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Human Reproductive System | मानव जनन तंत्र

July 19, 2026 |

मानव शारीरिकी (Human Anatomy) और जीव विज्ञान (Biology) में मानव जनन तंत्र (Human Reproductive System) वह जटिल अंग-तंत्र है जो मानव प्रजाति के अस्तित्व और निरंतरता को बनाए रखने के लिए उत्तरदायी है। मनुष्य लैंगिक रूप से जनन करने वाले (Sexually reproducing) और सजीवप्रजक या जरायुज (Viviparous) प्राणी हैं, अर्थात् वे सीधे शिशु को जन्म देते हैं। मानव जनन प्रक्रिया में मुख्य रूप से युग्मकों का निर्माण (Gametogenesis), शुक्राणुओं का मादा जनन पथ में स्थानांतरण (Insemination), निषेचन (Fertilization), भ्रूणीय विकास (Embryonic development) और प्रसव (Parturition) शामिल हैं। इस लेख में हम नर एवं मादा प्रजनन अंगों की विस्तृत संरचना और युग्मक जनन की प्रक्रिया का गहन अध्ययन करेंगे।


1. नर जनन तंत्र (Male Reproductive System)

नर जनन तंत्र श्रोणि क्षेत्र (Pelvic region) में स्थित होता है। इसके अंतर्गत एक जोड़ा वृषण (Testes), सहायक नलिकाएं (Accessory ducts), ग्रंथियां (Glands) और बाह्य जननेंद्रिय (External genitalia) शामिल हैं。

A. वृषण (Testes) की आंतरिक संरचना

  • वृषण कोष (Scrotum): वृषण उदर गुहा (Abdominal cavity) के बाहर एक थैली में स्थित होते हैं जिसे वृषण कोष कहते हैं। यह वृषणों के तापमान को शरीर के सामान्य तापमान से 2-2.5°C कम रखने में मदद करता है, जो शुक्राणु जनन (Spermatogenesis) के लिए अत्यंत आवश्यक है।
  • आकार और कक्ष: प्रत्येक वृषण अंडाकार होता है, जिसकी लंबाई 4-5 cm और चौड़ाई 2-3 cm होती है। प्रत्येक वृषण में लगभग 250 कक्ष होते हैं जिन्हें वृषण पालिकाएं (Testicular lobules) कहते हैं।
  • शुक्रजनक नलिकाएं (Seminiferous Tubules): प्रत्येक पालिका में 1 से 3 अत्यधिक कुंडलित नलिकाएं होती हैं, जिनमें शुक्राणु उत्पन्न होते हैं। इन नलिकाओं के भीतर दो प्रकार की कोशिकाएं पाई जाती हैं:
    • नर जर्म कोशिकाएं (Male germ cells / Spermatogonia): ये अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) द्वारा शुक्राणुओं का निर्माण करती हैं।
    • सर्टोली कोशिकाएं (Sertoli cells): ये विकसित हो रही जर्म कोशिकाओं को पोषण (Nutrition) प्रदान करती हैं।
  • अंतराली स्थान और लीडिग कोशिकाएं (Leydig Cells): शुक्रजनक नलिकाओं के बाहर के खाली स्थान (Interstitial space) में लीडिग कोशिकाएं पाई जाती हैं। ये कोशिकाएं वृषण हार्मोन अर्थात् एंड्रोजन (Androgens / Testosterone) का संश्लेषण और स्राव करती हैं।

B. पुरुष सहायक नलिकाएं और ग्रंथियां (Male Accessory Ducts & Glands)

  • सहायक नलिकाओं का क्रम: वृषण जालिका (Rete testis) → शुक्रवाहिकाएं (Vasa efferentia) → अधिवृषण (Epididymis) → शुक्रवाहक (Vas deferens)। अधिवृषण वृषण की पश्च सतह पर स्थित होता है और शुक्राणुओं को अस्थायी रूप से संग्रहित करता है।
  • ग्रंथियां: इसमें एक जोड़ा शुक्राशय (Seminal vesicles), एक पुरस्थ ग्रंथि (Prostate gland) और एक जोड़ा बल्बोयूरेथ्रल ग्रंथि (Bulbourethral gland / Cowper's gland) शामिल हैं। इन ग्रंथियों का स्राव शुक्रीय प्लाज्मा (Seminal plasma) बनाता है, जो फ्रुक्टोज (Fructose), कैल्शियम और कुछ एंजाइमों से भरपूर होता है।
Diagrammatic sectional view of male pelvis showing reproductive system
चित्र: मानव नर जनन तंत्र (Male Reproductive System) का आरेखीय काट

2. मादा जनन तंत्र (Female Reproductive System)

मादा जनन तंत्र भी श्रोणि क्षेत्र में स्थित होता है। इसमें एक जोड़ा अंडाशय (Ovaries), एक जोड़ा अंडवाहिनी (Oviducts / Fallopian tubes), गर्भाशय (Uterus), गर्भाशय ग्रीवा (Cervix), योनि (Vagina) और बाह्य जननेंद्रिय (External genitalia) शामिल होते हैं। इसके साथ एक जोड़ा स्तन ग्रंथियां (Mammary glands) भी संरचनात्मक और कार्यात्मक रूप से जुड़ी होती हैं。

A. अंडाशय (Ovaries)

  • कार्य: ये प्राथमिक मादा यौन अंग हैं जो मादा युग्मक (Ovum / अंडाणु) और कई स्टेरॉयड हार्मोन (Ovarian hormones) उत्पन्न करते हैं।
  • संरचना: अंडाशय उदर के निचले भाग में दोनों ओर स्थित होते हैं। प्रत्येक अंडाशय एक पतले उपकला (Epithelium) द्वारा ढका होता है जो डिम्बग्रंथि पीठिका (Ovarian stroma) को घेरता है। पीठिका दो क्षेत्रों में विभाजित होती है - बाहरी वल्कुट (Peripheral cortex) और आंतरिक मध्यांश (Inner medulla)।

B. अंडवाहिनी (Fallopian Tubes) और गर्भाशय (Uterus)

  • अंडवाहिनी के भाग (Parts of Fallopian Tube): प्रत्येक अंडवाहिनी 10-12 cm लंबी होती है। इसके तीन मुख्य भाग होते हैं:
    • कीपक (Infundibulum): अंडाशय के करीब का कीप के आकार का भाग। इसके किनारों पर उंगली जैसी संरचनाएं होती हैं जिन्हें झल्लरी (Fimbriae) कहते हैं, जो अंडोत्सर्ग (Ovulation) के बाद अंडाणु को पकड़ने में मदद करती हैं।
    • तुंबिका (Ampulla): यह अंडवाहिनी का मध्य और चौड़ा भाग है। (यही वह स्थान है जहाँ निषेचन / Fertilization की प्रक्रिया संपन्न होती है)।
    • संकीर्ण पथ (Isthmus): यह अंतिम संकरा भाग है जो गर्भाशय से जुड़ता है।
  • गर्भाशय (Uterus / Womb): गर्भाशय उल्टे नाशपाती के आकार का होता है। इसकी भित्ति में ऊतकों की तीन परतें होती हैं:
    • परिगर्भाशय (Perimetrium): सबसे बाहरी पतली झिल्लीदार परत।
    • पेशीस्तर (Myometrium): चिकनी पेशियों (Smooth muscles) की मध्य मोटी परत। प्रसव (Delivery) के समय इसमें अत्यंत तीव्र संकुचन होता है।
    • अंतःस्तर (Endometrium): सबसे भीतरी ग्रंथिल (Glandular) परत। मासिक धर्म चक्र (Menstrual cycle) के दौरान इस परत में चक्रीय परिवर्तन होते हैं और भ्रूण का आरोपण (Implantation) भी यहीं होता है।
Diagrammatic sectional view of the female reproductive system showing uterus, fallopian tubes, and ovaries
चित्र: मानव मादा जनन तंत्र (Female Reproductive System) की आंतरिक संरचना

3. युग्मक जनन (Gametogenesis): शुक्राणु जनन और अंडजनन

प्राथमिक लैंगिक अंगों (वृषण और अंडाशय) द्वारा युग्मकों (Sperms और Ovum) के निर्माण की प्रक्रिया को युग्मक जनन (Gametogenesis) कहा जाता है।

A. शुक्राणु जनन (Spermatogenesis)

नर में शुक्राणुओं का निर्माण यौवनारंभ (Puberty) से शुरू होता है। यह प्रक्रिया शुक्रजनक नलिकाओं (Seminiferous tubules) में निम्नलिखित चरणों (Flowchart) में पूर्ण होती है:

  1. समसूत्री विभाजन (Mitosis): द्विगुणित (Diploid - 46 गुणसूत्र) शुक्राणुजन (Spermatogonia) समसूत्री विभाजन द्वारा अपनी संख्या बढ़ाते हैं। इनमें से कुछ कोशिकाएं आकार में बड़ी होकर प्राथमिक शुक्राणुकोशिका (Primary spermatocytes) बनाती हैं।
  2. प्रथम अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis I): प्राथमिक शुक्राणुकोशिका पहला अर्धसूत्री (न्यूनकारी) विभाजन पूरा करके दो समान, अगुणित (Haploid - 23 गुणसूत्र) कोशिकाएं बनाती है, जिन्हें द्वितीयक शुक्राणुकोशिका (Secondary spermatocytes) कहते हैं।
  3. द्वितीयक अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis II): द्वितीयक शुक्राणुकोशिकाएं दूसरा अर्धसूत्री विभाजन करती हैं, जिसके परिणामस्वरूप चार अगुणित प्रशुक्राणु या स्पर्मेटिड (Spermatids) बनते हैं।
  4. शुक्राणु-जनन (Spermiogenesis): स्पर्मेटिड्स का सक्रिय और गतिशील शुक्राणुओं (Spermatozoa) में रूपांतरण 'स्पर्मियोजेनेसिस' कहलाता है।
  5. वीर्यसेचन (Spermiation): रूपांतरण के बाद शुक्राणुओं का सिर सर्टोली कोशिकाओं में धंस जाता है और अंततः वे शुक्रजनक नलिकाओं से मुक्त हो जाते हैं, इस प्रक्रिया को स्पर्मिएशन कहते हैं।

शुक्राणु जनन के गणितीय और हार्मोनल सूत्र (Biochemical Factors)

शुक्राणु जनन को हाइपोथैलेमस से स्रावित GnRH (Gonadotropin Releasing Hormone) द्वारा नियंत्रित किया जाता है। GnRH पीयूष ग्रंथि को उद्दीपित कर दो हार्मोन निकालता है:

  • LH (Luteinising Hormone): लीडिग कोशिकाओं पर कार्य करता है और एंड्रोजन स्रावित कराता है।
  • FSH (Follicle Stimulating Hormone): सर्टोली कोशिकाओं पर कार्य करता है जो स्पर्मियोजेनेसिस में मदद करती हैं।

एक सामान्य मैथुन (Coitus) के दौरान नर लगभग 200 से 300 मिलियन (20-30 करोड़) शुक्राणु स्खलित करता है। सामान्य जनन क्षमता के लिए 60% शुक्राणुओं का आकार/रूप सामान्य होना चाहिए और उनमें से 40% में तीव्र गतिशीलता (Vigorous motility) होनी चाहिए।

$$ \text{Primary Spermatocyte (2n=46)} \xrightarrow{\text{Meiosis I}} \text{2 Secondary Spermatocytes (n=23)} \xrightarrow{\text{Meiosis II}} \text{4 Spermatids (n=23)} $$

B. अंडजनन (Oogenesis)

मादा युग्मक (अंडाणु) के निर्माण की प्रक्रिया को अंडजनन कहते हैं। शुक्राणु जनन के विपरीत, अंडजनन की शुरुआत भ्रूणीय विकास (Embryonic development) के दौरान ही हो जाती है。

  1. भ्रूणीय अवस्था (Fetal Life): भ्रूण के अंडाशय में लाखों अंडजननी (Oogonia) बनती हैं। (जन्म के बाद कोई नई Oogonia नहीं बनती है)
  2. विभाजन का स्थगन (Arrested Phase): Oogonia अर्धसूत्री विभाजन शुरू करती हैं लेकिन प्रोफेज-I (Prophase-I) अवस्था में रुक जाती हैं। इस अवस्था में इन्हें प्राथमिक अंडक (Primary oocytes) कहते हैं।
  3. पुटिकाओं का विकास (Follicular Development): प्रत्येक प्राथमिक अंडक के चारों ओर ग्रैनुलोसा कोशिकाओं की एक परत बन जाती है, जिसे प्राथमिक पुटिका (Primary follicle) कहते हैं। जन्म से लेकर यौवनारंभ (Puberty) तक बड़ी संख्या में ये पुटिकाएं नष्ट हो जाती हैं। यौवनारंभ पर प्रत्येक अंडाशय में केवल 60,000-80,000 प्राथमिक पुटिकाएं ही बचती हैं।
  4. यौवनारंभ (At Puberty): प्राथमिक पुटिका द्वितीयक और फिर तृतीयक पुटिका (Tertiary follicle) में बदलती है। तृतीयक पुटिका की विशेषता एक द्रव से भरी गुहा एंट्रम (Antrum) होती है।
  5. असमान अर्धसूत्री विभाजन (Unequal Meiosis I): तृतीयक पुटिका के भीतर प्राथमिक अंडक अपना पहला अर्धसूत्री विभाजन पूरा करता है। यह एक असमान विभाजन है, जिससे एक बड़ी अगुणित द्वितीयक अंडक (Secondary oocyte) और एक छोटी प्रथम ध्रुवीय पिंड (First polar body) बनती है।
  6. अंडोत्सर्ग (Ovulation): तृतीयक पुटिका परिपक्व होकर ग्राफियन पुटिका (Graafian follicle) बनाती है। द्वितीयक अंडक अपने चारों ओर एक नई झिल्ली जोना पेलुसिडा (Zona pellucida) का निर्माण करती है। ग्राफियन पुटिका के फटने से द्वितीयक अंडक (अंडाणु) अंडाशय से बाहर मुक्त हो जाता है, जिसे अंडोत्सर्ग कहते हैं।
Schematic representation of Spermatogenesis and Oogenesis showing chromosome numbers at each stage
चित्र: युग्मक जनन (Spermatogenesis एवं Oogenesis) का आरेखीय निरूपण

4. परीक्षा केंद्रित महत्वपूर्ण तथ्य और अपवाद (Key Exam Takeaways)

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण जैविक अपवाद और तथ्य (Crucial Exam Takeaways):

1. अंडजनन का समय (Timing of Oogenesis): शुक्राणु जनन यौवनारंभ पर शुरू होता है और जीवन भर चलता रहता है, लेकिन मादाओं में अंडजनन भ्रूणीय अवस्था में ही शुरू हो जाता है और 50 वर्ष की आयु के आसपास (Menopause / रजोनिवृत्ति) रुक जाता है।

2. विभाजन में असमानता (Unequal Division): शुक्राणु जनन में एक प्राथमिक शुक्राणुकोशिका से चार (4) कार्यात्मक शुक्राणु बनते हैं। जबकि अंडजनन में एक प्राथमिक अंडक से केवल एक (1) कार्यात्मक अंडाणु (Ovum) और 2 या 3 निष्क्रय ध्रुवीय पिंड (Polar bodies) बनते हैं। ध्रुवीय पिंडों का निर्माण अंडाणु के कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm) को सुरक्षित रखने के लिए होता है।

3. द्वितीयक अर्धसूत्री विभाजन का पूर्ण होना (Completion of Meiosis II): मादाओं में द्वितीयक अंडक का दूसरा अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis II) तब तक पूरा नहीं होता जब तक कि निषेचन (Fertilization) के दौरान कोई शुक्राणु जोना पेलुसिडा को भेदकर अंडाणु में प्रवेश न कर जाए।