भौतिकी में, जब हम वास्तविक जीवन के पिंडों का अध्ययन करते हैं, तो उन्हें केवल एक 'बिंदु कण' (Point particle) मानना पर्याप्त नहीं होता। किसी भी वास्तविक पिंड का एक निश्चित आकार और आकृति होती है। आदर्श रूप में, एक दृढ़ पिण्ड (Rigid Body) वह है जिसकी आकृति और आकार पूरी तरह से निश्चित और अपरिवर्तनीय होते हैं। ऐसे पिण्डों की गति को समझने के लिए, हम उन्हें कई छोटे कणों का एक निकाय (System of particles) मानते हैं। इस लेख में हम दृढ़ पिण्डों की घूर्णन गति, द्रव्यमान केन्द्र, बल आघूर्ण और जड़त्व आघूर्ण के भौतिक सिद्धांतों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
1. दृढ़ पिण्ड का द्रव्यमान केन्द्र (Center of Mass of a Rigid Body)
किसी कणों के निकाय का द्रव्यमान केन्द्र (Center of Mass) वह बिंदु है जहाँ निकाय का संपूर्ण द्रव्यमान केंद्रित माना जा सकता है। जब इस बिंदु पर कोई बाह्य बल लगाया जाता है, तो यह उसी प्रकार गति करता है जैसे कि निकाय का सारा द्रव्यमान इसी बिंदु पर हो और सभी बाह्य बल सीधे इसी बिंदु पर कार्य कर रहे हों!
गणितीय रूप से, \(n\) कणों के निकाय के द्रव्यमान केन्द्र का स्थिति सदिश (Position vector) \(\vec{R}\) इस प्रकार दिया जाता है:
$$ \vec{R} = \frac{1}{M} \sum_{i=1}^{n} m_i \vec{r}_i $$जहाँ \(M\) निकाय का कुल द्रव्यमान (\(M = \sum m_i\)) है, \(m_i\) \(i\)-वें कण का द्रव्यमान है, और \(\vec{r}_i\) उसका स्थिति सदिश है।
2. बल का आघूर्ण (Torque)
जिस प्रकार रेखीय गति (Translational motion) में किसी वस्तु की अवस्था बदलने के लिए बल की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार घूर्णन गति में किसी वस्तु को घुमाने के लिए बल आघूर्ण (Torque) की आवश्यकता होती है। इसे 'बल का आघूर्ण (Moment of force)' भी कहा जाता है।
यदि मूल बिंदु (Origin) के सापेक्ष किसी कण का स्थिति सदिश \(\vec{r}\) है और उस पर \(\vec{F}\) बल लग रहा है, तो बल आघूर्ण \(\vec{\tau}\) को दोनों सदिशों के सदिश गुणनफल (Cross product) के रूप में परिभाषित किया जाता है:
$$ \vec{\tau} = \vec{r} \times \vec{F} $$इसकी दिशा \(\vec{r}\) और \(\vec{F}\) वाले तल के लंबवत होती है, और इसका परिमाण \(\tau = r F \sin\theta\) होता है, जहाँ \(\theta\) दोनों सदिशों के बीच का कोण है!
3. कोणीय संवेग (Angular Momentum) एवं इसका संरक्षण
कोणीय संवेग (Angular Momentum, \(\vec{L}\)) रेखीय संवेग का घूर्णन समतुल्य (Rotational analogue) है। एक कण के लिए, कोणीय संवेग \(\vec{l}\) को स्थिति सदिश \(\vec{r}\) और रेखीय संवेग \(\vec{p}\) के सदिश गुणनफल के रूप में परिभाषित किया जाता है:
$$ \vec{l} = \vec{r} \times \vec{p} $$दृढ़ पिण्डों के लिए जो एक स्थिर अक्ष के परितः घूर्णन कर रहे हैं, कुल कोणीय संवेग जड़त्व आघूर्ण (\(I\)) और कोणीय वेग (\(\omega\)) के गुणनफल के बराबर होता है:
$$ \vec{L} = I \vec{\omega} $$कोणीय संवेग संरक्षण का सिद्धांत (Law of Conservation of Angular Momentum)
यदि किसी कणों के निकाय पर कार्य करने वाला कुल बाह्य बल आघूर्ण शून्य (\(\tau_{ext} = 0\)) है, तो निकाय का कुल कोणीय संवेग संरक्षित (Conserved) रहता है!
$$ \vec{L} = \text{नियतांक (Constant)} $$ $$ I_1 \omega_1 = I_2 \omega_2 $$उदाहरण: जब कोई नर्तक या कलाबाज़ (Acrobat) घूर्णन करते समय अपने हाथों को शरीर के पास खींच लेता है, तो उसका जड़त्व आघूर्ण (\(I\)) कम हो जाता है। कोणीय संवेग को संरक्षित रखने के लिए, उसका कोणीय वेग (\(\omega\)) अचानक बढ़ जाता है!
4. जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia, \(I\)) की भौतिक परिभाषा
घूर्णन गति में जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia) वही भूमिका निभाता है जो रेखीय गति में 'द्रव्यमान (Mass)' निभाता है। यह पिण्ड की उस प्रवृत्ति का माप है जो उसकी घूर्णन अवस्था (विराम या एकसमान घूर्णन) में किसी भी परिवर्तन का विरोध करती है!
किसी स्थिर अक्ष के परितः निकाय का जड़त्व आघूर्ण उसके कणों के द्रव्यमान और अक्ष से उनकी लंबवत दूरियों के वर्ग के गुणनफलों के योग के बराबर होता है:
$$ I = \sum_{i=1}^{n} m_i r_i^2 $$यह पिण्ड के द्रव्यमान, आकार, और घूर्णन अक्ष की स्थिति व अभिविन्यास (Orientation) पर निर्भर करता है!
5. जड़त्व आघूर्ण संबंधी प्रमेय (Theorems of Axes)
विभिन्न अक्षों के परितः जड़त्व आघूर्ण ज्ञात करने के लिए दो प्रमुख प्रमेय उपयोग किए जाते हैं:
- लंबवत अक्षों का प्रमेय (Theorem of Perpendicular Axes): यह केवल समतलीय पटल (Planar lamina) पर लागू होता है। इसके अनुसार, किसी समतलीय पटल का उसके तल के लंबवत अक्ष (\(z\)) के परितः जड़त्व आघूर्ण, उसके तल में स्थित दो परस्पर लंबवत अक्षों (\(x\) और \(y\)) के परितः जड़त्व आघूर्णों के योग के बराबर होता है: $$ I_z = I_x + I_y $$
- समांतर अक्षों का प्रमेय (Theorem of Parallel Axes): किसी भी अक्ष के परितः पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण (\(I\)), उसके द्रव्यमान केन्द्र से गुजरने वाले समांतर अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण (\(I_{cm}\)) और पिण्ड के कुल द्रव्यमान (\(M\)) तथा दोनों अक्षों के बीच की लंबवत दूरी (\(d\)) के वर्ग के गुणनफल के योग के बराबर होता है: $$ I = I_{cm} + M d^2 $$
6. वलय (Ring) और चक्रिका (Disk) के जड़त्व आघूर्ण
| दृढ़ पिण्ड (Rigid Body) | घूर्णन अक्ष (Axis of Rotation) | जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia) |
|---|---|---|
| पतला वलय (Thin Circular Ring), त्रिज्या \(R\), द्रव्यमान \(M\) | तल के लंबवत, केंद्र से गुजरने वाला अक्ष | \( I = MR^2 \) |
| वृत्ताकार चक्रिका (Circular Disk), त्रिज्या \(R\), द्रव्यमान \(M\) | तल के लंबवत, केंद्र से गुजरने वाला अक्ष | \( I = \frac{1}{2} MR^2 \) |
महत्वपूर्ण आंकिक प्रश्न (Solved Numericals)
यहाँ घूर्णन गतिकी और कोणीय संवेग पर आधारित 2 उच्च-स्तरीय आंकिक प्रश्न उनके विस्तृत हल के साथ दिए गए हैं:
प्रश्न 1: कोणीय संवेग का संरक्षण (Conservation of Angular Momentum)
एक बच्चा अपनी दोनों भुजाओं को फैलाकर एक घूर्णन मंच (Turntable) के केंद्र पर खड़ा है। मंच 40 rev/min की कोणीय चाल (Angular speed) से बिना घर्षण के घूम रहा है। यदि बच्चा अपनी भुजाओं को सिकोड़ लेता है, जिससे उसका जड़त्व आघूर्ण प्रारंभिक मान का \(\frac{2}{5}\) गुना हो जाता है, तो बच्चे की नई कोणीय चाल क्या होगी?
हल (Solution):
चूँकि मंच बिना घर्षण के घूम रहा है, इसलिए बाह्य बल आघूर्ण शून्य (\(\tau_{ext} = 0\)) है। अतः कोणीय संवेग संरक्षण का सिद्धांत लागू होगा:
- प्रारंभिक जड़त्व आघूर्ण = \( I_1 \)
- प्रारंभिक कोणीय चाल \( \omega_1 \) = 40 rev/min
- अंतिम जड़त्व आघूर्ण \( I_2 = \frac{2}{5} I_1 = 0.4 I_1 \)
सूत्र \( I_1 \omega_1 = I_2 \omega_2 \) का उपयोग करने पर:
$$ I_1 \times 40 = (0.4 I_1) \times \omega_2 $$ $$ \omega_2 = \frac{40}{0.4} = \frac{400}{4} = 100 \text{ rev/min} $$अतः भुजाएँ सिकोड़ने पर बच्चे की नई कोणीय चाल 100 rev/min हो जाएगी। जड़त्व आघूर्ण घटने से कोणीय चाल बढ़ जाती है।
प्रश्न 2: बल आघूर्ण एवं कोणीय त्वरण (Torque and Angular Acceleration)
20 kg द्रव्यमान और 20 cm त्रिज्या वाले एक गतिपालक पहिए (Flywheel) के किनारे पर नगण्य द्रव्यमान की एक रस्सी लपेटी गई है। रस्सी पर 25 N का एकसमान खिंचाव (Pull) लगाया जाता है। पहिए का कोणीय त्वरण (Angular acceleration, \(\alpha\)) ज्ञात करें! (मान लें कि पहिया एक चक्रिका/Disc की तरह है जो घर्षण रहित धुरी पर है)!
हल (Solution):
- सबसे पहले, बल आघूर्ण (\(\tau\)) की गणना करें: $$ \tau = F \times R $$ $$ \tau = 25 \text{ N} \times 0.20 \text{ m} = 5.0 \text{ N m} $$
- पहिए (एक चक्रिका के रूप में) का उसकी धुरी के परितः जड़त्व आघूर्ण (\(I\)) ज्ञात करें: $$ I = \frac{1}{2} M R^2 $$ $$ I = \frac{1}{2} \times 20 \times (0.20)^2 = 10 \times 0.04 = 0.4 \text{ kg m}^2 $$
- न्यूटन के घूर्णन गति के द्वितीय नियम \( \tau = I \alpha \) से कोणीय त्वरण (\(\alpha\)) निकालें: $$ \alpha = \frac{\tau}{I} $$ $$ \alpha = \frac{5.0}{0.4} = 12.5 \text{ rad s}^{-2} $$
अतः गतिपालक पहिए का कोणीय त्वरण 12.5 rad s⁻² होगा।