भौतिक विज्ञान में दोलन (Oscillations) और तरंगें (Waves) अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं, जो न केवल यांत्रिकी (Mechanics) में बल्कि ध्वनि, प्रकाश और क्वांटम भौतिकी में भी मूलभूत भूमिका निभाते हैं। जब कोई पिंड किसी निश्चित बिंदु के इर्द-गिर्द बार-बार अपनी गति को दोहराता है, तो उसे दोलन कहते हैं। वहीं, तरंग एक ऐसा विक्षोभ (Disturbance) है जो माध्यम के कणों के वास्तविक विस्थापन के बिना ऊर्जा का एक स्थान से दूसरे स्थान तक संचरण करता है। इस लेख में हम आवर्ती गति, सरल आवर्त गति (SHM), सरल दौलित्रों के आवर्तकाल, तरंगों के प्रकार और अध्यारोपण के सिद्धांतों का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
1. आवर्ती गति, आवर्तकाल एवं आवृत्ति (Periodic Motion, Time Period, and Frequency)
- आवर्ती गति (Periodic Motion): वह गति जो एक निश्चित समय अंतराल के बाद स्वयं को ठीक उसी पथ पर दोहराती है, आवर्ती गति कहलाती है। उदाहरण: सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की परिक्रमा, या घड़ी के पेंडुलम की गति।
- आवर्तकाल (Time Period, \( T \)): आवर्ती गति करते हुए कण को अपना एक पूरा चक्कर (या एक दोलन) पूरा करने में जितना समय लगता है, उसे आवर्तकाल कहते हैं। इसकी SI इकाई सेकंड (s) है।
- आवृत्ति (Frequency, \( \nu \) या \( f \)): एक सेकंड में पूरे किए गए दोलनों या चक्रों की संख्या को आवृत्ति कहते हैं। यह आवर्तकाल का व्युत्क्रम होती है: \( \nu = \frac{1}{T} \)। इसकी SI इकाई हर्ट्ज़ (Hz) या चक्र प्रति सेकंड है।
2. सरल आवर्ती गति (Simple Harmonic Motion - SHM)
सरल आवर्ती गति (SHM) एक विशेष प्रकार की आवर्ती गति है जिसमें कण पर लगने वाला प्रत्यानयन बल (Restoring Force) कण के साम्य स्थिति (Mean position) से विस्थापन (Displacement) के अनुक्रमानुपाती होता है और इसकी दिशा सदैव साम्य स्थिति की ओर होती है।
$$ F \propto -x \implies F = -kx $$न्यूटन के द्वितीय नियम (\( F = ma \)) के अनुसार, SHM का अवकल समीकरण (Differential Equation) इस प्रकार होता है:
$$ \frac{d^2x}{dt^2} + \omega^2 x = 0 $$विस्थापन, वेग और त्वरण के समीकरण (Equations of Displacement, Velocity & Acceleration)
- विस्थापन (Displacement, \( x \)): किसी समय \( t \) पर कण की साम्य स्थिति से दूरी। $$ x(t) = A \sin(\omega t + \phi) $$ जहाँ \( A \) आयाम (Amplitude) है, \( \omega \) कोणीय आवृत्ति (Angular frequency) है, और \( \phi \) प्रारंभिक कला (Phase constant) है।
- वेग (Velocity, \( v \)): विस्थापन का समय के सापेक्ष अवकलन। $$ v(t) = \frac{dx}{dt} = A\omega \cos(\omega t + \phi) $$ वेग और विस्थापन के बीच संबंध: \( v = \omega \sqrt{A^2 - x^2} \)। साम्य स्थिति (\( x = 0 \)) पर वेग अधिकतम (\( v_{max} = A\omega \)) होता है।
- त्वरण (Acceleration, \( a \)): वेग का समय के सापेक्ष अवकलन। $$ a(t) = \frac{dv}{dt} = -A\omega^2 \sin(\omega t + \phi) = -\omega^2 x(t) $$ त्वरण हमेशा विस्थापन के विपरीत दिशा में होता है। अधिकतम विस्थापन (\( x = \pm A \)) पर त्वरण अधिकतम (\( a_{max} = \omega^2 A \)) होता है।
3. सरल दौलित्रों के आवर्तकाल की व्युत्पत्ति (Derivation of Time Period for Simple Oscillators)
(i) सरल लोलक (Simple Pendulum)
एक द्रव्यमानहीन और अतान्य डोरी से बंधे भारी बिंदु द्रव्यमान (Bob) को सरल लोलक कहते हैं। माना लोलक की लंबाई \( L \) और द्रव्यमान \( m \) है। यदि इसे साम्य स्थिति से एक छोटे कोण \( \theta \) से विस्थापित किया जाए, तो प्रत्यानयन बल (Restoring force) गुरुत्वाकर्षण के घटक \( -mg \sin\theta \) द्वारा प्रदान किया जाता है।
$$ F = -mg \sin\theta $$छोटे कोणों के लिए, \( \sin\theta \approx \theta = \frac{x}{L} \) (जहाँ \( x \) चाप का विस्थापन है)।
$$ F = -mg \left(\frac{x}{L}\right) $$चूँकि \( F = ma \), इसलिए:
$$ ma = -\left(\frac{mg}{L}\right)x \implies a = -\left(\frac{g}{L}\right)x $$इसकी तुलना SHM के मानक समीकरण \( a = -\omega^2 x \) से करने पर:
$$ \omega^2 = \frac{g}{L} \implies \omega = \sqrt{\frac{g}{L}} $$चूँकि \( T = \frac{2\pi}{\omega} \), इसलिए सरल लोलक का आवर्तकाल:
$$ T = 2\pi \sqrt{\frac{L}{g}} $$(ii) स्प्रिंग-द्रव्यमान निकाय (Spring-Mass System)
माना एक स्प्रिंग जिसका बल नियतांक (Spring constant) \( k \) है, उससे \( m \) द्रव्यमान का एक गुटका बंधा है। यदि गुटके को \( x \) दूरी तक खींचा जाए, तो हुक के नियम (Hooke's Law) के अनुसार स्प्रिंग का प्रत्यानयन बल:
$$ F = -kx $$गुटके का त्वरण:
$$ ma = -kx \implies a = -\left(\frac{k}{m}\right)x $$मानक समीकरण \( a = -\omega^2 x \) से तुलना करने पर:
$$ \omega^2 = \frac{k}{m} \implies \omega = \sqrt{\frac{k}{m}} $$अतः स्प्रिंग-द्रव्यमान निकाय का आवर्तकाल:
$$ T = 2\pi \sqrt{\frac{m}{k}} $$4. तरंगें: प्रत्यास्थ, अनुदैर्ध्य एवं अनुप्रस्थ (Waves: Elastic, Longitudinal & Transverse)
तरंगें मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं: यांत्रिक (प्रत्यास्थ) और विद्युत-चुंबकीय। यांत्रिक तरंगों (Elastic Waves) के संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है।
- अनुप्रस्थ तरंगें (Transverse Waves): इन तरंगों में माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के लंबवत (Perpendicular) दोलन करते हैं। उदाहरण: तनी हुई डोरी में उत्पन्न तरंगें। ये शृंग (Crest) और गर्त (Trough) के रूप में आगे बढ़ती हैं।
- अनुदैर्ध्य तरंगें (Longitudinal Waves): इन तरंगों में माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के समानांतर (Parallel) दोलन करते हैं। उदाहरण: ध्वनि तरंगें। ये संपीडन (Compression) और विरलन (Rarefaction) के रूप में संचरित होती हैं।
5. तरंगों का अध्यारोपण सिद्धांत एवं व्यतिकरण (Principle of Superposition and Interference)
अध्यारोपण का सिद्धांत (Principle of Superposition): जब दो या दो से अधिक तरंगें किसी माध्यम में एक ही समय पर एक ही बिंदु से गुजरती हैं, तो उस बिंदु पर माध्यम के कण का परिणामी विस्थापन (Resultant displacement) उन सभी तरंगों के अलग-अलग विस्थापनों के सदिश योग (Vector sum) के बराबर होता है!
$$ y = y_1 + y_2 + \dots + y_n $$व्यतिकरण (Interference): जब समान आवृत्ति और लगभग समान आयाम वाली दो प्रकाश या ध्वनि तरंगें एक ही दिशा में संचरित होते हुए अध्यारोपित होती हैं, तो माध्यम के विभिन्न बिंदुओं पर परिणामी तीव्रता (Intensity) परिवर्तित हो जाती है।
- संपोषी व्यतिकरण (Constructive Interference): जब तरंगें समान कला (Same Phase) में मिलती हैं, तो परिणामी आयाम अधिकतम हो जाता है (\( A = A_1 + A_2 \))। इसके लिए पथांतर \( \Delta x = n\lambda \) होना चाहिए।
- विनाशी व्यतिकरण (Destructive Interference): जब तरंगें विपरीत कला (Opposite Phase) में मिलती हैं, तो परिणामी आयाम न्यूनतम या शून्य हो जाता है (\( A = |A_1 - A_2| \))। इसके लिए पथांतर \( \Delta x = (2n + 1)\frac{\lambda}{2} \) होना चाहिए।
6. लयबद्धता के मूलभूत नियम (Harmonics and Fundamentals)
जब किसी परिबद्ध माध्यम (जैसे बंधी हुई डोरी या ऑर्गन पाइप) में अप्रगामी तरंगें (Stationary Waves) उत्पन्न होती हैं, तो वे विशिष्ट आवृत्तियों पर ही कंपन करती हैं।
- मूल आवृत्ति (Fundamental Frequency): कंपन की सबसे कम आवृत्ति को मूल आवृत्ति या प्रथम गुणावृत्ति (First Harmonic) कहते हैं।
- सनादी (Harmonics): वे सभी आवृत्तियां जो मूल आवृत्ति की पूर्ण गुणज (Integral multiples) होती हैं, सनादी कहलाती हैं। उदाहरण: यदि मूल आवृत्ति \( f_0 \) है, तो \( 2f_0, 3f_0, \dots \) क्रमशः द्वितीय और तृतीय सनादी होंगे।
- निस्पंद (Nodes) और प्रस्पंद (Antinodes): अप्रगामी तरंगों में जहाँ विस्थापन शून्य होता है, उसे निस्पंद कहते हैं और जहाँ विस्थापन अधिकतम होता है, उसे प्रस्पंद कहते हैं।
महत्वपूर्ण आंकिक प्रश्न (Solved Numericals)
प्रश्न 1: SHM समीकरण का विश्लेषण (Analysis of SHM Equation)
एक कण की सरल आवर्त गति का समीकरण \( x(t) = 5 \sin\left(4\pi t + \frac{\pi}{3}\right) \) मीटर है। कण का (a) आयाम (Amplitude), (b) आवृत्ति (Frequency), (c) अधिकतम वेग (Maximum Velocity), और (d) अधिकतम त्वरण (Maximum Acceleration) ज्ञात कीजिए।
हल (Solution):
मानक SHM समीकरण \( x(t) = A \sin(\omega t + \phi) \) से दिए गए समीकरण की तुलना करने पर:
- आयाम \( A = 5 \text{ m} \)।
- कोणीय आवृत्ति \( \omega = 4\pi \text{ rad/s} \)। आवृत्ति \( \nu = \frac{\omega}{2\pi} = \frac{4\pi}{2\pi} = 2 \text{ Hz} \)।
- अधिकतम वेग \( v_{max} = A\omega \): $$ v_{max} = 5 \times 4\pi = 20\pi \text{ m/s} \approx 62.83 \text{ m/s} $$
- अधिकतम त्वरण \( a_{max} = A\omega^2 \): $$ a_{max} = 5 \times (4\pi)^2 = 5 \times 16\pi^2 = 80\pi^2 \text{ m/s}^2 \approx 789.57 \text{ m/s}^2 $$
अतः कण का आयाम 5 m, आवृत्ति 2 Hz, अधिकतम वेग \( 20\pi \text{ m/s} \) और अधिकतम त्वरण \( 80\pi^2 \text{ m/s}^2 \) है।
प्रश्न 2: स्प्रिंग का संयोजन (Combination of Springs)
दो स्प्रिंग जिनके बल नियतांक क्रमशः \( k_1 = 300 \text{ N/m} \) और \( k_2 = 600 \text{ N/m} \) हैं, एक 3 kg के गुटके के साथ (a) श्रेणी क्रम (Series) और (b) समांतर क्रम (Parallel) में जुड़े हैं। दोनों ही स्थितियों में निकाय का आवर्तकाल (Time Period) ज्ञात कीजिए।
हल (Solution):
- (a) श्रेणी क्रम संयोजन (Series Combination): श्रेणी क्रम में तुल्य बल नियतांक (\( k_s \)) का सूत्र होता है: $$ \frac{1}{k_s} = \frac{1}{k_1} + \frac{1}{k_2} \implies k_s = \frac{k_1 k_2}{k_1 + k_2} $$ $$ k_s = \frac{300 \times 600}{300 + 600} = \frac{180000}{900} = 200 \text{ N/m} $$ आवर्तकाल \( T_s = 2\pi \sqrt{\frac{m}{k_s}} \): $$ T_s = 2\pi \sqrt{\frac{3}{200}} \approx 2\pi \times \sqrt{0.015} \approx 2\pi \times 0.122 \approx 0.77 \text{ s} $$
- (b) समांतर क्रम संयोजन (Parallel Combination): समांतर क्रम में तुल्य बल नियतांक (\( k_p \)) का सूत्र होता है: $$ k_p = k_1 + k_2 = 300 + 600 = 900 \text{ N/m} $$ आवर्तकाल \( T_p = 2\pi \sqrt{\frac{m}{k_p}} \): $$ T_p = 2\pi \sqrt{\frac{3}{900}} = 2\pi \sqrt{\frac{1}{300}} \approx 2\pi \times 0.0577 \approx 0.36 \text{ s} $$
निकाय का श्रेणी क्रम में आवर्तकाल लगभग 0.77 s और समांतर क्रम में 0.36 s होगा।
प्रश्न 3: लिफ्ट में सरल लोलक (Simple Pendulum in an Accelerating Lift)
एक सरल लोलक की लंबाई 1 मीटर है और इसका पृथ्वी की सतह पर आवर्तकाल \( T \) है। यदि इस लोलक को एक लिफ्ट में रखा जाए जो \( 2 \text{ m/s}^2 \) के त्वरण (Acceleration) से ऊपर की ओर जा रही हो, तो इसका नया आवर्तकाल क्या होगा? (\( g = 9.8 \text{ m/s}^2 \) लें)।
हल (Solution):
- स्थिर लिफ्ट (या पृथ्वी की सतह) पर प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण \( g_{eff} = g = 9.8 \text{ m/s}^2 \)। प्रारंभिक आवर्तकाल: $$ T = 2\pi \sqrt{\frac{L}{g}} = 2\pi \sqrt{\frac{1}{9.8}} \approx 2.0 \text{ s} $$
- जब लिफ्ट \( a = 2 \text{ m/s}^2 \) के त्वरण से ऊपर की ओर जाती है, तो लोलक के गोलक (Bob) पर नीचे की ओर एक छद्म बल (Pseudo force) कार्य करता है। अतः, नया प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण: $$ g'_{eff} = g + a = 9.8 + 2.0 = 11.8 \text{ m/s}^2 $$
- नया आवर्तकाल \( T' \): $$ T' = 2\pi \sqrt{\frac{L}{g'_{eff}}} = 2\pi \sqrt{\frac{1}{11.8}} $$ $$ T' \approx 2\pi \times \sqrt{0.0847} \approx 2 \times 3.1416 \times 0.291 \approx 1.83 \text{ s} $$
लिफ्ट के ऊपर की ओर त्वरित होने पर प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण बढ़ जाता है, जिससे लोलक का नया आवर्तकाल घटकर लगभग 1.83 s हो जाएगा।