Loading...

Kingdom Fungi | कवक जगत

July 18, 2026 |

जीव विज्ञान (Biology) में आर. एच. व्हिटेकर (R.H. Whittaker) द्वारा प्रस्तुत पाँच जगत वर्गीकरण (Five Kingdom Classification) में कवक (Fungi) को एक स्वतंत्र और अत्यंत महत्वपूर्ण जगत का दर्जा दिया गया है। कवक पर्णहरित रहित (Achlorophyllous), विषमपोषी (Heterotrophic), बीजाणु-उत्पादक (Spore-producing) और यूकेरियोटिक (Eukaryotic) जीवों का एक विशाल समूह है। ये जीव संरचना और आवास (Structures and habitat) में अत्यधिक विविधता (Great diversity) प्रदर्शित करते हैं। ये सर्वव्यापी (Cosmopolitan) होते हैं और वायु, जल, मिट्टी तथा पौधों एवं जंतुओं पर परजीवी (Parasites) के रूप में पाए जाते हैं। पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में ये मुख्य रूप से अपघटक (Decomposers) की भूमिका निभाते हैं और खनिज चक्र (Mineral cycling) में सहायता करते हैं।

जीवों के वर्गीकरण में कवक जगत के विभेदक लक्षण (Differential Characteristics in Classification)

कवक अन्य जगतों (मोनेरा, प्रोटिस्टा, प्लांटी और एनिमेलिया) से कई विशिष्ट शारीरिक और क्रियात्मक गुणों में भिन्न हैं। नीचे दी गई तालिका में कवक के अद्वितीय लक्षणों की व्याख्या की गई है:

लक्षण (Characteristics) कवक जगत (Kingdom Fungi) में स्थिति
कोशिका प्रकार (Cell Type) यूकेरियोटिक (Eukaryotic) - पूर्णतः विकसित सत्य केंद्रक (True nucleus) उपस्थित।
कोशिका भित्ति (Cell Wall) पादपों की तरह सेल्युलोज की नहीं, बल्कि एक जटिल पॉलीसैकेराइड काइटिन (Chitin) और पॉलीसेकेराइड्स की बनी होती है।
शारीरिक संगठन (Body Organisation) बहुकोशिकीय (Multicellular) और ढीले ऊतक (Loose tissue) स्तर का (अपवाद: यीस्ट एककोशिकीय है)।
पोषण की विधि (Mode of Nutrition) विषमपोषी (Heterotrophic) - मुख्य रूप से मृतोपजीवी (Saprophytic), परजीवी (Parasitic) या सहजीवी (Symbiotic)।
संचित भोजन (Reserve Food) भोजन ग्लाइकोजन (Glycogen) और तेल की बूंदों (Oil drops) के रूप में संचित होता है।
Detailed diagram of Fungal Mycelium and Cell Structure
चित्र: कवक जाल (Mycelium) और काइटिन युक्त कोशिका की आंतरिक संरचना

1. कवक की शारीरिकी एवं संरचना (Anatomy & Structure of Fungi)

कवकों का शरीर आमतौर पर धागे जैसी लंबी और पतली संरचनाओं से बना होता है, जिन्हें कवक तंतु (Hyphae) कहा जाता है। कवक तंतुओं के नेटवर्क या जाल को कवक जाल (Mycelium) कहते हैं। कवक जाल संरचनात्मक रूप से दो प्रकार का हो सकता है:

  • संकोशिकी कवक तंतु (Coenocytic Hyphae): ये निरंतर नलिकाकार संरचनाएं होती हैं जिनमें बहुकेंद्रकीय कोशिकाद्रव्य (Multinucleated cytoplasm) भरा होता है। इनमें पट (Septa/Cross-walls) अनुपस्थित होते हैं।
  • पटयुक्त कवक तंतु (Septate Hyphae): इन कवक तंतुओं में कोशिकाओं को अलग करने वाले अनुप्रस्थ पट (Septa) पाए जाते हैं। इनमें छोटे छिद्र होते हैं जिनसे कोशिकाद्रव्य एक कोशिका से दूसरी कोशिका में जा सकता है।

2. कवक जगत का वर्गीकरण (Classification of Kingdom Fungi)

कवक जाल की आकारिकी (Morphology of mycelium), बीजाणु निर्माण की विधि (Mode of spore formation) और फलन काय (Fruiting bodies) के आधार पर कवक जगत को चार मुख्य वर्गों (Classes) में विभाजित किया गया है:

A. फाइकोमाइसिटीज (Phycomycetes)

  • आवास: ये जलीय आवासों, नम और सीलन वाले स्थानों पर सड़ी-गली लकड़ियों पर या पौधों पर अविकल्पी परजीवी (Obligate parasites) के रूप में पाए जाते हैं।
  • कवक जाल: इनका कवक जाल पटहीन (Aseptate) और संकोशिकी (Coenocytic) होता है।
  • जनन: अलैंगिक जनन चल बीजाणुओं (Zoospores - Motile) या अचल बीजाणुओं (Aplanospores - Non-motile) द्वारा होता है। लैंगिक जनन में दो युग्मकों के संलयन से जाइगोस्पोर (Zygospore) बनता है।
  • उदाहरण: Mucor (म्यूकर), Rhizopus (राइजोपस - Bread mould), Albugo (एल्ब्यूगो - सरसों पर परजीवी)।

B. एस्कोमाइसिटीज (Ascomycetes - थैली कवक / Sac Fungi)

  • संरचना: ये मुख्य रूप से बहुकोशिकीय होते हैं (जैसे: Penicillium), लेकिन कुछ एककोशिकीय (जैसे: यीस्ट/Saccharomyces) भी होते हैं। इनका कवक जाल शाखित (Branched) और पटयुक्त (Septate) होता है।
  • पोषण: ये मृतोपजीवी, अपघटक, परजीवी या शमलरागी (Coprophilous - गोबर पर उगने वाले) होते हैं।
  • अलैंगिक जनन: कोनिडियोफोर (Conidiophores) पर बहिर्जात रूप से (Exogenously) कोनिडिया (Conidia) बीजाणु बनते हैं।
  • लैंगिक जनन: एस्कस (Ascus) नामक थैलीनुमा संरचना में अंतर्जात रूप से (Endogenously) एस्कोस्पोर (Ascospores) बनते हैं। ये एस्कस विभिन्न प्रकार के फलन काय में व्यवस्थित होते हैं जिन्हें एस्कोकार्प (Ascocarps) कहते हैं।
  • उदाहरण: Aspergillus (एस्परजिलस), Neurospora (न्यूरोस्पोरा - जैव रासायनिक आनुवंशिकी में प्रयुक्त), Claviceps (क्लैविसेप्स)। मोरेल और ट्रफल्स खाने योग्य होते हैं।

C. बेसिडियोमाइसिटीज (Basidiomycetes - Club Fungi)

  • रूप: मशरूम (Mushrooms), ब्रैकेट फंजाई (Bracket fungi) और पफबॉल (Puffballs) इस वर्ग में आते हैं।
  • कवक जाल: शाखित और पटयुक्त होता है।
  • जनन: इनमें अलैंगिक बीजाणु (Asexual spores) प्रायः नहीं पाए जाते हैं, लेकिन खंडन (Fragmentation) द्वारा कायिक जनन (Vegetative reproduction) बहुत सामान्य है। इनमें लैंगिक अंग अनुपस्थित होते हैं।
  • लैंगिक प्रक्रिया: दो अलग-अलग स्ट्रेन के कायिक कोशिकाओं के संलयन से प्लाज्मोगैमी होती है, जिससे द्विकेंद्रकी (Dikaryotic) संरचना बनती है। यह बेसिडियम (Basidium) को जन्म देती है। बेसिडियम में कैरियोगैमी और अर्धसूत्री विभाजन होता है, जिससे 4 बेसिडियोस्पोर (Basidiospores) बहिर्जात रूप से बनते हैं। फलन काय को बेसिडियोकार्प (Basidiocarp) कहते हैं।
  • उदाहरण: Agaricus (एगैरिकस - Mushroom), Ustilago (अस्टिलैगो - Smut / कंड), Puccinia (पक्सीनिया - Rust / किट्ट फफूंद)।

D. ड्यूटेरोमाइसिटीज (Deuteromycetes - अपूर्ण कवक / Fungi Imperfecti)

  • इन्हें अपूर्ण कवक कहा जाता है क्योंकि इनकी केवल अलैंगिक (Asexual) या कायिक (Vegetative) प्रावस्था ही ज्ञात है। लैंगिक प्रावस्था की खोज होने पर इन्हें एस्कोमाइसिटीज या बेसिडियोमाइसिटीज में स्थानांतरित कर दिया जाता है।
  • कवक जाल: शाखित और पटयुक्त होता है।
  • पोषण: कुछ परजीवी या मृतोपजीवी होते हैं, लेकिन अधिकांश कूड़े-करकट के अपघटक (Decomposers of litter) होते हैं और खनिज चक्र (Mineral cycling) में मदद करते हैं।
  • जनन: ये केवल अलैंगिक बीजाणुओं, जिन्हें कोनिडिया (Conidia) कहते हैं, के द्वारा जनन करते हैं।
  • उदाहरण: Alternaria (अल्टरनेरिया), Colletotrichum (कोलेटोट्राइकम), Trichoderma (ट्राइकोडर्मा)।
Detailed diagram of Conidia in Ascomycetes and Basidium in Basidiomycetes
चित्र: कोनिडिया (अलैंगिक) और बेसिडियम (लैंगिक) बीजाणु निर्माण प्रक्रिया

3. कवक में लैंगिक जनन की कार्यप्रणाली (Mechanism of Sexual Reproduction in Fungi)

कवकों में लैंगिक जनन एक अत्यंत जटिल प्रक्रिया है। यह मुख्य रूप से तीन क्रमिक चरणों (Sequential steps) में पूर्ण होती है:

  1. प्लाज्मोगैमी (Plasmogamy): दो चल (Motile) या अचल (Non-motile) युग्मकों (Gametes) के कोशिकाद्रव्य (Protoplasm) का संलयन (Fusion)। इस अवस्था में कोशिका में दो स्वतंत्र केंद्रक होते हैं।
  2. कैरियोगैमी (Karyogamy): दोनों केंद्रकों (Nuclei) का संलयन जिससे एक द्विगुणित युग्मनज (Diploid Zygote - \( 2n \)) बनता है। (नोट: एस्कोमाइसिटीज और बेसिडियोमाइसिटीज में प्लाज्मोगैमी के तुरंत बाद कैरियोगैमी नहीं होती। इनमें एक मध्यवर्ती द्विकेंद्रकी अवस्था / Dikaryotic stage, \( n + n \), बनती है जहाँ एक कोशिका में दो केंद्रक होते हैं। इस अवस्था को द्विकेंद्रक / Dikaryon कहते हैं।)
  3. अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis): युग्मनज (Zygote) में मियोसिस होता है जिसके परिणामस्वरूप अगुणित बीजाणु (Haploid spores - \( n \)) बनते हैं जो नए कवक जाल को जन्म देते हैं।

4. कवकों का आर्थिक महत्व एवं रासायनिक प्रक्रिया (Economic Importance & Biochemical Equations)

किण्वन (Fermentation): Saccharomyces cerevisiae (बेकर्स यीस्ट / ब्रूअर्स यीस्ट) का उपयोग ब्रेड और मादक पेय (Alcoholic beverages) बनाने में किया जाता है। यीस्ट अवायवीय श्वसन (Anaerobic respiration) द्वारा शर्करा को एथिल अल्कोहल में बदल देता है। इस प्रक्रिया का रासायनिक समीकरण (MathJax) इस प्रकार है:

$$ C_6H_{12}O_6 \xrightarrow{\text{Zymase enzyme (Yeast)}} 2C_2H_5OH + 2CO_2 + 2 ATP (\text{Energy}) $$

प्रतिजैविक उत्पादन (Antibiotic Production): अलेक्जेंडर फ्लेमिंग (Alexander Fleming) द्वारा Penicillium notatum नामक कवक से 'पेनिसिलिन' (Penicillin) नामक पहली एंटीबायोटिक खोजी गई थी। इसी प्रकार प्रतिरक्षा-निरोधक दवा साइक्लोस्पोरिन ए (Cyclosporin A) Trichoderma polysporum नामक कवक से प्राप्त की जाती है।

रक्त कोलेस्ट्रॉल कम करने वाले कारक: स्टैटिन (Statins) का उत्पादन Monascus purpureus नामक यीस्ट (कवक) द्वारा किया जाता है।


5. परीक्षा केंद्रित महत्वपूर्ण तथ्य, सहजीवन और अपवाद (Key Exam Takeaways)

सहजीवी संबंध (Symbiotic Relationships):
1. शैवाक (Lichens): यह शैवाल (Phycobiont - जो भोजन बनाता है) और कवक (Mycobiont - जो आश्रय और खनिज/जल अवशोषित करता है) का एक घनिष्ठ सहजीवी संबंध है। लाइकेन प्रदूषण के बहुत अच्छे संकेतक (Good pollution indicators) हैं (विशेषकर \( SO_2 \) प्रदूषण के प्रति)।
2. कवक मूल (Mycorrhiza): यह उच्च पादपों की जड़ों (जैसे: पाइनस / Pinus) और कवक के बीच का सहजीवी संबंध है। कवक पौधे को मिट्टी से फास्फोरस (Phosphorus) सोखने में मदद करता है और पौधा कवक को कार्बोहाइड्रेट देता है।
पादप एवं मानव रोग (Plant and Human Diseases caused by Fungi): प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए इन रोगजनकों (Pathogens) के नाम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
  • गेहूं का किट्ट रोग (Wheat Rust): Puccinia graminis (बेसिडियोमाइसिटीज) द्वारा।
  • गेहूं का अनावृत कंड रोग (Loose Smut of Wheat): Ustilago nuda (बेसिडियोमाइसिटीज) द्वारा।
  • सरसों का श्वेत किट्ट (White Rust of Mustard): Albugo candida (फाइकोमाइसिटीज) द्वारा।
  • मानवों में दाद (Ringworm): Microsporum, Trichophyton और Epidermophyton (ड्यूटेरोमाइसिटीज) द्वारा।
अपवाद (Exceptions): संपूर्ण कवक जगत बहुकोशिकीय और धागेनुमा तंतुओं (Filamentous) से बना है, यीस्ट (Yeast / Saccharomyces) इसका एकमात्र अपवाद है जो एककोशिकीय (Unicellular) होता है और कवक जाल (Mycelium) नहीं बनाता है।