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Magnetism, EMI, AC and Transformers | चुंबकत्व, EMI, AC एवं ट्रांसफार्मर

July 16, 2026 |

भौतिक विज्ञान (Physics) में चुम्बकत्व (Magnetism) और विद्युत (Electricity) को लंबे समय तक स्वतंत्र माना जाता था, लेकिन फैराडे और मैक्सवेल के कार्यों ने यह सिद्ध कर दिया कि बदलते चुम्बकीय क्षेत्र से विद्युत और बदलती विद्युत से चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। इस लेख में हम चुम्बकीय पदार्थों के वर्गीकरण, विद्युतचुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction), प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current) और ट्रांसफार्मर के मूलभूत सिद्धांतों का अत्यंत गहराई से गणितीय और सैद्धांतिक विश्लेषण करेंगे।

1. दण्ड चुम्बक और चुम्बकीय द्विध्रुव की चुम्बकन तीव्रता

दण्ड चुम्बक (Bar Magnet): एक दण्ड चुम्बक को चुम्बकीय द्विध्रुव (Magnetic Dipole) माना जा सकता है जिसमें दो ध्रुव (उत्तरी और दक्षिणी) होते हैं। इन ध्रुवों के बीच की दूरी को प्रभावी लम्बाई (\( 2l \)) कहते हैं। किसी चुम्बक का चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण (Magnetic Dipole Moment, \( M \)) उसके ध्रुव प्रबलता (Pole strength, \( m \)) और प्रभावी लम्बाई के गुणनफल के बराबर होता है:

$$ M = m \times 2l $$

चुम्बकन तीव्रता (Intensity of Magnetization, \( I \)): जब किसी पदार्थ को बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उसमें चुम्बकीय आघूर्ण प्रेरित हो जाता है। पदार्थ के प्रति एकांक आयतन (Unit Volume) में उत्पन्न चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण को चुम्बकन तीव्रता कहते हैं।

$$ I = \frac{M}{V} $$

जहाँ \( M \) प्रेरित चुम्बकीय आघूर्ण और \( V \) पदार्थ का आयतन है। इसका SI मात्रक एम्पीयर/मीटर (\( A/m \)) होता है।

2. अनु, प्रति एवं लौह चुम्बकत्व की विस्तृत तुलना (Dia, Para & Ferromagnetism)

बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र के प्रति पदार्थों के व्यवहार के आधार पर फैराडे ने इन्हें तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया:

गुण (Property) प्रतिचुम्बकीय (Diamagnetic) अनुचुम्बकीय (Paramagnetic) लौह चुम्बकीय (Ferromagnetic)
बाह्य क्षेत्र का प्रभाव हल्का सा प्रतिकर्षित (Weakly repelled) होते हैं। हल्का सा आकर्षित (Weakly attracted) होते हैं। प्रबलता से आकर्षित (Strongly attracted) होते हैं।
चुम्बकीय प्रवृत्ति (\( \chi_m \)) अल्प और ऋणात्मक (Small & Negative). ताप पर निर्भर नहीं। अल्प और धनात्मक (Small & Positive). अत्यधिक और धनात्मक (Very large & Positive).
आपेक्षिक चुम्बकशीलता (\( \mu_r \)) \( \mu_r < 1 \) \( \mu_r > 1 \) \( \mu_r \gg 1 \) (सैकड़ों या हजारों में)
उदाहरण बिस्मथ, तांबा, जल, सोना, नमक। एल्युमीनियम, सोडियम, ऑक्सीजन, मैंगनीज। लोहा (Fe), कोबाल्ट (Co), निकल (Ni)।

क्यूरी ताप (Curie Temperature, \( T_c \)): ताप बढ़ने पर अनुचुम्बकीय और लौह चुम्बकीय पदार्थों का चुम्बकत्व घटता है। वह निश्चित ताप जिसके ऊपर कोई लौह चुम्बकीय पदार्थ (Ferromagnetic) अनुचुम्बकीय पदार्थ (Paramagnetic) में बदल जाता है, क्यूरी ताप कहलाता है। क्यूरी-वीस के नियम के अनुसार चुम्बकीय प्रवृत्ति (\( \chi \)):

$$ \chi = \frac{C}{T - T_c} $$

3. फैराडे का विद्युत चुंबकीय प्रेरण का नियम (Faraday's Laws of EMI)

विद्युतचुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) वह घटना है जिसमें किसी परिपथ से बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स (Magnetic Flux, \( \Phi \)) में परिवर्तन होने पर उस परिपथ में एक प्रेरित विद्युत वाहक बल (Induced EMF) उत्पन्न हो जाता है।

  • प्रथम नियम: जब भी किसी बंद परिपथ से गुजरने वाले चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो परिपथ में एक प्रेरित विद्युत वाहक बल (emf) उत्पन्न हो जाता है, जो तब तक रहता है जब तक फ्लक्स में परिवर्तन होता रहता है।
  • द्वितीय नियम: प्रेरित विद्युत वाहक बल (\( e \)) का परिमाण चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन की ऋणात्मक दर के बराबर होता है:
$$ e = -N \frac{d\Phi}{dt} $$

जहाँ \( N \) कुण्डली में फेरों की संख्या है।

4. लैंज का नियम एवं ऊर्जा संरक्षण (Lenz's Law and Conservation of Energy)

लैंज का नियम: किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल या प्रेरित धारा की दिशा सदैव ऐसी होती है कि वह उस कारण का विरोध करती है जिससे वह स्वयं उत्पन्न हुई है। (यही कारण है कि फैराडे के सूत्र में ऋणात्मक चिह्न लगाया जाता है)।

ऊर्जा संरक्षण: लैंज का नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का ही पालन है। जब हम चुम्बक के उत्तरी ध्रुव को कुण्डली के पास लाते हैं, तो कुण्डली का सामने वाला सिरा भी उत्तरी ध्रुव बन जाता है। इस प्रतिकर्षण बल के विरुद्ध चुम्बक को गति कराने में किया गया यांत्रिक कार्य (Mechanical Work) ही विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy) के रूप में परिपथ में प्रकट होता है।

5. स्वतः एवं अन्योन्य प्रेरण (Self and Mutual Induction)

  • स्वतः प्रेरण (Self Induction, \( L \)): जब किसी कुण्डली में प्रवाहित धारा के मान में परिवर्तन किया जाता है, तो स्वयं उसी कुण्डली में एक प्रेरित धारा उत्पन्न हो जाती है। यदि कुण्डली से बद्ध फ्लक्स \( \Phi \) है और प्रवाहित धारा \( I \) है, तो \( \Phi = LI \)। प्रेरित emf होगा: $$ e = -L \frac{dI}{dt} $$ जहाँ \( L \) स्वतः प्रेरण गुणांक (Self Inductance) है, जिसका मात्रक हेनरी (Henry, H) है।
  • अन्योन्य प्रेरण (Mutual Induction, \( M \)): जब दो कुण्डलियां पास-पास रखी हों और प्राथमिक (Primary) कुण्डली में धारा परिवर्तित की जाए, तो द्वितीयक (Secondary) कुण्डली में फ्लक्स परिवर्तन के कारण emf प्रेरित होता है। $$ \Phi_2 = M I_1 \implies e_2 = -M \frac{dI_1}{dt} $$ जहाँ \( M \) अन्योन्य प्रेरण गुणांक (Mutual Inductance) है।

6. प्रत्यावर्ती धारा: LCR परिपथ की प्रतिबाधा (Impedance of AC LCR Circuit)

प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current - AC) परिपथ में जब प्रेरकत्व (Inductor, \( L \)), संधारित्र (Capacitor, \( C \)), और प्रतिरोध (Resistor, \( R \)) श्रेणी क्रम (Series) में जुड़े होते हैं, तो परिपथ द्वारा धारा के प्रवाह में डाले गए कुल अवरोध को प्रतिबाधा (Impedance, \( Z \)) कहते हैं।

वोल्टेज का सदिश आरेख (Phasor diagram) बनाने पर हमें प्रतिबाधा का सूत्र प्राप्त होता है:

$$ Z = \sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2} $$

जहाँ, प्रेरणिक प्रतिघात (Inductive Reactance) \( X_L = \omega L \) और धारितीय प्रतिघात (Capacitive Reactance) \( X_C = \frac{1}{\omega C} \) होता है। कला कोण (Phase angle, \( \phi \)) का मान:

$$ \tan\phi = \frac{X_L - X_C}{R} $$

7. ट्रांसफार्मर (Transformer) का सिद्धांत, प्रकार एवं ऊर्जा क्षय

सिद्धांत: ट्रांसफार्मर अन्योन्य प्रेरण (Mutual Induction) के सिद्धांत पर कार्य करने वाली एक युक्ति है, जो प्रत्यावर्ती वोल्टेज को कम या ज्यादा करने के काम आती है। (यह DC पर कार्य नहीं करता)।

फेरों का अनुपात (Turns Ratio, \( k \)):

$$ \frac{V_s}{V_p} = \frac{N_s}{N_p} = \frac{I_p}{I_s} = k $$
  • ऊंचाई ट्रांसफार्मर (Step-up Transformer): यह वोल्टेज बढ़ाता है। इसमें \( N_s > N_p \) (अर्थात \( k > 1 \)) होता है।
  • अपचाई ट्रांसफार्मर (Step-down Transformer): यह वोल्टेज घटाता है। इसमें \( N_s < N_p \) (अर्थात \( k < 1 \)) होता है।

ट्रांसफार्मर में ऊर्जा क्षय (Energy Losses in Transformer): एक आदर्श ट्रांसफार्मर की दक्षता 100% होती है, लेकिन वास्तविक ट्रांसफार्मर में कुछ ऊर्जा की हानि होती है:

  1. ताम्र क्षय (Copper Loss): कुण्डलियों के प्रतिरोध के कारण \( I^2R \) ऊष्मा उत्पन्न होती है।
  2. भंवर धारा क्षय (Eddy Current Loss): लोहे की क्रोड (Core) में बदलते चुम्बकीय फ्लक्स के कारण भंवर धाराएं उत्पन्न होती हैं। इसे कम करने के लिए क्रोड को पटलित (Laminated) बनाया जाता है।
  3. शैथिल्य क्षय (Hysteresis Loss): AC के हर चक्र में लोहे की क्रोड के बार-बार चुम्बकित और विचुम्बकित होने में खर्च ऊर्जा। इसे कम करने के लिए नर्म लोहे (Soft iron) का उपयोग किया जाता है।
  4. फ्लक्स क्षरण (Flux Leakage): प्राथमिक कुण्डली का पूरा फ्लक्स द्वितीयक से नहीं गुजर पाता।

महत्वपूर्ण आंकिक प्रश्न (Solved Numericals)

प्रतियोगी और बोर्ड परीक्षाओं के स्तर के 3 जटिल आंकिक प्रश्न विस्तृत हल के साथ नीचे दिए गए हैं:

प्रश्न 1: LCR परिपथ की प्रतिबाधा और कला कोण (LCR Circuit Impedance)

एक श्रेणी LCR परिपथ में प्रतिरोध \( R = 40 \, \Omega \), प्रेरणिक प्रतिघात \( X_L = 100 \, \Omega \), और धारितीय प्रतिघात \( X_C = 70 \, \Omega \) है। परिपथ की कुल प्रतिबाधा (\( Z \)) और धारा व वोल्टेज के बीच का कला कोण (Phase angle, \( \phi \)) ज्ञात करें!

हल (Solution):

  • प्रतिबाधा का सूत्र: \( Z = \sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2} \)
  • मान रखने पर: $$ Z = \sqrt{40^2 + (100 - 70)^2} $$ $$ Z = \sqrt{1600 + (30)^2} = \sqrt{1600 + 900} $$ $$ Z = \sqrt{2500} = 50 \, \Omega $$
  • कला कोण के लिए: \( \tan\phi = \frac{X_L - X_C}{R} \) $$ \tan\phi = \frac{100 - 70}{40} = \frac{30}{40} = 0.75 $$
अतः परिपथ की प्रतिबाधा \( Z = 50 \, \Omega \) है और धारा तथा वोल्टेज के बीच कला कोण \( \phi = \tan^{-1}(0.75) \) या लगभग \( 37^\circ \) होगा।

प्रश्न 2: अन्योन्य प्रेरण (Mutual Inductance)

दो कुण्डलियों के बीच अन्योन्य प्रेरण गुणांक \( M = 1.5 \text{ H} \) है। यदि प्राथमिक कुण्डली में धारा 0.5 सेकंड में 0 से 20 A तक परिवर्तित होती है, तो द्वितीयक कुण्डली में प्रेरित विद्युत वाहक बल (Induced EMF) ज्ञात करें!

हल (Solution):

  • अन्योन्य प्रेरण गुणांक \( M = 1.5 \text{ H} \)
  • धारा में परिवर्तन \( \Delta I_1 = 20 - 0 = 20 \text{ A} \)
  • समय \( \Delta t = 0.5 \text{ s} \)
  • फैराडे और अन्योन्य प्रेरण के नियम से (परिमाण लेने पर): $$ |e_2| = M \frac{\Delta I_1}{\Delta t} $$ $$ |e_2| = 1.5 \times \frac{20}{0.5} = 1.5 \times 40 = 60 \text{ V} $$
द्वितीयक कुण्डली में प्रेरित विद्युत वाहक बल \( 60 \text{ V} \) होगा।

प्रश्न 3: ट्रांसफार्मर की दक्षता और धारा (Transformer Efficiency)

एक अपचाई (Step-down) ट्रांसफार्मर 2200 V की मुख्य लाइन (Primary) को 220 V पर लाता है। इसकी प्राथमिक कुण्डली में 5000 फेरे हैं। यदि ट्रांसफार्मर की दक्षता (Efficiency) 90% है और यह 8 kW की आउटपुट पावर (Output Power) देता है, तो द्वितीयक कुण्डली में फेरों की संख्या और प्राथमिक कुण्डली में बहने वाली धारा ज्ञात करें!

हल (Solution):

  • प्राथमिक वोल्टेज \( V_p = 2200 \text{ V} \)
  • द्वितीयक वोल्टेज \( V_s = 220 \text{ V} \)
  • प्राथमिक फेरे \( N_p = 5000 \)
  • फेरों के सूत्र से: \( \frac{V_s}{V_p} = \frac{N_s}{N_p} \) $$ \frac{220}{2200} = \frac{N_s}{5000} \implies \frac{1}{10} = \frac{N_s}{5000} \implies N_s = 500 $$
  • दक्षता \( \eta = 90\% = 0.9 \) और आउटपुट पावर \( P_{out} = 8 \text{ kW} = 8000 \text{ W} \)
  • इनपुट पावर (\( P_{in} \)) के लिए: $$ \eta = \frac{P_{out}}{P_{in}} \implies 0.9 = \frac{8000}{P_{in}} \implies P_{in} = \frac{8000}{0.9} = 8888.89 \text{ W} $$
  • प्राथमिक धारा \( I_p \) के लिए: \( P_{in} = V_p \times I_p \) $$ 8888.89 = 2200 \times I_p \implies I_p = \frac{8888.89}{2200} \approx 4.04 \text{ A} $$
द्वितीयक कुण्डली में फेरों की संख्या 500 होगी और प्राथमिक कुण्डली में धारा लगभग 4.04 A होगी।