गैसीय अवस्था के अध्ययन में समतापी वक्रों (Isothermal Curves) का एक विशिष्ट स्थान है। किसी स्थिर तापमान पर गैस के दाब (Pressure) और आयतन (Volume) के मध्य खींचा गया ग्राफ समतापी वक्र कहलाता है। थॉमस एंड्रयूज (Thomas Andrews, 1869) ने कार्बन डाइऑक्साइड (\(CO_2\)) गैस के लिए विभिन्न तापमानों पर जो प्रायोगिक समतापी वक्र प्राप्त किए, उन्होंने गैसों के द्रवीकरण (Liquefaction) और क्रान्तिक अवस्था (Critical state) की गहरी समझ प्रदान की।
इस लेख में हम एंड्रयूज के प्रायोगिक वक्रों की वाण्डर वाल्स (van der Waals) समतापी वक्रों से तुलना, अवस्था सांतत्य, क्रान्तिक स्थिरांकों की गणितीय व्युत्पत्ति और संगत अवस्थाओं के नियम का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
1. वास्तविक गैसों के प्रायोगिक एवं वाण्डर वाल्स समतापी वक्र (Experimental vs van der Waals Isotherms)
थॉमस एंड्रयूज ने प्रायोगिक तौर पर यह देखा कि उच्च तापमान पर \(CO_2\) गैस आदर्श गैस (बॉयल के नियम) के समान व्यवहार करती है। परंतु जैसे-जैसे तापमान कम होता है, वक्रों में विचलन आने लगता है। एक विशिष्ट तापमान (क्रान्तिक ताप) के नीचे, वक्र के मध्य में एक क्षैतिज रेखा (Horizontal line) प्राप्त होती है, जो द्रव और वाष्प के सह-अस्तित्व (co-existence) को दर्शाती है।
दूसरी ओर, वाण्डर वाल्स समतापी वक्र वाण्डर वाल्स अवस्था समीकरण के आरेखीय निरूपण हैं। जब हम क्रान्तिक ताप के नीचे वाण्डर वाल्स समीकरण का आरेख बनाते हैं, तो क्षैतिज रेखा के बजाय एक तरंगनुमा (Wave-like) हिस्सा प्राप्त होता है। यह तरंगनुमा हिस्सा (जिसमें मैक्सिमा और मिनिमा होते हैं) सैद्धांतिक है और मितस्थायी अवस्थाओं (Metastable states)—जैसे अतिसंतृप्त वाष्प (Supersaturated vapour) और अतितप्त द्रव (Superheated liquid)—को दर्शाता है जो सामान्य प्रायोगिक परिस्थितियों में आसानी से प्राप्त नहीं होते।
2. अवस्था सांतत्य (Continuity of State)
अवस्था सांतत्य का सिद्धांत यह स्पष्ट करता है कि द्रव और गैसीय अवस्थाओं के बीच कोई तीव्र या तीक्ष्ण (sharp) सीमा नहीं होती है। थॉमसन (Thomson) ने यह सुझाया कि गैस को द्रव में और द्रव को गैस में एक ऐसे मार्ग से परिवर्तित किया जा सकता है जिसमें दोनों अवस्थाएं एक साथ कभी उपस्थित न हों और यह प्रक्रिया सतत (continuous) हो।
यदि हम किसी गैस को उसके क्रान्तिक आयतन (Critical Volume) पर रखते हुए उसके क्रान्तिक ताप (Critical Temperature) से ऊपर गर्म करें, तो वह बिना किसी मेनिस्कस (Meniscus) या दृश्य परिवर्तन के गैसीय अवस्था में आ जाती है। इस प्रकार, द्रव और गैस केवल एक ही पदार्थ के दो भिन्न रूप हैं।
3. क्रान्तिक अवस्था (Critical State) और क्रान्तिक स्थिरांक (Critical Constants)
गैसों का द्रवीकरण केवल दाब बढ़ाकर नहीं किया जा सकता, जब तक कि उसका तापमान एक निश्चित सीमा से नीचे न हो।
- क्रान्तिक ताप (\(T_c\)): वह अधिकतम तापमान जिसके ऊपर किसी गैस को केवल दाब लगाकर द्रवीकृत नहीं किया जा सकता, चाहे दाब कितना भी अधिक क्यों न हो।
- क्रान्तिक दाब (\(P_c\)): क्रान्तिक ताप पर किसी गैस को द्रवीकृत करने के लिए आवश्यक न्यूनतम दाब क्रान्तिक दाब कहलाता है।
- क्रान्तिक आयतन (\(V_c\)): क्रान्तिक ताप और क्रान्तिक दाब पर 1 मोल गैस द्वारा घेरा गया आयतन क्रान्तिक आयतन कहलाता है।
4. क्रान्तिक स्थिरांकों (\(P_c, V_c, T_c\)) एवं वाण्डर वाल्स स्थिरांकों (\(a, b\)) के बीच संबंध
हम 1 मोल गैस के लिए वाण्डर वाल्स समीकरण का उपयोग करके क्रान्तिक स्थिरांकों की व्युत्पत्ति करेंगे:
$$ \left( P + \frac{a}{V^2} \right) (V - b) = RT $$समीकरण को सरल बनाने के लिए इसे \(V^2\) से गुणा करें और पुनर्व्यवस्थित करें:
$$ P V^3 - P b V^2 + a V - ab = R T V^2 $$पूरी समीकरण को \(P\) से भाग देने पर, यह आयतन (\(V\)) के पदों में एक त्रिघात (Cubic) समीकरण बन जाता है:
$$ V^3 - \left( b + \frac{RT}{P} \right) V^2 + \left( \frac{a}{P} \right) V - \frac{ab}{P} = 0 \quad \text{--- (समीकरण 1)} $$क्रान्तिक बिंदु पर, गैस की सभी तीन आयतन जड़ें (roots) समान हो जाती हैं और क्रान्तिक आयतन (\(V_c\)) के बराबर होती हैं।
$$ V = V_c \implies V - V_c = 0 $$दोनों पक्षों का घन (cube) करने पर:
$$ (V - V_c)^3 = 0 $$ $$ V^3 - 3 V_c V^2 + 3 V_c^2 V - V_c^3 = 0 \quad \text{--- (समीकरण 2)} $$अब समीकरण 1 (क्रान्तिक अवस्था में \(T=T_c, P=P_c\)) और समीकरण 2 के गुणांकों (Coefficients) की तुलना करने पर:
- \( 3 V_c = b + \frac{RT_c}{P_c} \quad \text{--- (i)} \)
- \( 3 V_c^2 = \frac{a}{P_c} \quad \text{--- (ii)} \)
- \( V_c^3 = \frac{ab}{P_c} \quad \text{--- (iii)} \)
\(V_c\) की गणना:
समीकरण (iii) को समीकरण (ii) से भाग देने पर:
\(P_c\) की गणना:
\(V_c\) का मान समीकरण (ii) में रखने पर:
\(T_c\) की गणना:
\(V_c\) और \(P_c\) का मान समीकरण (i) में रखने पर:
5. संगत अवस्थाओं का नियम (Law of Corresponding States)
वैज्ञानिक वाण्डर वाल्स ने सिद्ध किया कि यदि गैसों के ताप, दाब और आयतन को उनके क्रान्तिक स्थिरांकों के भिन्नों (fractions) के रूप में व्यक्त किया जाए, तो सभी गैसों के लिए एक सामान्य समीकरण प्राप्त होता है।
इन्हें समानित अवस्थाएं (Reduced States) कहा जाता है:
- समानित दाब (Reduced Pressure), \( \pi = \frac{P}{P_c} \implies P = \pi P_c \)
- समानित आयतन (Reduced Volume), \( \phi = \frac{V}{V_c} \implies V = \phi V_c \)
- समानित ताप (Reduced Temperature), \( \theta = \frac{T}{T_c} \implies T = \theta T_c \)
इन मानों को वाण्डर वाल्स समीकरण \( (P + \frac{a}{V^2})(V - b) = RT \) में रखने पर, और \(P_c, V_c, T_c\) के सूत्रों (\(\frac{a}{27b^2}, 3b, \frac{8a}{27Rb}\)) का उपयोग करने पर हमें एक नया समीकरण प्राप्त होता है:
$$ \left( \pi + \frac{3}{\phi^2} \right) (3\phi - 1) = 8\theta $$इस समीकरण को समानित अवस्था समीकरण (Reduced Equation of State) कहा जाता है। इसका सबसे बड़ा महत्व यह है कि इसमें वाण्डर वाल्स स्थिरांक \(a\) और \(b\) अनुपस्थित हैं, जिसका अर्थ है कि यह समीकरण सभी वास्तविक गैसों पर समान रूप से लागू होता है।
नियम की परिभाषा: "यदि किन्हीं दो गैसों के समानित ताप (\(\theta\)) और समानित दाब (\(\pi\)) एक समान हों, तो उनका समानित आयतन (\(\phi\)) भी अनिवार्य रूप से समान होगा। इस स्थिति में दोनों गैसें 'संगत अवस्थाओं' में मानी जाती हैं।"
6. परीक्षा स्तर के 3 कठिन वैचारिक प्रश्न (Conceptual Questions)
प्रश्न 1: वाण्डर वाल्स समतापी वक्रों में क्रान्तिक ताप से नीचे एक 'तरंगनुमा' (wave-like) विचलन दिखाई देता है, जबकि एंड्रयूज के प्रायोगिक समतापी वक्रों में इसी स्थान पर एक सीधी क्षैतिज रेखा (horizontal line) प्राप्त होती है। इस विसंगति (Discrepancy) का भौतिक कारण क्या है?
विस्तृत हल:
वाण्डर वाल्स समीकरण एक निरंतर गणितीय फलन (continuous mathematical function) है जो एक त्रिघात समीकरण (\(V\) में cubic) उत्पन्न करता है। क्रान्तिक ताप के नीचे यह समीकरण आयतन के 3 मान देता है, जिससे एक 'S' या तरंग के आकार का वक्र बनता है। भौतिक रूप से, वक्र का ऊपरी हिस्सा 'अतितप्त द्रव' (Superheated liquid) को और निचला हिस्सा 'अतिसंतृप्त वाष्प' (Supersaturated vapour) को दर्शाता है। ये अवस्थाएं मितस्थायी (Metastable) होती हैं; एक बहुत ही साफ और स्थिर वातावरण में इन्हें प्रयोगशाला में थोड़े समय के लिए प्राप्त किया जा सकता है। परंतु एंड्रयूज के सामान्य प्रयोगों में साम्यावस्था (equilibrium) जल्दी स्थापित हो जाती है, जिससे गैस सीधे द्रव में बदलती है और हमें वाष्पदाब की स्थिरता दिखाने वाली एक क्षैतिज रेखा (द्रव-वाष्प साम्य) प्राप्त होती है।
प्रश्न 2: क्रान्तिक संपीड्यता गुणांक (Critical Compressibility Factor, \(Z_c\)) की गणना वाण्डर वाल्स स्थिरांकों का उपयोग करके करें। सिद्ध करें कि यह मान गैस की प्रकृति से पूरी तरह स्वतंत्र होता है।
विस्तृत हल:
संपीड्यता गुणांक (\(Z\)) का सामान्य सूत्र \( Z = \frac{PV}{RT} \) है।
क्रान्तिक बिंदु पर, यह क्रान्तिक संपीड्यता गुणांक बन जाता है: \( Z_c = \frac{P_c V_c}{R T_c} \)
अब, वाण्डर वाल्स समीकरण से प्राप्त क्रान्तिक स्थिरांकों के मानों को इसमें रखें:
$$ V_c = 3b, \quad P_c = \frac{a}{27b^2}, \quad T_c = \frac{8a}{27Rb} $$ $$ Z_c = \frac{\left( \frac{a}{27b^2} \right) \times (3b)}{R \times \left( \frac{8a}{27Rb} \right)} $$ $$ Z_c = \frac{\frac{3ab}{27b^2}}{\frac{8a}{27b}} = \frac{\frac{3a}{27b}}{\frac{8a}{27b}} $$हर (denominator) के \(\frac{a}{27b}\) को अंश (numerator) से काटने पर:
$$ Z_c = \frac{3}{8} = 0.375 $$निष्कर्ष: चूँकि अंतिम परिणाम में गैस विशिष्ट स्थिरांक \(a\) और \(b\) पूरी तरह से कट (cancel out) गए हैं, अतः \(Z_c = 0.375\) एक सार्वत्रिक मान (Universal constant) है। यह सिद्ध करता है कि कोई भी गैस जो वाण्डर वाल्स समीकरण का पालन करती है, उसका क्रान्तिक संपीड्यता गुणांक 0.375 ही होगा। (प्रायोगिक रूप से वास्तविक गैसों का \(Z_c\) 0.28 के आसपास होता है, जो वाण्डर वाल्स समीकरण की एक छोटी सी सीमा है)।
प्रश्न 3: संगत अवस्थाओं के नियम (Law of Corresponding States) का उपयोग करते हुए यह स्पष्ट करें कि क्यों अलग-अलग वाण्डर वाल्स स्थिरांक (\(a\) व \(b\)) रखने वाली दो भिन्न गैसें \(X\) और \(Y\) एक निश्चित परिस्थिति में बिल्कुल एक समान संपीड्यता (Compressibility) प्रदर्शित कर सकती हैं?
विस्तृत हल:
हम जानते हैं कि वाण्डर वाल्स समीकरण में \(a\) (आकर्षण बल) और \(b\) (अणुओं का आयतन) अलग-अलग गैसों के लिए अलग-अलग होते हैं। परंतु जब हम गैसों के गुणों को उनके क्रान्तिक स्थिरांकों (\(P_c, V_c, T_c\)) के संदर्भ में मापते हैं, तो हम समानित अवस्था समीकरण का उपयोग करते हैं:
$$ \left( \pi + \frac{3}{\phi^2} \right) (3\phi - 1) = 8\theta $$यह समीकरण पूरी तरह से गैस-स्वतंत्र है। यदि गैस \(X\) और गैस \(Y\) को ऐसे तापमान और दाब पर रखा जाए कि दोनों के लिए समानित ताप (\(\theta\)) और समानित दाब (\(\pi\)) के मान बराबर हों, तो गणितीय रूप से उनके समानित आयतन (\(\phi\)) का मान भी बिल्कुल एक समान आएगा।
चूँकि समानित चरों के लिए \(Z = \frac{PV}{RT} = \frac{(\pi P_c)(\phi V_c)}{R (\theta T_c)} = \frac{\pi \phi}{\theta} \left(\frac{P_c V_c}{R T_c}\right)\)।
जैसा कि हमने देखा, \( \frac{P_c V_c}{R T_c} = \frac{3}{8} \) (सभी वण्डर वाल्स गैसों के लिए)।
$$ Z = \frac{3}{8} \frac{\pi \phi}{\theta} $$निष्कर्ष: यदि \(\pi\) और \(\theta\) दोनों गैसों के लिए समान हैं (संगत अवस्था), तो \(\phi\) भी समान होगा। इसके परिणामस्वरूप उनका संपीड्यता गुणांक (\(Z\)) भी बिल्कुल समान हो जाएगा। इसीलिए, भले ही गैसों के \(a\) और \(b\) अलग हों, संगत अवस्था में वे एक समान संपीड्यता और समान व्यवहार प्रदर्शित करती हैं।