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Laws of Motion, Work, Energy & Power | गति के नियम, कार्य, ऊर्जा एंव शक्ति

July 16, 2026 |

भौतिकी (Physics) में चिरसम्मत यांत्रिकी (Classical Mechanics) का आधार मुख्य रूप से पिंडों की गति और उन पर लगने वाले बलों के अध्ययन पर टिका है। किसी वस्तु की गति क्यों और कैसे बदलती है, इसका सटीक विश्लेषण न्यूटन के गति के नियमों (Newton's Laws of Motion), कार्य (Work), और ऊर्जा (Energy) के सिद्धांतों के माध्यम से किया जाता है। इस लेख में हम बल, संवेग संरक्षण, अभिकेन्द्रीय बल, कार्य-ऊर्जा प्रमेय और परिवर्ती बल द्वारा किए गए कार्य का विस्तृत और गणितीय अध्ययन करेंगे।

1. बल एवं न्यूटन के गति के नियम (Force and Newton's Laws of Motion)

सर आइजैक न्यूटन (Isaac Newton) ने गैलीलियो के जड़त्व के विचारों को आगे बढ़ाते हुए गति के तीन मूलभूत नियम दिए:

  • प्रथम नियम (जड़त्व का नियम - Law of Inertia): यदि किसी पिंड पर लगने वाला कुल बाह्य बल (Net external force) शून्य है, तो वह वस्तु अपनी विरामावस्था या एकसमान रेखीय गति (Uniform linear motion) की अवस्था में ही रहेगी। अर्थात त्वरण (Acceleration) तभी उत्पन्न हो सकता है जब कोई बाह्य बल कार्य करे।
  • द्वितीय नियम (Second Law of Motion): किसी पिंड के संवेग (Momentum) में परिवर्तन की दर उस पर लगाए गए बाह्य बल के अनुक्रमानुपाती होती है, और यह परिवर्तन बल की दिशा में ही होता है। गणितीय रूप में: $$ \vec{F} = \frac{d\vec{p}}{dt} $$ चूँकि संवेग \( \vec{p} = m\vec{v} \) है, एक नियत द्रव्यमान (Fixed mass) \(m\) वाले पिंड के लिए यह नियम \( \vec{F} = m\vec{a} \) का रूप ले लेता है।
  • तृतीय नियम (Third Law of Motion): प्रत्येक क्रिया (Action) की सदैव एक समान और विपरीत प्रतिक्रिया (Reaction) होती है। अर्थात, यदि वस्तु A वस्तु B पर बल \( \vec{F}_{AB} \) लगाती है, तो वस्तु B भी वस्तु A पर उतना ही विपरीत बल \( \vec{F}_{BA} \) लगाएगी: $$ \vec{F}_{AB} = - \vec{F}_{BA} $$ यह क्रिया और प्रतिक्रिया बल सदैव अलग-अलग पिंडों पर कार्य करते हैं।

2. संवेग संरक्षण का सिद्धांत (Principle of Conservation of Momentum)

न्यूटन के द्वितीय और तृतीय नियम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण परिणाम 'संवेग संरक्षण का नियम' (Law of Conservation of Momentum) है। एक विलगित निकाय (Isolated system) में, जहाँ कुल बाह्य बल शून्य होता है, निकाय के कणों के बीच लगने वाले आंतरिक बल (Internal forces) एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं।

चूँकि \( \vec{F}_{ext} = \frac{d\vec{P}}{dt} = 0 \), अतः:

$$ \vec{P} = \text{Constant (नियतांक)} $$
इस प्रकार, किसी विलगित निकाय का कुल रेखीय संवेग (Total linear momentum) सदैव संरक्षित (Conserved) रहता है।

3. वृत्तीय गति में अभिकेन्द्रीय बल की व्युत्पत्ति (Derivation of Centripetal Force in Circular Motion)

जब कोई पिंड \(R\) त्रिज्या (Radius) के वृत्ताकार पथ पर एकसमान चाल (Uniform speed) \(v\) से गति करता है, तो उसके वेग की दिशा लगातार बदलती रहती है, जिससे एक त्वरण उत्पन्न होता है। इस त्वरण की दिशा सदैव वृत्त के केंद्र की ओर होती है, जिसे अभिकेन्द्रीय त्वरण (Centripetal Acceleration, \(a_c\)) कहते हैं।

कल्पना करें कि समय अंतराल \( \Delta t \) में पिंड का स्थिति सदिश (Position vector) \( \Delta \theta \) कोण से घूमता है। समरूप त्रिभुजों (Similar triangles) की ज्यामिति से, वेग में परिवर्तन \( \Delta v \) और विस्थापन \( \Delta r \) का अनुपात इस प्रकार दिया जाता है:

$$ \frac{\Delta v}{v} = \frac{\Delta r}{R} \implies \Delta v = v \frac{\Delta r}{R} $$

दोनों पक्षों में \( \Delta t \) से भाग देने और सीमा \( \Delta t \to 0 \) लेने पर:

$$ \lim_{\Delta t \to 0} \frac{\Delta v}{\Delta t} = \frac{v}{R} \lim_{\Delta t \to 0} \frac{\Delta r}{\Delta t} $$ $$ a_c = \frac{v}{R} \times v = \frac{v^2}{R} $$

न्यूटन के द्वितीय नियम से, अभिकेन्द्रीय बल (Centripetal Force, \(F_c\)) का मान होगा:

$$ F_c = ma_c = \frac{mv^2}{R} $$

4. कार्य (Work): नियत एवं परिवर्ती बल द्वारा (By Constant and Variable Force)

भौतिकी में कार्य (Work) तब संपन्न माना जाता है जब बल के प्रभाव में कोई वस्तु विस्थापित होती है। यदि एक नियत बल \( \vec{F} \) के कारण वस्तु में विस्थापन \( \vec{d} \) होता है, तो किया गया कार्य बल और विस्थापन के अदिश गुणनफल (Dot product) के बराबर होता है:

$$ W = \vec{F} \cdot \vec{d} = F d \cos\theta $$

परिवर्ती बल (Variable Force) द्वारा किया गया कार्य (समाकलन विधि - Integration Method): अक्सर बल विस्थापन के साथ बदलता है (जैसे स्प्रिंग बल)। यदि बल स्थिति \(x\) का फलन (Function) \(F(x)\) है, तो छोटे विस्थापन \(dx\) के लिए किया गया कार्य \(dW = F(x) dx\) होगा। प्रारंभिक स्थिति \(x_i\) से अंतिम स्थिति \(x_f\) तक किया गया कुल कार्य समाकलन (Integration) द्वारा ज्ञात किया जाता है:

$$ W = \int_{x_i}^{x_f} F(x) dx $$

5. गतिज और स्थितिज ऊर्जा (Kinetic and Potential Energy)

  • गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy, \(K\)): किसी वस्तु की गति के कारण उसमें निहित ऊर्जा। \(m\) द्रव्यमान और \(v\) वेग वाली वस्तु की गतिज ऊर्जा \( K = \frac{1}{2} m v^2 \) होती है।
  • स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy, \(V\)): किसी वस्तु की स्थिति (Position) या विन्यास (Configuration) के कारण संचित ऊर्जा (Stored energy)। इसे केवल संरक्षी बलों (Conservative forces) के लिए परिभाषित किया जा सकता है। यदि संरक्षी बल \(F(x)\) के विरुद्ध कार्य किया जाता है, तो स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन होता है: $$ \Delta V = - \int F(x) dx $$ उदाहरण के लिए, एक स्प्रिंग (जिसका स्प्रिंग नियतांक \(k\) है) को \(x\) दूरी तक खींचने पर संचित प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा \( V(x) = \frac{1}{2} k x^2 \) होती है।

6. कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Work-Energy Theorem)

कार्य-ऊर्जा प्रमेय यह स्थापित करती है कि किसी पिंड पर कार्यरत कुल बल (Net force) द्वारा किया गया कार्य, उस पिंड की गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है। यह नियत और परिवर्ती दोनों बलों के लिए सत्य है।

$$ W_{net} = \Delta K = K_f - K_i $$

परिवर्ती बल के लिए इसकी व्युत्पत्ति (Derivation) समाकलन से की जाती है:

$$ dK = \frac{d}{dt} \left( \frac{1}{2} m v^2 \right) dt = m v \frac{dv}{dt} dt = m a (v dt) = F dx $$ $$ \int_{K_i}^{K_f} dK = \int_{x_i}^{x_f} F(x) dx \implies K_f - K_i = W $$

महत्वपूर्ण आंकिक प्रश्न (Solved Numericals)

यहाँ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के स्तर के 3 जटिल आंकिक प्रश्न (Numericals) उनके विस्तृत हल के साथ दिए गए हैं:

प्रश्न 1: परिवर्ती बल द्वारा किया गया कार्य और कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Variable Force & Work-Energy Theorem)

1 kg द्रव्यमान का एक गुटका एक क्षैतिज सतह पर 2 m/s की प्रारंभिक चाल (\(v_i\)) से गति कर रहा है। यह \(x = 0.10\) m से \(x = 2.01\) m तक एक खुरदरे पैच से गुजरता है। इस पैच में गुटके पर एक मंदन बल (Retarding force) \( F_r = -\frac{k}{x} \) लगता है, जहाँ \(k = 0.5\) J है। पैच को पार करते समय गुटके की अंतिम गतिज ऊर्जा (\(K_f\)) और अंतिम चाल (\(v_f\)) ज्ञात करें!

हल (Solution):

कार्य-ऊर्जा प्रमेय \( W = \Delta K = K_f - K_i \) का उपयोग करने पर:

  1. प्रारंभिक गतिज ऊर्जा \( K_i = \frac{1}{2} m v_i^2 = \frac{1}{2} \times 1 \times (2)^2 = 2 \text{ J} \).
  2. परिवर्ती बल द्वारा किया गया कार्य \( W \): $$ W = \int_{x_i}^{x_f} F_r dx = \int_{0.10}^{2.01} \left( -\frac{k}{x} \right) dx = -k [\ln x]_{0.10}^{2.01} $$ $$ W = -0.5 \times (\ln 2.01 - \ln 0.10) = -0.5 \times \ln\left(\frac{2.01}{0.10}\right) = -0.5 \times \ln(20.1) $$
  3. \(\ln(20.1) \approx 3\), अतः किया गया कार्य \( W = -0.5 \times 3 = -1.5 \text{ J} \)।
  4. अंतिम गतिज ऊर्जा \( K_f = K_i + W = 2 \text{ J} - 1.5 \text{ J} = 0.5 \text{ J} \)।
  5. अंतिम चाल \( v_f \): $$ \frac{1}{2} m v_f^2 = 0.5 \implies \frac{1}{2} \times 1 \times v_f^2 = 0.5 \implies v_f^2 = 1 \implies v_f = 1 \text{ m/s} $$
अंतिम गतिज ऊर्जा \( 0.5 \text{ J} \) और अंतिम चाल \( 1 \text{ m/s} \) होगी।

प्रश्न 2: स्प्रिंग का अधिकतम संपीडन (Maximum Compression of a Spring - Energy Conservation)

कार दुर्घटनाओं के अनुकरण (Simulation) के लिए 1000 kg द्रव्यमान की एक कार 18 km/h की चाल से एक क्षैतिज रूप से लगे स्प्रिंग (जिसका स्प्रिंग नियतांक \(k = 5.25 \times 10^3\) N/m है) से टकराती है। घर्षण को नगण्य मानते हुए, स्प्रिंग का अधिकतम संपीडन (Maximum compression, \(x_m\)) ज्ञात करें!

हल (Solution):

  1. सबसे पहले कार की चाल को m/s में बदलें: $$ v = 18 \text{ km/h} = 18 \times \frac{5}{18} = 5 \text{ m/s} $$
  2. कार की प्रारंभिक गतिज ऊर्जा (\(K\)): $$ K = \frac{1}{2} m v^2 = \frac{1}{2} \times 1000 \times (5)^2 = 12500 \text{ J} = 1.25 \times 10^4 \text{ J} \text{} $$
  3. अधिकतम संपीडन की स्थिति में, कार की सम्पूर्ण गतिज ऊर्जा स्प्रिंग की प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा में बदल जाती है (यांत्रिक ऊर्जा के संरक्षण के सिद्धांत से): $$ \frac{1}{2} k x_m^2 = K $$ $$ \frac{1}{2} \times (5.25 \times 10^3) \times x_m^2 = 1.25 \times 10^4 $$ $$ x_m^2 = \frac{2 \times 12500}{5250} = \frac{25000}{5250} \approx 4.76 \text{ m}^2 $$ $$ x_m = \sqrt{4.76} \approx 2.18 \text{ m} $$ *(नोट: गणना के आधार पर सटीक मान)*
स्प्रिंग का अधिकतम संपीडन लगभग 2 m (सटीक: \(2.18 \text{ m}\)) होगा।

प्रश्न 3: बैलिस्टिक और ऊर्जा की हानि (Ballistics & Work-Energy Theorem)

एक पुलिस अधिकारी 50.0 g द्रव्यमान की एक गोली 200 m/s की चाल से 2.00 cm मोटे नरम प्लाईवुड पर दागता है। गोली अपनी प्रारंभिक गतिज ऊर्जा की केवल 10% ऊर्जा के साथ प्लाईवुड से बाहर निकलती है। गोली की बाहर निकलने की चाल (Emergent speed) ज्ञात करें!

हल (Solution):

  1. गोली का द्रव्यमान \(m = 50.0 \text{ g} = 0.05 \text{ kg}\)।
  2. गोली की प्रारंभिक गतिज ऊर्जा (\(K_i\)): $$ K_i = \frac{1}{2} m v^2 = \frac{1}{2} \times 0.05 \times (200)^2 = \frac{1}{2} \times 0.05 \times 40000 = 1000 \text{ J} \text{} $$
  3. प्रश्नानुसार, बाहर निकलते समय अंतिम गतिज ऊर्जा (\(K_f\)) प्रारंभिक ऊर्जा का केवल 10% है: $$ K_f = 10\% \text{ of } 1000 \text{ J} = 0.1 \times 1000 = 100 \text{ J} \text{} $$
  4. गोली की बाहर निकलने की चाल \(v_f\) ज्ञात करने के लिए: $$ K_f = \frac{1}{2} m v_f^2 = 100 \text{ J} $$ $$ \frac{1}{2} \times 0.05 \times v_f^2 = 100 $$ $$ 0.025 \times v_f^2 = 100 \implies v_f^2 = \frac{100}{0.025} = 4000 $$ $$ v_f = \sqrt{4000} \approx 63.2 \text{ m/s} \text{} $$
गोली की बाहर निकलने की चाल 63.2 m/s होगी।