भौतिक विज्ञान (Physics) में विद्युतिकी (Electricity) और चुम्बकत्व (Magnetism) को लंबे समय तक दो अलग-अलग शाखाओं के रूप में देखा जाता था। लेकिन 19वीं सदी में ओर्स्टेड, एम्पीयर और मैक्सवेल जैसे वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया कि ये दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इस लेख में हम विद्युत धारा के मूलभूत सिद्धांतों, ओम का नियम, प्रतिरोधकता पर ताप का प्रभाव, और धारा के चुम्बकीय प्रभाव (Magnetic Effects of Current) का गहराई से गणितीय एवं सैद्धांतिक अध्ययन करेंगे।
1. विद्युत धारा (Electric Current) और ओम का नियम (Ohm's Law)
विद्युत धारा (Electric Current, \(I\)): किसी चालक (Conductor) में आवेश (Charge) के प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहते हैं। यदि किसी चालक के अनुप्रस्थ काट (Cross-section) से \(t\) समय में \(q\) आवेश प्रवाहित होता है, तो विद्युत धारा:
$$ I = \frac{q}{t} $$विद्युत धारा का SI मात्रक एम्पीयर (Ampere, A) है।
ओम का नियम (Ohm's Law): इस नियम के अनुसार, यदि किसी चालक की भौतिक अवस्थाएँ (जैसे ताप, दाब, लम्बाई आदि) नियत रहें, तो उसके सिरों पर लगाया गया विभवांतर (Potential Difference, \(V\)) उसमें प्रवाहित होने वाली धारा (\(I\)) के अनुक्रमानुपाती होता है।
$$ V \propto I \implies V = IR $$जहाँ \(R\) चालक का प्रतिरोध (Resistance) है, जिसका मात्रक ओम (\(\Omega\)) होता है।
2. विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy) एवं विद्युत शक्ति (Electrical Power)
- विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy, \(E\)): जब किसी परिपथ में धारा प्रवाहित होती है, तो आवेश को विभवांतर के विरुद्ध ले जाने में किया गया कार्य ही विद्युत ऊर्जा के रूप में व्यय होता है। \(t\) समय के लिए प्रवाहित \(I\) धारा द्वारा उत्पन्न ऊष्मा या ऊर्जा का सूत्र है: $$ E = V I t = I^2 R t = \frac{V^2}{R} t $$ इसका SI मात्रक जूल (Joule) है।
- विद्युत शक्ति (Electrical Power, \(P\)): किसी विद्युत परिपथ में ऊर्जा के क्षय (या कार्य करने) की दर को विद्युत शक्ति कहते हैं। $$ P = \frac{E}{t} = VI = I^2 R = \frac{V^2}{R} $$ विद्युत शक्ति का SI मात्रक वाट (Watt, W) है।
3. विद्युत प्रतिरोधकता (Resistivity, \(\rho\)) और चालकता (Conductivity, \(\sigma\)) पर ताप का प्रभाव
किसी चालक का प्रतिरोध उसकी लम्बाई (\(l\)) के अनुक्रमानुपाती और उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (\(A\)) के व्युत्क्रमानुपाती होता है:
$$ R = \rho \frac{l}{A} $$जहाँ \(\rho\) (Rho) पदार्थ की विद्युत प्रतिरोधकता (Electrical Resistivity) या विशिष्ट प्रतिरोध है। इसका मात्रक ओह्म-मीटर (\(\Omega \cdot m\)) होता है।
प्रतिरोधकता के व्युत्क्रम को विद्युत चालकता (Electrical Conductivity, \(\sigma\)) कहते हैं:
$$ \sigma = \frac{1}{\rho} $$ताप का प्रभाव (Effect of Temperature): धातुओं (Conductors) का ताप बढ़ाने पर उनके धनायनों के कंपन का आयाम बढ़ जाता है, जिससे इलेक्ट्रॉनों की टक्करों की आवृत्ति (Collision frequency) बढ़ जाती है। फलस्वरूप, विश्रांति काल (Relaxation time) घट जाता है और प्रतिरोधकता बढ़ जाती है। ताप \(T\) पर प्रतिरोधकता का गणितीय सूत्र है:
$$ \rho_T = \rho_0 [1 + \alpha (T - T_0)] $$जहाँ \(\rho_T\) और \(\rho_0\) क्रमशः \(T\) और संदर्भ ताप \(T_0\) पर प्रतिरोधकता हैं, और \(\alpha\) पदार्थ का प्रतिरोध ताप गुणांक (Temperature Coefficient of Resistivity) है। चूँकि ताप बढ़ने पर \(\rho\) बढ़ता है, इसलिए धातुओं की विद्युत चालकता (\(\sigma\)) ताप बढ़ने पर घटती है। (अर्धचालकों या Semiconductors के मामले में यह व्यवहार विपरीत होता है)।
4. धारा का चुम्बकीय प्रभाव (Magnetic Effect of Current)
जब किसी तार में विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उसके चारों ओर एक चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field) उत्पन्न हो जाता है। इस घटना को धारा का चुम्बकीय प्रभाव कहते हैं।
(i) ओर्स्टेड का प्रयोग (Oersted's Experiment)
हेंस क्रिश्चियन ओर्स्टेड (Hans Christian Oersted) ने 1820 में प्रयोग द्वारा यह प्रदर्शित किया कि जब किसी तार में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो उसके पास रखी चुम्बकीय सुई (Magnetic Compass) विक्षेपित (Deflect) हो जाती है। यह इस बात का प्रथम प्रमाण था कि विद्युत और चुम्बकत्व आपस में संबंधित हैं।
(ii) एम्पीयर का परिपथीय नियम (Ampere's Circuital Law)
यह नियम चुम्बकीय क्षेत्र (\(\vec{B}\)) और उसे उत्पन्न करने वाली विद्युत धारा (\(I\)) के बीच संबंध स्थापित करता है। इसके अनुसार: "किसी बंद वक्र (Closed loop) के परितः चुम्बकीय क्षेत्र \(\vec{B}\) का रेखीय समाकलन (Line integral), उस बंद वक्र द्वारा घिरी हुई कुल धारा \(I\) का \(\mu_0\) गुना होता है।"
$$ \oint \vec{B} \cdot d\vec{l} = \mu_0 I_{enclosed} $$जहाँ \(\mu_0\) निर्वात की चुम्बकशीलता (Permeability of free space, \(4\pi \times 10^{-7} \text{ T m/A}\)) है।
(iii) एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में गतिशील आवेश पर बल (Lorentz Force)
जब कोई \(q\) आवेश, किसी एकसमान चुंबकीय क्षेत्र \(\vec{B}\) में \(\vec{v}\) वेग से गति करता है, तो उस पर एक चुम्बकीय बल कार्य करता है। यदि कण विद्युत (\(\vec{E}\)) और चुम्बकीय (\(\vec{B}\)) दोनों क्षेत्रों में गति कर रहा हो, तो उस पर लगने वाले कुल बल को लॉरेंट्ज़ बल (Lorentz Force) कहते हैं:
$$ \vec{F} = q(\vec{E} + \vec{v} \times \vec{B}) $$यदि केवल चुम्बकीय क्षेत्र उपस्थित हो (\(\vec{E} = 0\)), तो लगने वाला चुम्बकीय बल:
$$ \vec{F}_m = q(\vec{v} \times \vec{B}) $$परिमाण (Magnitude) के रूप में:
$$ F = q v B \sin\theta $$जहाँ \(\theta\), वेग सदिश \(\vec{v}\) और चुम्बकीय क्षेत्र सदिश \(\vec{B}\) के बीच का कोण है। बल की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम (Fleming's Left-Hand Rule) या दाएँ हाथ के पेंच नियम से ज्ञात की जाती है।
महत्वपूर्ण आंकिक प्रश्न (Solved Numericals)
प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से इस खंड के 3 महत्वपूर्ण और जटिल आंकिक प्रश्न (विस्तृत हल सहित) नीचे दिए गए हैं:
प्रश्न 1: प्रतिरोध और ताप का प्रभाव (Resistance and Temperature Dependence)
कमरे के ताप (\(27^\circ \text{C}\)) पर किसी तापन अवयव (Heating element) का प्रतिरोध \(100 \, \Omega\) है। यदि इसका प्रतिरोध \(117 \, \Omega\) हो जाता है, तो अवयव का ताप क्या होगा? (पदार्थ का प्रतिरोध ताप गुणांक \(\alpha = 1.70 \times 10^{-4} ^\circ\text{C}^{-1}\) दिया गया है)।
हल (Solution):
- प्रारंभिक ताप \(T_1 = 27^\circ \text{C}\)
- प्रारंभिक प्रतिरोध \(R_1 = 100 \, \Omega\)
- अंतिम प्रतिरोध \(R_2 = 117 \, \Omega\)
- ताप गुणांक \(\alpha = 1.70 \times 10^{-4} ^\circ\text{C}^{-1}\)
हम जानते हैं कि प्रतिरोध की ताप पर निर्भरता का सूत्र है:
$$ R_2 = R_1 [1 + \alpha (T_2 - T_1)] $$ $$ 117 = 100 [1 + 1.70 \times 10^{-4} \times (T_2 - 27)] $$ $$ \frac{117}{100} = 1 + 1.70 \times 10^{-4} \times (T_2 - 27) $$ $$ 1.17 - 1 = 1.70 \times 10^{-4} \times (T_2 - 27) $$ $$ 0.17 = 1.70 \times 10^{-4} \times (T_2 - 27) $$ $$ (T_2 - 27) = \frac{0.17}{1.70 \times 10^{-4}} = \frac{0.17}{0.00017} = 1000 $$ $$ T_2 = 1000 + 27 = 1027^\circ \text{C} $$अतः अवयव का अंतिम ताप \(1027^\circ \text{C}\) होगा।
प्रश्न 2: एम्पीयर का परिपथीय नियम (Ampere's Circuital Law Application)
एक लंबे सीधे तार में \(10 \text{ A}\) की स्थायी विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। तार से \(20 \text{ cm}\) की लंबवत दूरी पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र (\(\vec{B}\)) के परिमाण की गणना करें। (\(\mu_0 = 4\pi \times 10^{-7} \text{ T m/A}\))
हल (Solution):
- तार में प्रवाहित धारा \(I = 10 \text{ A}\)
- तार से दूरी \(r = 20 \text{ cm} = 0.20 \text{ m}\)
एम्पीयर के परिपथीय नियम के अनुप्रयोग से, किसी सीधे लंबे तार के कारण \(r\) दूरी पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का सूत्र होता है:
$$ B = \frac{\mu_0 I}{2 \pi r} $$ $$ B = \frac{(4\pi \times 10^{-7}) \times 10}{2 \pi \times 0.20} $$ $$ B = \frac{2 \times 10^{-7} \times 10}{0.20} = \frac{20 \times 10^{-7}}{0.20} $$ $$ B = 100 \times 10^{-7} = 1.0 \times 10^{-5} \text{ T} $$तार से 20 cm की दूरी पर चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण \(1.0 \times 10^{-5} \text{ Tesla}\) होगा।
प्रश्न 3: गतिशील आवेश पर चुम्बकीय बल (Lorentz Force on a Moving Charge)
एक इलेक्ट्रॉन \(3 \times 10^6 \text{ m/s}\) के वेग से एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र \(0.3 \text{ T}\) की दिशा से \(30^\circ\) का कोण बनाते हुए प्रवेश करता है। इलेक्ट्रॉन पर लगने वाले चुम्बकीय बल के परिमाण की गणना करें। (इलेक्ट्रॉन पर आवेश \(q = 1.6 \times 10^{-19} \text{ C}\))
हल (Solution):
- इलेक्ट्रॉन का वेग \(v = 3 \times 10^6 \text{ m/s}\)
- चुम्बकीय क्षेत्र \(B = 0.3 \text{ T}\)
- कोण \(\theta = 30^\circ\)
- आवेश (परिमाण) \(q = 1.6 \times 10^{-19} \text{ C}\)
चुम्बकीय बल (लॉरेंट्ज़ बल का चुम्बकीय घटक) का सूत्र:
$$ F = q v B \sin\theta $$ $$ F = (1.6 \times 10^{-19}) \times (3 \times 10^6) \times (0.3) \times \sin(30^\circ) $$ $$ F = (1.6 \times 10^{-19}) \times (3 \times 10^6) \times (0.3) \times (0.5) $$ $$ F = 1.6 \times 3 \times 0.3 \times 0.5 \times 10^{-13} $$ $$ F = 4.8 \times 0.15 \times 10^{-13} = 0.72 \times 10^{-13} \text{ N} $$ $$ F = 7.2 \times 10^{-14} \text{ N} $$इलेक्ट्रॉन पर कार्य करने वाले चुम्बकीय बल का परिमाण \(7.2 \times 10^{-14} \text{ N}\) होगा।