Loading...

Human Physiology | Digestive Glands (पाचक ग्रंथियाँ)

July 19, 2026 |

मानव शरीरिकी (Human Anatomy) और जीव विज्ञान (Biology) में पाचक ग्रंथियाँ (Digestive Glands) आहार नाल (Alimentary Canal) से जुड़ी वे विशिष्ट संरचनाएं हैं, जो विभिन्न प्रकार के रसों (Juices) और पाचक एंजाइमों (Digestive Enzymes) का स्राव करती हैं। इन स्रावों के बिना जटिल भोज्य पदार्थों (Carbohydrates, Proteins, Fats) का सरलीकरण और अवशोषण असंभव है। मानव पाचन तंत्र में मुख्य रूप से पाँच प्रकार की पाचक ग्रंथियाँ पाई जाती हैं: लार ग्रंथियाँ (Salivary Glands), जठर ग्रंथियाँ (Gastric Glands), यकृत (Liver), अग्नाशय (Pancreas), और आंत्रीय ग्रंथियाँ (Intestinal Glands)।


1. लार ग्रंथियाँ (Salivary Glands)

लार ग्रंथियाँ मुख गुहा (Buccal Cavity) के ठीक बाहर स्थित होती हैं और अपना स्राव (लार / Saliva) मुख गुहा में मुक्त करती हैं। मानव में ये तीन जोड़ी (Three pairs) होती हैं:

  • पैरोटिड ग्रंथियाँ (Parotid Glands): ये सबसे बड़ी लार ग्रंथियाँ हैं जो कानों के ठीक नीचे (Cheeks) स्थित होती हैं। इनमें वायरल संक्रमण (Viral infection) होने पर 'कण्ठमाला' या मम्प्स (Mumps) नामक रोग हो जाता है।
  • सब-मैक्सिलरी या सब-मैंडिबुलर ग्रंथियाँ (Sub-maxillary / Sub-mandibular Glands): ये निचले जबड़े (Lower jaw) के कोण पर स्थित होती हैं।
  • सब-लिंगुअल ग्रंथियाँ (Sub-lingual Glands): ये सबसे छोटी ग्रंथियाँ हैं जो जीभ (Tongue) के ठीक नीचे स्थित होती हैं।
  • स्राव और कार्य: लार का pH लगभग 6.8 (हल्का अम्लीय) होता है। इसमें लार एमाइलेज या टायलिन (Salivary Amylase / Ptyalin) नामक एंजाइम होता है जो स्टार्च (Carbohydrate) का पाचन शुरू करता है। इसके अलावा इसमें लाइसोजाइम (Lysozyme) होता है, जो जीवाणुरोधी (Antibacterial) एजेंट के रूप में कार्य करता है।

2. जठर ग्रंथियाँ (Gastric Glands)

ये ग्रंथियाँ आमाशय (Stomach) की श्लेष्मिका परत (Mucosa layer) में पाई जाती हैं। जठर ग्रंथियों में मुख्य रूप से तीन प्रकार की स्रावी कोशिकाएं (Secretory cells) होती हैं, जो मिलकर जठर रस (Gastric Juice) का निर्माण करती हैं:

  • श्लेष्मा ग्रीवा कोशिकाएं (Mucous neck cells): ये श्लेष्मा (Mucus) का स्राव करती हैं, जो आमाशय की आंतरिक परत को अत्यधिक अम्लीय HCl और पेप्सिन एंजाइम के प्रभाव से बचाता है।
  • मुख्य या पेप्टिक कोशिकाएं (Chief or Peptic cells): ये निष्क्रिय प्रो-एंजाइम पेप्सिनोजेन (Pepsinogen) तथा थोड़ी मात्रा में जठर लाइपेज (Gastric Lipase) का स्राव करती हैं। बच्चों में ये 'प्रोरेनिन' (Prorenin) भी स्रावित करती हैं जो दूध के प्रोटीन को पचाता है।
  • भित्तीय या ऑक्सिन्टिक कोशिकाएं (Parietal or Oxyntic cells): ये हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) और कैसल का नैज कारक (Castle's Intrinsic Factor) स्रावित करती हैं। HCl निष्क्रिय पेप्सिनोजेन को सक्रिय पेप्सिन में बदलता है और भोजन के साथ आए रोगाणुओं को नष्ट करता है। इंट्रिन्सिक फैक्टर विटामिन B12 के अवशोषण के लिए आवश्यक है।

3. यकृत (Liver) और पित्ताशय (Gall Bladder)

यकृत मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि (Largest Gland) है, जिसका वजन एक वयस्क में लगभग 1.2 से 1.5 किलोग्राम होता है। यह उदर गुहा (Abdominal cavity) में डायफ्राम के ठीक नीचे दाहिनी ओर स्थित होता है।

  • संरचना (Structure): यकृत दो पालियों (Right and Left Lobes) में बंटा होता है। यकृत पालिकाएं (Hepatic lobules) यकृत की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाइयाँ (Structural and functional units) हैं। प्रत्येक पालिका संयोजी ऊतक की एक पतली परत से ढकी होती है जिसे ग्लिसन का कैप्सूल (Glisson's capsule) कहते हैं।
  • पित्त का निर्माण (Formation of Bile): यकृत कोशिकाएं (Hepatic cells) पित्त (Bile) का स्राव करती हैं। पित्त यकृत नलिकाओं (Hepatic ducts) से होते हुए एक पतली पेशीय थैली, पित्ताशय (Gall Bladder) में जाकर सांद्रित (Concentrated) और संग्रहित (Stored) होता है।
  • पित्त रस का संघटन (Composition of Bile Juice): पित्त रस में कोई पाचक एंजाइम नहीं होता है। इसमें पित्त लवण (Bile salts - जैसे सोडियम ग्लाइकोकोलेट), पित्त वर्णक (Bile pigments - बिलिरुबिन और बिलिवर्डिन / Bilirubin & Biliverdin), कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) और फॉस्फोलिपिड्स होते हैं।
  • कार्य (Functions): पित्त वसा के पायसीकरण (Emulsification) का कार्य करता है, अर्थात यह वसा की बड़ी बूंदों को तोड़कर छोटी बूंदों (Micelles) में बदल देता है, जिससे लाइपेज एंजाइम उन पर आसानी से काम कर सके। यह वसा में घुलनशील विटामिन (A, D, E, K) के अवशोषण में भी मदद करता है।

4. अग्नाशय (Pancreas)

अग्नाशय एक मिश्रित ग्रंथि (Heterocrine Gland) है, अर्थात यह बहिःस्रावी (Exocrine) और अंतःस्रावी (Endocrine) दोनों रूप में कार्य करती है। यह 'U' आकार की ग्रहणी (Duodenum) के दोनों भुजाओं के बीच स्थित होती है।

  • बहिःस्रावी भाग (Exocrine Part): यह भाग क्षारीय अग्नाशयी रस (Pancreatic Juice) का स्राव करता है। इसे 'पूर्ण पाचक रस' (Complete digestive juice) भी कहा जाता है क्योंकि इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा और न्यूक्लिक अम्ल को पचाने वाले एंजाइम होते हैं।
  • अग्नाशयी एंजाइम (Pancreatic Enzymes): इसमें निष्क्रिय एंजाइम ट्रिप्सिनोजेन (Trypsinogen), कायमोट्रिप्सिनोजेन (Chymotrypsinogen), और प्रोकार्बोक्सीपेप्टिडेज (Procarboxypeptidases) होते हैं। इसके साथ ही अग्नाशयी एमाइलेज (Pancreatic Amylase), लाइपेज (Lipases) और न्यूक्लिएज (Nucleases) भी पाए जाते हैं।
  • अंतःस्रावी भाग (Endocrine Part): इसमें Islets of Langerhans पाए जाते हैं, जो इंसुलिन (Insulin) और ग्लूकैगोन (Glucagon) हार्मोन स्रावित करते हैं, जो रक्त में शर्करा (Glucose) के स्तर को नियंत्रित करते हैं।

5. आंत्रीय ग्रंथियां (Intestinal Glands)

छोटी आंत की श्लेष्मिका परत (Mucosa) में आंत्रीय ग्रंथियां स्थित होती हैं जो आंत्र रस (Succus Entericus) स्रावित करती हैं।

  • लीबरकुन की प्रगुहिकाएं (Crypts of Lieberkuhn): ये रसांकुरों (Villi) के आधारों के बीच स्थित होती हैं। इनकी पैनेथ कोशिकाएं (Paneth cells) जीवाणुरोधी एंजाइम (Lysozyme) स्रावित करती हैं।
  • ब्रूनर की ग्रंथियां (Brunner's Glands): ये केवल ग्रहणी (Duodenum) की अधःश्लेष्मिका (Sub-mucosa) परत में पाई जाती हैं। ये क्षारीय श्लेष्मा (Alkaline mucus) स्रावित करती हैं जो अम्लीय काइम (Chyme) को बेअसर करता है।
  • आंत्र रस (Succus Entericus): इसमें माल्टेज (Maltase), डाइपेप्टिडेज (Dipeptidases), लाइपेज (Lipases) और न्यूक्लियोसाइडेज (Nucleosidases) जैसे एंजाइम होते हैं जो पाचन प्रक्रिया के अंतिम चरण को पूरा करते हैं।
Detailed diagram of human digestive glands showing Liver, Gall Bladder, Pancreas, and Duodenum with their ducts
चित्र: प्रमुख पाचक ग्रंथियाँ (यकृत, पित्ताशय, अग्नाशय) और उनकी नलिकाओं का तंत्र (Duct System of Digestive Glands)

6. जैव-रासायनिक समीकरण: एंजाइमों की कार्यप्रणाली (Biochemical Equations of Digestion)

पाचक ग्रंथियों द्वारा स्रावित एंजाइम विभिन्न पोषक तत्वों को उनके सरलतम अवशोषण योग्य रूपों (Monomers) में तोड़ते हैं। इसे निम्नलिखित समीकरणों द्वारा समझा जा सकता है:

1. कार्बोहाइड्रेट का पाचन (Digestion of Carbohydrates):

$$ \text{Starch} \xrightarrow[\text{pH 6.8}]{\text{Salivary Amylase}} \text{Maltose (Disaccharide)} $$ $$ \text{Maltose} \xrightarrow{\text{Maltase (Succus Entericus)}} \text{Glucose} + \text{Glucose} $$

2. प्रोटीन का पाचन (Digestion of Proteins):

आमाशय में (अम्लीय माध्यम, pH ~1.8):

$$ \text{Pepsinogen (Inactive)} \xrightarrow{\text{HCl}} \text{Pepsin (Active)} $$ $$ \text{Proteins} \xrightarrow{\text{Pepsin}} \text{Proteoses} + \text{Peptones} $$

छोटी आंत में (क्षारीय माध्यम, pH ~7.8):

$$ \text{Trypsinogen (Inactive)} \xrightarrow{\text{Enterokinase}} \text{Trypsin (Active)} $$ $$ \text{Proteins / Peptones} \xrightarrow{\text{Trypsin / Chymotrypsin}} \text{Dipeptides} $$ $$ \text{Dipeptides} \xrightarrow{\text{Dipeptidases}} \text{Amino Acids} $$

3. वसा का पाचन (Digestion of Fats):

$$ \text{Fats} \xrightarrow{\text{Bile Salts (Emulsification)}} \text{Emulsified Fats (Micelles)} $$ $$ \text{Emulsified Fats} \xrightarrow{\text{Pancreatic Lipase}} \text{Diglycerides} \xrightarrow{\text{Lipase}} \text{Monoglycerides} \xrightarrow{\text{Lipase}} \text{Fatty Acids} + \text{Glycerol} $$

7. भोजन के पाचन की समग्र कार्यविधि (Mechanism of Digestion Process)

पाचक ग्रंथियों के समन्वित कार्य से आहार नाल में पाचन प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में संपन्न होती है:

  1. मुख गुहा में (In Buccal Cavity): लार ग्रंथियों से स्रावित लार भोजन को चिकना बनाकर 'बोलस' (Bolus) में बदल देती है। यहाँ लगभग 30% स्टार्च का पाचन टायलिन एंजाइम द्वारा माल्टोज में हो जाता है।
  2. आमाशय में (In Stomach): बोलस आमाशय में पहुँचकर जठर रस के साथ मथकर 'काइम' (Chyme) में बदल जाता है। HCl माध्यम को अत्यधिक अम्लीय (pH 1.8) बनाता है। यहाँ पेप्सिन द्वारा प्रोटीन का आंशिक पाचन होता है।
  3. ग्रहणी में (In Duodenum): काइम ग्रहणी में प्रवेश करता है। यकृत से आया पित्त रस वसा का पायसीकरण (Emulsification) करता है और काइम को क्षारीय बनाता है। इसी समय अग्नाशयी रस के एंजाइम (ट्रिप्सिन, एमाइलेज, लाइपेज) कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के बड़े अणुओं को छोटे अणुओं (Dipeptides, Disaccharides) में तोड़ देते हैं।
  4. मध्यांत्र और शेषांत्र में (In Jejunum & Ileum): आंत्रीय ग्रंथियों से स्रावित 'सक्कस एंटेरिकस' के एंजाइम (Dipeptidases, Maltase, Sucrase, Lactase) इन छोटे अणुओं को अंततः अवशोषण योग्य मोनोमर्स (अमीनो अम्ल, ग्लूकोज, फैटी एसिड) में बदल देते हैं। इसके बाद पचे हुए भोजन का अवशोषण (Absorption) आंत के रसांकुरों (Villi) द्वारा कर लिया जाता है।

8. परीक्षा केंद्रित महत्वपूर्ण तथ्य और रोग (Key Exam Takeaways & Disorders)

पाचन ग्रंथियों से संबंधित महत्वपूर्ण रोग एवं अपवाद (Important Diseases & Exceptions):

1. पीलिया (Jaundice): यह यकृत (Liver) का सबसे सामान्य रोग है। जब यकृत कोशिकाएं ठीक से काम नहीं करती हैं, तो पित्त वर्णक (मुख्यतः बिलिरुबिन / Bilirubin) रक्त में जमा होने लगता है, जिससे त्वचा और आंखें पीली पड़ जाती हैं।

2. पित्ताशय की पथरी (Gallstones): जब पित्त में कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है, तो वह क्रिस्टलीकृत होकर पथरी का रूप ले लेता है। इसे 'कोलिथियासिस' (Cholelithiasis) कहते हैं। यह पित्त वाहिनी को अवरुद्ध कर भयंकर दर्द पैदा कर सकता है।

3. एंटेरोकाइनेज (Enterokinase) का अपवाद: यह छोटी आंत (आंत्र रस) द्वारा स्रावित एक नॉन-डाइजेस्टिव एंजाइम (Non-digestive enzyme) है। इसका काम सीधे भोजन को पचाना नहीं है, बल्कि यह अग्नाशय से स्रावित निष्क्रिय ट्रिप्सिनोजेन (Trypsinogen) को सक्रिय ट्रिप्सिन (Trypsin) में बदलता है, जो आगे चलकर अन्य सभी अग्नाशयी एंजाइमों को सक्रिय करता है।

4. ग्लिसन का कैप्सूल (Glisson's Capsule): यह स्तनधारियों (Mammals) के यकृत की एक अद्वितीय विशेषता (Characteristic feature) है, जो अन्य कशेरुकियों में नहीं पाई जाती है।