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Elasticity: Mechanical Properties of Solids | ठोसों के यांत्रिक गुण

July 16, 2026 |

भौतिक विज्ञान और इंजीनियरिंग में सामग्री के यांत्रिक गुणों (Mechanical properties of materials) का ज्ञान अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब किसी पिंड पर कोई बाह्य विरूपक बल (Deforming force) लगाया जाता है, तो उसके आकार या रूप में परिवर्तन होता है। पिंड का वह गुण जिसके कारण वह विरूपक बल हटा लिए जाने पर अपना प्रारंभिक आकार और रूप पुनः प्राप्त करने की प्रवृत्ति रखता है, प्रत्यास्थता (Elasticity) कहलाता है। इसके विपरीत, जो पदार्थ विरूपक बल हटाने के बाद भी स्थायी रूप से विरूपित रह जाते हैं, उन्हें सुघट्य (Plastic) कहा जाता है। इस लेख में हम प्रतिबल, विकृति, हुक के नियम और विभिन्न प्रत्यास्थता गुणांकों का विस्तृत गणितीय और सैद्धांतिक विश्लेषण करेंगे।

1. प्रतिबल और विकृति (Stress and Strain)

प्रतिबल (Stress): जब किसी पिंड को विरूपक बल के अधीन किया जाता है, तो पिंड के अंदर एक प्रत्यानयन बल (Restoring force) विकसित होता है जो परिमाण में आरोपित बल के बराबर और दिशा में विपरीत होता है। प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले इस आंतरिक प्रत्यानयन बल को प्रतिबल कहा जाता है। यदि अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल \( A \) पर अभिलंबवत बल \( F \) लगाया जाए, तो:

$$ \text{प्रतिबल (Stress)} = \frac{F}{A} $$

प्रतिबल का SI मात्रक \( N m^{-2} \) या पास्कल (Pa) होता है और इसकी विमीय सूत्र \( [ML^{-1}T^{-2}] \) है!

विकृति (Strain): विरूपक बल के परिणामस्वरूप पिंड की विमाओं (Dimensions) में होने वाले भिन्नात्मक परिवर्तन को विकृति कहा जाता है। यह प्रारंभिक विमाओं के सापेक्ष परिवर्तन का अनुपात है, इसलिए यह एक विमाहीन (Dimensionless) राशि है।

2. हुक्स का नियम (Hooke's Law)

छोटे विरूपणों (Small deformations) के लिए, पिंड में उत्पन्न प्रतिबल हमेशा उसमें उत्पन्न विकृति के अनुक्रमानुपाती होता है। इसे हुक का नियम (Hooke's Law) कहा जाता है।

$$ \text{प्रतिबल} \propto \text{विकृति} $$ $$ \text{प्रतिबल} = k \times \text{विकृति} $$

जहाँ \( k \) एक आनुपातिकता स्थिरांक है, जिसे प्रत्यास्थता गुणांक (Modulus of Elasticity) कहा जाता है!

3. प्रतिबल-विकृति वक्र (Stress-Strain Curve)

किसी दी गई सामग्री के लिए तनन प्रतिबल (Tensile stress) के अधीन प्रतिबल और विकृति के बीच के संबंध को प्रायोगिक रूप से ज्ञात किया जा सकता है। एक विशिष्ट धातु के लिए प्रतिबल-विकृति वक्र निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं को दर्शाता है:

  • आनुपातिकता सीमा (Proportional Limit): वक्र के प्रारंभिक रैखिक भाग में प्रतिबल और विकृति एक-दूसरे के अनुक्रमानुपाती होते हैं, यहाँ हुक का नियम पूरी तरह लागू होता है।
  • पराभव बिंदु (Yield Point): वह बिंदु (अक्सर प्रत्यास्थता सीमा) जहाँ तक पिंड विरूपक बल हटाने पर अपने मूल आयाम को पुनः प्राप्त कर लेता है। इसके संगत प्रतिबल को पराभव सामर्थ्य (Yield strength, \(\sigma_y\)) कहते हैं।
  • सुघट्य विरूपण (Plastic Deformation): पराभव बिंदु के बाद, बल थोड़ा सा बढ़ाने पर भी विकृति तेजी से बढ़ती है और बल हटाने पर भी पिंड स्थायी रूप से विरूपित रह जाता है (Permanent set)।
  • चरम तनन सामर्थ्य (Ultimate Tensile Strength, \(\sigma_u\)): यह वक्र पर वह अधिकतम प्रतिबल बिंदु है जिसे सामग्री बिना टूटे सहन कर सकती है। इसके बाद अतिरिक्त विकृति के कारण बिंदु E पर सामग्री टूट जाती है (Fracture)।

4. विभिन्न प्रत्यास्थता गुणांक (Different Elastic Moduli)

पदार्थों के प्रत्यास्थ व्यवहार को मुख्य रूप से तीन प्रकार के प्रत्यास्थता गुणांकों द्वारा वर्णित किया जाता है:

(i) यंग प्रत्यास्थता गुणांक (Young's Modulus, \( Y \))

अनुदैर्ध्य प्रतिबल (Longitudinal stress) और अनुदैर्ध्य विकृति (Longitudinal strain) के अनुपात को यंग प्रत्यास्थता गुणांक कहा जाता है। धातुओं के लिए इसका मान बहुत अधिक होता है, जिसका अर्थ है कि वे अधिक प्रत्यास्थ होते हैं!

$$ Y = \frac{\sigma}{\epsilon} = \frac{F/A}{\Delta L/L} = \frac{F \cdot L}{A \cdot \Delta L} $$

(ii) आयतन प्रत्यास्थता गुणांक (Bulk Modulus, \( K \) या \( B \))

जलीय प्रतिबल (Hydraulic stress) और आयतन विकृति (Volume strain) के अनुपात को आयतन प्रत्यास्थता गुणांक कहा जाता है।

$$ B = -\frac{p}{\Delta V / V} $$

यहाँ ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि दाब (\( p \)) बढ़ने पर आयतन (\( \Delta V \)) घटता है। आयतन प्रत्यास्थता गुणांक का व्युत्क्रम संपीड्यता (Compressibility, \( k \)) कहलाता है।

(iii) दृढ़ता गुणांक (Shear Modulus or Modulus of Rigidity, \( \eta \) या \( G \))

अपरूपण प्रतिबल (Shearing stress) और संगत अपरूपण विकृति (Shearing strain) के अनुपात को दृढ़ता गुणांक कहते हैं। अधिकांश सामग्रियों के लिए \( G \approx Y/3 \) होता है!

$$ G = \frac{\text{Shearing Stress}}{\text{Shearing Strain}} = \frac{F/A}{\Delta x/L} = \frac{F}{A \cdot \theta} $$

पॉयसन अनुपात (Poisson's Ratio, \( \sigma \))

प्रत्यास्थता सीमा के भीतर, किसी खींचे गए तार में पार्श्विक विकृति (Lateral strain, \(\Delta d/d\)) और अनुदैर्ध्य विकृति (Longitudinal strain, \(\Delta L/L\)) का अनुपात पॉयसन अनुपात कहलाता है। यह एक शुद्ध संख्या है और इसकी कोई विमा या मात्रक नहीं होता।

$$ \sigma = \frac{\Delta d / d}{\Delta L / L} $$

5. गुणांकों के बीच का अंतर्संबंध (Interrelationship between Elastic Moduli)

समदैशिक (Isotropic) और समांगी (Homogeneous) ठोसों के लिए चारों प्रत्यास्थता नियतांकों (\( Y, K, \eta, \sigma \)) के बीच निम्नलिखित महत्वपूर्ण गणितीय संबंध होते हैं:

  1. $$ Y = 3K(1 - 2\sigma) $$
  2. $$ Y = 2\eta(1 + \sigma) $$
  3. $$ \sigma = \frac{3K - 2\eta}{6K + 2\eta} $$
  4. $$ \frac{9}{Y} = \frac{1}{K} + \frac{3}{\eta} $$

6. खींचे हुए तार में प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा (Elastic Potential Energy in a Stretched Wire)

जब किसी तार को तनन प्रतिबल (Tensile stress) के अधीन रखा जाता है, तो अंतर-परमाण्विक बलों के विरुद्ध कार्य किया जाता है। यह कार्य तार में प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा (Elastic potential energy) के रूप में संचित हो जाता है।

यदि \( L \) लंबाई और \( A \) अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाले तार की लंबाई में \( l \) की वृद्धि होती है, तो किया गया कुल कार्य \( W = \frac{1}{2} \times \text{बल} \times \text{विस्तार} \) होता है।

प्रति एकांक आयतन की प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा (Energy Density, \( u \)):

$$ u = \frac{1}{2} \times \text{प्रतिबल (Stress)} \times \text{विकृति (Strain)} $$ $$ u = \frac{1}{2} \sigma \epsilon = \frac{1}{2} \frac{\sigma^2}{Y} = \frac{1}{2} Y \epsilon^2 $$

महत्वपूर्ण आंकिक प्रश्न (Solved Numericals)

प्रश्न 1: यंग प्रत्यास्थता गुणांक और विकृति ऊर्जा (Young's Modulus and Elongation)

एक संरचनात्मक स्टील की छड़ की त्रिज्या 10 mm और लंबाई 1.0 m है। 100 kN का एक बल इसे इसकी लंबाई के अनुदिश खींचता है। छड़ पर (a) प्रतिबल, (b) लंबाई में वृद्धि (Elongation), और (c) विकृति की गणना करें। (स्टील का यंग प्रत्यास्थता गुणांक \( Y = 2.0 \times 10^{11} \text{ N m}^{-2} \))!

हल (Solution):

  1. प्रतिबल (Stress) की गणना: छड़ का अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल \( A = \pi r^2 \) $$ A = 3.14 \times (10 \times 10^{-3} \text{ m})^2 = 3.14 \times 10^{-4} \text{ m}^2 $$ $$ \text{प्रतिबल} = \frac{F}{A} = \frac{100 \times 10^3 \text{ N}}{3.14 \times 10^{-4} \text{ m}^2} = 3.18 \times 10^8 \text{ N m}^{-2} $$
  2. लंबाई में वृद्धि (Elongation, \( \Delta L \)): सूत्र \( Y = \frac{\text{Stress}}{\Delta L / L} \) का उपयोग करते हुए, $$ \Delta L = \frac{\text{Stress} \times L}{Y} = \frac{3.18 \times 10^8 \times 1.0}{2.0 \times 10^{11}} = 1.59 \times 10^{-3} \text{ m} = 1.59 \text{ mm} $$
  3. विकृति (Strain): $$ \text{Strain} = \frac{\Delta L}{L} = \frac{1.59 \times 10^{-3} \text{ m}}{1.0 \text{ m}} = 1.59 \times 10^{-3} $$ प्रतिशत में यह \( 0.16\% \) होगा।
अतः, छड़ पर प्रतिबल \( 3.18 \times 10^8 \text{ N m}^{-2} \), लंबाई में वृद्धि \( 1.59 \text{ mm} \) और विकृति \( 1.59 \times 10^{-3} \) होगी।

प्रश्न 2: अपरूपण प्रतिबल एवं विस्थापन (Shear Modulus and Displacement)

50 cm भुजा और 10 cm मोटाई वाले सीसे (Lead) के एक वर्गाकार स्लैब के संकीर्ण फलक पर \( 9.0 \times 10^4 \text{ N} \) का अपरूपण बल (Shearing force) लगाया गया है। इसका निचला किनारा फर्श से जकड़ा हुआ है (Riveted)। स्लैब का ऊपरी किनारा कितना विस्थापित होगा? (सीसे का दृढ़ता गुणांक \( G = 5.6 \times 10^9 \text{ N m}^{-2} \))!

हल (Solution):

  1. फलक का क्षेत्रफल (Area): वह क्षेत्रफल जिसके समानांतर बल लगाया जाता है: $$ A = 50 \text{ cm} \times 10 \text{ cm} = 0.5 \text{ m} \times 0.1 \text{ m} = 0.05 \text{ m}^2 $$
  2. अपरूपण प्रतिबल (Shearing Stress): $$ \text{Stress} = \frac{F}{A} = \frac{9.0 \times 10^4 \text{ N}}{0.05 \text{ m}^2} = 1.80 \times 10^6 \text{ N m}^{-2} $$
  3. विस्थापन (Displacement, \( \Delta x \)): अपरूपण विकृति \( = \frac{\Delta x}{L} = \frac{\text{Stress}}{G} \) $$ \Delta x = \frac{\text{Stress} \times L}{G} $$ यहाँ \( L \) स्लैब की वह भुजा है जिसके अनुदिश विस्थापन मापा जा रहा है (अथार्त ऊंचाई = 50 cm = 0.5 m)। $$ \Delta x = \frac{1.80 \times 10^6 \times 0.5}{5.6 \times 10^9} = 1.6 \times 10^{-4} \text{ m} = 0.16 \text{ mm} $$
अतः, सीसे के स्लैब का ऊपरी किनारा 0.16 mm विस्थापित होगा।