भौतिक रसायन विज्ञान (Physical Chemistry) में विलयनों (Solutions) के अणु संख्यक गुणधर्मों (Colligative Properties) का अध्ययन एक प्रमुख विषय है। इनमें से परासरण दाब (Osmotic Pressure) एक अत्यंत महत्वपूर्ण गुण है, जिसका उपयोग जटिल अणुओं और बहुलकों (Polymers) के सटीक आण्विक द्रव्यमान (Molecular Mass) ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
इस लेख में हम परासरण और विसरण के बीच का अंतर, परासरण दाब मापने की सर्वोत्कृष्ट बर्कले-हार्टले विधि (Berkeley-Hartley Method) की कार्यविधि, इसके लाभ तथा परीक्षा के दृष्टिकोण से \( \pi = CRT \) पर आधारित कठिन आंकिक प्रश्नों का गहन अध्ययन करेंगे।
1. परासरण और विसरण में अंतर (Difference between Osmosis and Diffusion)
अक्सर छात्र परासरण (Osmosis) और विसरण (Diffusion) को एक ही प्रक्रिया मान लेते हैं, क्योंकि दोनों ही सांद्रता प्रवणता (Concentration gradient) को संतुलित करने का प्रयास करते हैं। किंतु वैज्ञानिक दृष्टिकोण से दोनों में मूलभूत अंतर होते हैं:
| गुण (Property) | परासरण (Osmosis) | विसरण (Diffusion) |
|---|---|---|
| अर्धपारगम्य झिल्ली (Semi-permeable Membrane) | इसमें अर्धपारगम्य झिल्ली (SPM) का होना अनिवार्य है। | इसमें किसी प्रकार की झिल्ली की आवश्यकता नहीं होती है। |
| कणों का प्रवाह (Movement of Particles) | इसमें केवल विलायक (Solvent) के अणु ही गति करते हैं, विलेय (Solute) के नहीं। | इसमें विलेय (Solute) और विलायक (Solvent) दोनों के अणु गति करते हैं। |
| प्रवाह की दिशा (Direction of Flow) | विलायक के अणु कम सांद्रता वाले विलयन से अधिक सांद्रता वाले विलयन की ओर जाते हैं। | अणु अधिक सांद्रता वाले क्षेत्र से कम सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर जाते हैं। |
| माध्यम (Medium) | यह केवल द्रवों (Liquids) और विलयनों में ही संभव है। | यह गैसों (Gases) और द्रवों (Liquids) दोनों में होता है। |
2. परासरण दाब के मापन की बर्कले-हार्टले विधि (Berkeley-Hartley Method)
परासरण दाब को मापने के लिए कई विधियां (जैसे- पेफ़र की विधि) विकसित की गई हैं, लेकिन बर्कले और हार्टले विधि को सबसे सटीक और आधुनिक माना जाता है।
सिद्धांत (Principle)
यह विधि इस सिद्धांत पर आधारित है कि: "विलयन पर लगाया गया वह न्यूनतम बाह्य दाब जो विलायक के अणुओं को अर्धपारगम्य झिल्ली (Semi-permeable Membrane) से होकर विलयन में प्रवेश करने से (अर्थात परासरण को) ठीक रोक दे, उसे ही उस विलयन का परासरण दाब कहते हैं।"
नामांकित आरेख का वर्णन (Diagram Description)
चूंकि यहां हम चित्र (image) नहीं दिखा सकते, अतः इस उपकरण की सटीक भौतिक संरचना का वर्णन नीचे दिया गया है:
- समकेंद्रीय नलियां (Concentric Tubes): इस उपकरण में दो समकेंद्रीय नलियां होती हैं।
- आंतरिक सरंध्र नली (Inner Porous Tube): अंदर की नली एक सरंध्र (porous) बर्तन की बनी होती है। इसके छिद्रों में कॉपर फेरोसायनाइड \( (Cu_2[Fe(CN)_6]) \) की कृत्रिम अर्धपारगम्य झिल्ली रासायनिक रूप से जमा दी जाती है।
- संलग्नक (Attachments): इस आंतरिक नली के एक सिरे पर एक जल भंडार या थिसिल फनल (Thistle funnel) लगा होता है और दूसरे सिरे पर एक अंशांकित केशनली (Capillary tube) लगी होती है। इसमें शुद्ध विलायक (Solvent) भरा जाता है।
- बाहरी जैकेट (Outer Jacket): आंतरिक नली को एक मजबूत गनमेटल (Gun-metal) के बाहरी जैकेट के अंदर फिट किया जाता है। इस बाहरी जैकेट में वह विलयन (Solution) भरा जाता है, जिसका परासरण दाब मापना है।
- दाब गेज और पिस्टन: बाहरी जैकेट के ऊपर बाह्य दाब लगाने के लिए एक जल-रोधी पिस्टन (Piston) और दाब को मापने के लिए एक दाबमापी (Pressure Gauge) लगा होता है।
प्रायोगिक कार्यविधि (Experimental Procedure)
- सबसे पहले आंतरिक सरंध्र नली में थिसिल फनल की सहायता से शुद्ध विलायक (जल) भर दिया जाता है। केशनली में जल के तल (Level) का प्रारंभिक पाठ्यांक (Initial reading) नोट कर लिया जाता है।
- बाहरी जैकेट में वह विलयन भरा जाता है जिसका परासरण दाब हमें ज्ञात करना है।
- परासरण (Osmosis) की क्रिया शुरू होती है। आंतरिक नली का शुद्ध विलायक अर्धपारगम्य झिल्ली से होकर बाहरी जैकेट (विलयन) की ओर प्रवाहित होने लगता है।
- इसके परिणामस्वरूप, केशनली में जल का तल गिरने लगता है।
- अब पिस्टन द्वारा बाहरी विलयन पर इतना बाह्य दाब लगाया जाता है कि केशनली में जल का गिरता हुआ तल रुक जाए और अपने प्रारंभिक पाठ्यांक पर वापस लौट आए।
- इस अवस्था में परासरण की क्रिया पूर्णतः रुक जाती है। इस समय पिस्टन द्वारा लगाया गया और दाब गेज में दर्ज किया गया दाब ही विलयन का परासरण दाब (\( \pi \)) कहलाता है।
बर्कले-हार्टले विधि के लाभ (Advantages)
- समय की बचत (Less Time Consuming): इसमें परासरण के रुकने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता; दाब लगाकर तुरंत साम्यावस्था प्राप्त कर ली जाती है। अतः यह विधि बहुत तेज है।
- सांद्रता में कोई परिवर्तन नहीं (No Change in Concentration): चूंकि विलायक को विलयन में जाने से रोक दिया जाता है, इसलिए प्रयोग के दौरान विलयन तनु (Dilute) नहीं होता। इससे मापन अत्यधिक सटीक होता है।
- उच्च दाब का सुरक्षित मापन (Can measure High Pressure): कॉपर फेरोसायनाइड की झिल्ली सरंध्र बर्तन की दीवारों के मध्य गहराई में स्थित होती है। इसलिए उच्च बाह्य दाब लगाने पर भी झिल्ली के फटने का कोई डर नहीं रहता।
3. परासरण दाब का गणितीय सूत्र (Mathematical Formula)
वांट हॉफ (van't Hoff) के अनुसार, तनु विलयनों का परासरण दाब आदर्श गैस समीकरण के समान व्यवहार करता है:
$$ \pi = CRT $$जहां:
- \( \pi \) = परासरण दाब (atm या bar में)
- \( C \) = मोलर सांद्रता (molarity), \( C = \frac{n}{V} = \frac{W_B}{M_B \times V} \)
- \( R \) = विलयन स्थिरांक (\( 0.0821 \text{ L atm K}^{-1}\text{mol}^{-1} \))
- \( T \) = परम ताप (Kelvin में)
यदि विलयन में विलेय का वियोजन (Dissociation) या संगुणन (Association) होता है, तो वांट हॉफ गुणांक (van't Hoff factor, \(i\)) का उपयोग किया जाता है:
$$ \pi = iCRT $$4. परीक्षा स्तर के जटिल आंकिक प्रश्न (Solved Numericals)
प्रश्न 1: (समपरासरी / Isotonic विलयन का सिद्धांत)
गन्ने की शर्करा (अणुभार = 342) का 5% (w/V) जलीय विलयन, एक अज्ञात अवाष्पशील पदार्थ 'X' के 1% (w/V) जलीय विलयन के साथ समपरासरी (Isotonic) है। पदार्थ 'X' का आण्विक द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
विस्तृत हल:
समपरासरी (Isotonic) विलयनों का परासरण दाब एक समान होता है, अर्थात \( \pi_1 = \pi_2 \)।
समान ताप (T) पर, उनके सांद्रण भी समान होंगे: \( C_1 = C_2 \)
सूत्र: \( \frac{W_1}{M_1 \times V_1} = \frac{W_2}{M_2 \times V_2} \)
दिया गया है:
- शर्करा के लिए: \( W_1 = 5 \text{ g} \), \( M_1 = 342 \text{ g/mol} \), \( V_1 = 100 \text{ mL} \)
- पदार्थ 'X' के लिए: \( W_2 = 1 \text{ g} \), \( M_2 = ? \), \( V_2 = 100 \text{ mL} \)
उत्तर: अज्ञात पदार्थ 'X' का आण्विक द्रव्यमान 68.4 g/mol है।
प्रश्न 2: (वियोजन की मात्रा (\( \alpha \)) और वांट हॉफ गुणांक पर आधारित)
15°C (288 K) पर 100 mL जल में 0.39 ग्राम \( BaCl_2 \) घोला गया है। यदि इस सांद्रता पर बेरियम क्लोराइड की वियोजन की मात्रा (\( \alpha \)) 0.60 है, तो विलयन के परासरण दाब की गणना कीजिए। (\( BaCl_2 \) का अणुभार = 208 g/mol, \( R = 0.0821 \text{ L atm K}^{-1}\text{mol}^{-1} \))
विस्तृत हल:
दिया गया है: \( W_B = 0.39 \text{ g} \), \( V = 100 \text{ mL} = 0.1 \text{ L} \), \( T = 288 \text{ K} \), \( M_B = 208 \text{ g/mol} \)।
वियोजन (Dissociation) समीकरण: \( BaCl_2 \rightarrow Ba^{2+} + 2Cl^- \)
यहाँ कुल आयन (\(n\)) = 1 + 2 = 3
वांट हॉफ गुणांक (\(i\)) की गणना:
$$ i = 1 + (n - 1)\alpha $$ $$ i = 1 + (3 - 1) \times 0.60 = 1 + 2 \times 0.60 = 1 + 1.20 = 2.2 $$परासरण दाब (\( \pi \)) का संशोधित सूत्र:
$$ \pi = i \times \frac{W_B}{M_B \times V} \times RT $$ $$ \pi = 2.2 \times \frac{0.39}{208 \times 0.1} \times 0.0821 \times 288 $$ $$ \pi = 2.2 \times \frac{0.39}{20.8} \times 23.6448 $$ $$ \pi = 2.2 \times 0.01875 \times 23.6448 \approx 1.625 $$उत्तर: विलयन का परासरण दाब 1.625 atm होगा।
प्रश्न 3: (प्रबल विद्युत अपघट्य का परासरण दाब)
25°C पर 2 लीटर जल में 25 mg \( K_2SO_4 \) (पोटैशियम सल्फेट) घोलने पर बनने वाले विलयन का परासरण दाब atm में ज्ञात कीजिए। यह मान लें कि \( K_2SO_4 \) पूर्णतः वियोजित (100% dissociated) हो जाता है। (K=39, S=32, O=16)
विस्तृत हल:
दिया गया है: \( W_B = 25 \text{ mg} = 0.025 \text{ g} \), \( V = 2 \text{ L} \), \( T = 25^\circ C = 298 \text{ K} \)।
\( K_2SO_4 \) का अणुभार (\(M_B\)) = \( (2 \times 39) + 32 + (4 \times 16) = 78 + 32 + 64 = 174 \text{ g/mol} \)।
चूंकि \( K_2SO_4 \) 100% वियोजित होता है (\( K_2SO_4 \rightarrow 2K^+ + SO_4^{2-} \)), अतः वांट हॉफ गुणांक \( i = 3 \)।
परासरण दाब का सूत्र:
$$ \pi = i \times C \times R \times T $$ $$ \pi = 3 \times \frac{0.025}{174 \times 2} \times 0.0821 \times 298 $$ $$ \pi = 3 \times \frac{0.025}{348} \times 24.4658 $$ $$ \pi = 3 \times 0.0000718 \times 24.4658 \approx 0.00527 $$उत्तर: \( K_2SO_4 \) के इस अति तनु विलयन का परासरण दाब लगभग 0.00527 atm (या \( 5.27 \times 10^{-3} \text{ atm} \)) होगा।