत गतिविधि को मापता है।
  • विस्तृत मूल्यांकन (Detailed Evaluation): हृदय की कार्यप्रणाली का सूक्ष्म और विस्तृत अध्ययन करने के लिए वक्ष (Chest) क्षेत्र पर 6 अतिरिक्त लीड (V1 से V6) लगाए जाते हैं। इसे 12-लीड ECG (12-lead ECG) कहा जाता है।

2. ECG ग्राफ की संरचना और तरंगें (Structure of ECG Waves)

एक मानक ECG ग्राफ में हृदय चक्र (Cardiac cycle) के दौरान उत्पन्न होने वाली विभिन्न तरंगों को अंग्रेजी वर्णमाला के P से T अक्षरों द्वारा दर्शाया जाता है। प्रत्येक तरंग एक विशिष्ट विद्युत गतिविधि को निरूपित करती है।

तरंग (Wave) विद्युत गतिविधि (Electrical Activity) हृदय की भौतिक प्रतिक्रिया (Physical Event)
P-तरंग (P-wave) आलिंदों का विध्रुवण (Depolarisation of Atria) दोनों आलिंदों का संकुचन (Atrial Systole)। यह SA Node के उद्दीपन को दर्शाता है।
QRS सम्मिश्र (QRS Complex) निलयों का विध्रुवण (Depolarisation of Ventricles) निलयों का संकुचन (Ventricular Systole)। संकुचन Q तरंग के तुरंत बाद शुरू होता है।
T-तरंग (T-wave) निलयों का पुनःध्रुवण (Repolarisation of Ventricles) निलयों का अनुशिथिलन (Ventricular Diastole) अर्थात् सामान्य अवस्था में वापसी। T-तरंग का अंत प्रकुंचन की समाप्ति को दर्शाता है।
Standard Electrocardiogram (ECG) showing P wave, QRS complex, and T wave
चित्र: एक मानक इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG) ग्राफ और उसकी विभिन्न तरंगें (P, Q, R, S, T)

A. P-तरंग (P-Wave) का गहन अध्ययन

यह एक छोटी, ऊपर की ओर उठी हुई (Upward deflection) तरंग है। जब शिरा-आलिंद पर्व (Sino-Atrial Node - SA Node), जिसे हृदय का 'पेसमेकर' (Pacemaker) कहा जाता है, एक क्रिया विभव (Action potential) उत्पन्न करता है, तो यह विद्युत संकेत पूरे आलिंद (Atria) में फैल जाता है। इस विद्युत प्रसार या विध्रुवण (Depolarisation) के कारण P-तरंग बनती है, जिसके तुरंत बाद आलिंद संकुचित (Atrial contraction) होते हैं।

B. QRS सम्मिश्र (QRS Complex) का गहन अध्ययन

यह P-तरंग के बाद आता है और इसमें तीन तरंगें शामिल होती हैं: Q, R, और S। यह निलयों के विध्रुवण (Ventricular depolarisation) को दर्शाता है।

  • Q तरंग: नीचे की ओर (Downward) एक छोटा विक्षेप।
  • R तरंग: एक लंबी, नुकीली और ऊपर की ओर उठी हुई (Tall, upward) तरंग।
  • S तरंग: R तरंग के बाद नीचे की ओर विक्षेप।

विद्युत आवेग आलिंद-निलय पर्व (AV Node) से बंडल ऑफ हिज (Bundle of His) और पुरकिंजे तंतुओं (Purkinje fibres) के माध्यम से निलयों (Ventricles) की भित्ति में फैलता है, जिससे शक्तिशाली निलय प्रकुंचन (Ventricular systole) शुरू होता है।

C. T-तरंग (T-Wave) का गहन अध्ययन

यह गुंबद के आकार (Dome-shaped) की तरंग है जो निलयों के पुनःध्रुवण (Ventricular repolarisation) को निरूपित करती है। इसका अर्थ है कि निलय अपनी उत्तेजित अवस्था (Excited state) से सामान्य या विश्राम अवस्था (Resting state) में लौट रहे हैं। T-तरंग का अंत निलय प्रकुंचन के अंत (End of ventricular systole) का स्पष्ट संकेत है।


3. कार्यप्रणाली: हृदय की विद्युत चालन और ECG का निर्माण (Mechanism of Conduction & ECG)

ECG की तरंगें हृदय के विशिष्ट चालन तंत्र (Specialized conducting system) में आवेग प्रवाह का सीधा परिणाम हैं। यह प्रवाह निम्नलिखित क्रमिक चरणों में संपन्न होता है:

  1. SA Node का उद्दीपन (P-wave): दाएँ आलिंद के ऊपरी कोने में स्थित SA Node से विद्युत आवेग उत्पन्न होता है और दोनों आलिंदों में फैलता है।
  2. AV Node पर विलंब (PR Interval): आवेग AV Node पर पहुंचता है, जहाँ यह लगभग 0.1 सेकंड के लिए धीमा हो जाता है। यह विलंब सुनिश्चित करता है कि आलिंद पूरी तरह से संकुचित होकर अपना रक्त निलयों में खाली कर दें, इससे पहले कि निलय संकुचित हों। इसे P-R अंतराल (PR Interval) कहा जाता है।
  3. निलयों का संकुचन (QRS Complex): आवेग AV बंडल (Bundle of His) और पुरकिंजे तंतुओं (Purkinje fibers) के माध्यम से तेजी से निलय भित्ति में फैलता है।
  4. विश्राम अवस्था में वापसी (T-wave): संकुचन के बाद, कोशिकाएं अपने आयनिक संतुलन को पुनः स्थापित करती हैं (पुनःध्रुवण), जिससे T-तरंग बनती है और हृदय चक्र का एक स्पंदन (Heartbeat) पूरा होता है।

4. नैदानिक महत्व, गणनाएँ और सूत्र (Clinical Significance & Calculations)

ECG न केवल संरचनात्मक जानकारी देता है, बल्कि यह हृदय दर (Heart Rate) की सटीक गणना करने में भी सक्षम है।

हृदय दर की गणना (Calculation of Heart Rate)

एक दिए गए समय अंतराल में QRS सम्मिश्रों (QRS complexes) की संख्या को गिनकर हृदय की धड़कन दर (Heart beat rate) निर्धारित की जा सकती है। दो लगातार 'R' तरंगों के बीच की दूरी को R-R अंतराल (R-R Interval) कहते हैं।

$$ \text{Heart Rate (Beats per minute)} = \frac{60}{\text{R-R interval in seconds}} $$

या, यदि ECG पेपर की मानक गति 25 mm/sec है, तो:

$$ \text{Heart Rate} = \frac{1500}{\text{Number of small squares between two R waves}} $$

5. परीक्षा केंद्रित महत्वपूर्ण तथ्य और रोग (Key Exam Takeaways & Diseases)

ECG विचलन और हृदय रोग (ECG Deviations & Heart Diseases):
एक सामान्य व्यक्ति का ECG एक मानक आकृति (Standard shape) का होता है। इस आकृति में कोई भी विचलन या बदलाव किसी संभावित बीमारी का संकेत देता है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निम्नलिखित नैदानिक स्थितियाँ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

  • बढ़ी हुई P-तरंग (Enlarged P-wave): आलिंदों का विस्तार (Enlargement of atria), जैसे कि मिट्रल वाल्व (Mitral valve) के सिकुड़ने पर होता है।
  • बढ़ी हुई Q-तरंग (Deep Q-wave): यह मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (Myocardial Infarction) अर्थात् हार्ट अटैक (Heart Attack) का संकेत है।
  • उठी हुई S-T खंड (Elevated S-T Segment): यह हृदय की पेशियों में तीव्र इस्किमिया (Acute Ischemia) या हृदय पेशी रोधगलन (Myocardial Infarction) को दर्शाता है।
  • सपाट या उल्टी T-तरंग (Flat or Inverted T-wave): यह हृदय की पेशियों को ऑक्सीजन की अपर्याप्त आपूर्ति (Coronary ischemia) या हाइपोकैलिमिया (Hypokalemia - पोटेशियम की कमी) को इंगित करता है।
  • R-R अंतराल का अनियमित होना (Irregular R-R Interval): यह अतालता (Arrhythmia / Fibrillation) को दर्शाता है, जहाँ हृदय की धड़कन की लय बिगड़ जाती है।