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Photosynthesis | प्रकाश संश्लेषण

July 18, 2026 |

जीव विज्ञान (Biology) में प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) वह भौतिक-रासायनिक प्रक्रिया (Physicochemical process) है जिसके द्वारा हरे पौधे (Green plants), शैवाल (Algae) और कुछ जीवाणु (Bacteria) सूर्य के प्रकाश (Solar energy) का उपयोग करके कार्बनिक खाद्य पदार्थों (Organic food) का संश्लेषण करते हैं। पृथ्वी पर जीवन के लिए प्रकाश संश्लेषण दो प्रमुख कारणों से अत्यंत महत्वपूर्ण है: पहला, यह पृथ्वी पर सभी खाद्य शृंखलाओं (Food chains) का प्राथमिक स्रोत है, और दूसरा, यह वायुमंडल में जीवनदायिनी ऑक्सीजन (Oxygen) गैस मुक्त करता है।

प्रकाश संश्लेषण का जैव-रासायनिक समीकरण (Biochemical Equation)

इस प्रक्रिया में पौधे वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड (\( CO_2 \)) और मृदा से जल (\( H_2O \)) ग्रहण करते हैं। प्रकाश ऊर्जा और क्लोरोफिल की उपस्थिति में कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज) का निर्माण होता है:

$$ 6CO_2 + 12H_2O \xrightarrow{\text{Light Energy / Chlorophyll}} C_6H_{12}O_6 + 6H_2O + 6O_2 \uparrow $$

(नोट: कॉर्नेलियस वैन नील के प्रयोगों के अनुसार, मुक्त होने वाली ऑक्सीजन जल (\( H_2O \)) के विखंडन से आती है, न कि \( CO_2 \) से।)


1. प्रकाश संश्लेषण का स्थान और शारीरिकी (Site of Photosynthesis & Anatomy)

प्रकाश संश्लेषण मुख्य रूप से पत्तियों की पर्णमध्योतक कोशिकाओं (Mesophyll cells) में उपस्थित हरितलवक (Chloroplast) में होता है। हरितलवक एक दोहरी झिल्ली-बद्ध अंगक (Double membrane-bound organelle) है।

  • ग्रैना (Grana): यह थाइलाकोइड्स (Thylakoids) का चपटा, सिक्कों जैसा ढेर होता है। थाइलाकोइड की झिल्ली में प्रकाश संश्लेषी वर्णक (Pigments) होते हैं। यह प्रकाशिक अभिक्रिया (Light reaction) का स्थल है, जहाँ प्रकाश ऊर्जा को ग्रहण कर ATP और NADPH का निर्माण किया जाता है।
  • स्ट्रोमा (Stroma): यह हरितलवक का तरल मैट्रिक्स है जिसमें एंजाइम पाए जाते हैं। यह अप्रकाशिक अभिक्रिया (Dark reaction) का स्थल है, जहाँ ATP और NADPH का उपयोग करके \( CO_2 \) का अपचयन (Reduction) कर ग्लूकोज बनाया जाता है।
Detailed anatomy of a Chloroplast showing Grana, Stroma, and Thylakoids
चित्र: हरितलवक की आंतरिक संरचना (Internal Structure of Chloroplast)

प्रकाश संश्लेषी वर्णक (Photosynthetic Pigments)

पत्तियों के रंग के लिए मुख्य रूप से चार वर्णक उत्तरदायी होते हैं, जिन्हें क्रोमैटोग्राफी (Chromatography) द्वारा अलग किया जा सकता है:

  • क्लोरोफिल 'a' (Chlorophyll 'a'): नीला-हरा वर्णक। यह मुख्य (Primary) प्रकाश संश्लेषी वर्णक है जो अभिक्रिया केंद्र (Reaction centre) बनाता है।
  • क्लोरोफिल 'b' (Chlorophyll 'b'): पीला-हरा वर्णक। (सहायक वर्णक / Accessory pigment)।
  • जैंथोफिल (Xanthophylls): पीला वर्णक।
  • कैरोटीनॉयड (Carotenoids): पीला-नारंगी वर्णक। ये सहायक वर्णक प्रकाश की एक विस्तृत रेंज को अवशोषित कर ऊर्जा को क्लोरोफिल 'a' तक पहुँचाते हैं और उसे फोटो-ऑक्सीडेशन (Photo-oxidation) से बचाते हैं।

2. प्रकाश संश्लेषण की क्रियाविधि (Mechanism of Photosynthesis)

प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया दो मुख्य चरणों में पूर्ण होती है:

A. प्रकाशिक अभिक्रिया (Light Reaction / Photochemical Phase)

यह प्रक्रिया पूर्णतः प्रकाश पर निर्भर करती है और थाइलाकोइड्स (Thylakoids) में संपन्न होती है। इसमें दो प्रकाश तंत्र (Photosystems - PS I और PS II) भाग लेते हैं।

  1. प्रकाश का अवशोषण (Light Absorption): PS II (जिसका अभिक्रिया केंद्र P680 है) 680 nm तरंगदैर्ध्य के लाल प्रकाश को अवशोषित करता है, जिससे इसके इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर प्राथमिक इलेक्ट्रॉन ग्राही (Primary electron acceptor) द्वारा ग्रहण कर लिए जाते हैं।
  2. जल का प्रकाशिक अपघटन (Photolysis of Water): PS II द्वारा खोए गए इलेक्ट्रॉनों की पूर्ति जल के विखंडन से होती है। $$ 2H_2O \xrightarrow{\text{Light}} 4H^+ + O_2 \uparrow + 4e^- $$ यहीं से वायुमंडल में ऑक्सीजन मुक्त होती है।
  3. इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र (Electron Transport System - Z Scheme): इलेक्ट्रॉन विभिन्न साइटोक्रोम (Cytochromes) और वाहकों (Plastoquinone, Plastocyanin) से होते हुए PS I (P700) तक पहुँचते हैं। इस 'डाउनहिल' (Downhill) गति के दौरान ADP से ATP का निर्माण होता है।
  4. NADP+ का अपचयन: PS I से उत्तेजित इलेक्ट्रॉन अंततः \( NADP^+ \) को \( NADPH + H^+ \) में अपचयित (Reduce) कर देते हैं।

B. अप्रकाशिक अभिक्रिया (Dark Reaction / Biosynthetic Phase)

यह प्रक्रिया प्रकाश पर सीधे निर्भर नहीं करती, बल्कि प्रकाशिक अभिक्रिया के उत्पादों (ATP और NADPH) पर निर्भर करती है। यह स्ट्रोमा में होती है। इसे केल्विन चक्र (Calvin Cycle) या C3 पथ (C3 Pathway) कहा जाता है। मेल्विन केल्विन (Melvin Calvin) ने रेडियोधर्मी \( ^{14}C \) का उपयोग कर इसकी खोज की थी।

  1. कार्बोक्सीलीकरण (Carboxylation): यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इसमें \( CO_2 \), 5-कार्बन वाले राइबुलोज 1,5-बिसफॉस्फेट (RuBP) के साथ जुड़कर 3-कार्बन वाले 3-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल (3-PGA) के 2 अणु बनाता है। यह अभिक्रिया रुबिस्को (RuBisCO) एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है, जो पृथ्वी पर सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला प्रोटीन है।
  2. अपचयन (Reduction): 3-PGA अणुओं को ग्लिसराल्डिहाइड-3-फॉस्फेट (G3P) में बदलने के लिए ATP और NADPH का उपयोग किया जाता है। इसी से अंततः ग्लूकोज (Glucose) बनता है। (एक ग्लूकोज अणु के लिए चक्र को 6 बार घूमना पड़ता है)।
  3. पुनरुद्भवन (Regeneration): चक्र को निरंतर चलाने के लिए RuBP का पुनर्निर्माण अत्यंत आवश्यक है, जिसमें 1 ATP का खर्च होता है।

(एक ग्लूकोज अणु के निर्माण के लिए 6 \( CO_2 \), 18 ATP, और 12 NADPH की आवश्यकता होती है।)

Flowchart showing the Z-Scheme of Light Reaction and Calvin Cycle
चित्र: जेड-स्कीम (Z-Scheme) और केल्विन चक्र (Calvin Cycle) का प्रवाह आरेख

3. C4 पथ: हैच-स्लैक मार्ग (C4 Pathway / Hatch-Slack Pathway)

शुष्क और उष्णकटिबंधीय (Tropical) क्षेत्रों में पाए जाने वाले पौधों (जैसे: मक्का, गन्ना, ज्वार) में \( CO_2 \) स्थिरीकरण का एक विशेष मार्ग होता है, जिसे C4 पथ कहते हैं। इसका पहला स्थायी उत्पाद 4-कार्बन वाला ऑक्जेलोएसीटिक अम्ल (OAA) होता है।

  • क्रान्ज शारीरिकी (Kranz Anatomy): C4 पौधों की पत्तियों में संवहनी बंडल (Vascular bundles) के चारों ओर बड़ी कोशिकाओं की एक माला जैसी परत होती है, जिसे पूलाच्छद कोशिकाएं (Bundle sheath cells) कहते हैं।
  • प्रक्रिया: पर्णमध्योतक (Mesophyll) कोशिकाओं में \( CO_2 \) को फॉस्फोइनोल पाइरूवेट (PEP) द्वारा ग्रहण किया जाता है (PEP Carboxylase एंजाइम की मदद से)। यहाँ रुबिस्को नहीं होता, इसलिए ऑक्सीजन से कोई प्रतिस्पर्धा नहीं होती। OAA बनता है जो मैलिक अम्ल के रूप में पूलाच्छद कोशिकाओं में जाता है और वहाँ \( CO_2 \) मुक्त करता है। इसके बाद वहाँ केल्विन चक्र चलता है।
लक्षण (Characteristics) C3 पौधे (C3 Plants) C4 पौधे (C4 Plants)
प्राथमिक \( CO_2 \) ग्राही (Primary \( CO_2 \) Acceptor) RuBP (5-कार्बन) PEP (3-कार्बन)
प्राथमिक उत्पाद (First Stable Product) 3-PGA (3-कार्बन) OAA (4-कार्बन)
क्रान्ज शारीरिकी (Kranz Anatomy) अनुपस्थित (Absent) उपस्थित (Present)
अनुकूलतम तापमान (Optimum Temperature) 20-25°C 30-40°C या इससे अधिक
उत्पादकता (Productivity / Yield) सामान्यतः कम अत्यधिक (उच्च प्रकाश और ताप पर)

4. प्रकाश संश्लेषण की दर को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Photosynthesis)

प्रकाश संश्लेषण की दर कई आंतरिक (Internal - जैसे पत्ती का आकार, क्लोरोफिल की मात्रा) और बाह्य (External) कारकों पर निर्भर करती है।

ब्लैकमैन का सीमाकारी कारकों का नियम (Blackman's Law of Limiting Factors, 1905)

"यदि कोई रासायनिक प्रक्रिया एक से अधिक कारकों (Factors) द्वारा प्रभावित होती है, तो उस प्रक्रिया की दर उस कारक द्वारा निर्धारित होगी जो अपने न्यूनतम मान (Minimal value) के सबसे करीब है। यह कारक प्रक्रिया को सीमित कर देगा यदि इसकी सांद्रता बदल दी जाए।"

प्रमुख बाह्य कारक (External Factors):

  • प्रकाश (Light): प्रकाश की गुणवत्ता (लाल और नीले प्रकाश में सर्वाधिक दर) और प्रकाश की तीव्रता दोनों महत्वपूर्ण हैं। कम तीव्रता पर, प्रकाश सीमाकारी कारक होता है। अत्यधिक उच्च तीव्रता पर क्लोरोफिल का विघटन (Photo-oxidation/Solarization) हो सकता है, जिससे दर घट जाती है।
  • कार्बन डाइऑक्साइड की सांद्रता (\( CO_2 \) Concentration): वायुमंडल में \( CO_2 \) (0.03 - 0.04%) मुख्य सीमाकारी कारक है। C3 पौधे 450 \(\mu lL^{-1}\) तक \( CO_2 \) वृद्धि के प्रति अनुक्रिया (Response) दिखाते हैं, जबकि C4 पौधे 360 \(\mu lL^{-1}\) पर ही संतृप्त (Saturate) हो जाते हैं। यही कारण है कि ग्रीनहाउस फसलों (टमाटर, शिमला मिर्च) को उच्च \( CO_2 \) वातावरण में उगाने से उत्पादकता बढ़ती है।
  • तापमान (Temperature): अप्रकाशिक अभिक्रिया (Dark reaction) पूर्णतः एंजाइमेटिक है, इसलिए यह तापमान पर अत्यधिक निर्भर करती है। C4 पौधों का अनुकूलतम तापमान (Optimum temp) उच्च (30-40°C) होता है, जबकि C3 पौधों का अनुकूलतम तापमान निम्न (20-25°C) होता है।
  • जल (Water): यद्यपि जल एक अभिकर्मक (Reactant) है, लेकिन इसकी कमी का प्रभाव प्रकाश संश्लेषण से अधिक पूरे पौधे पर पड़ता है। जल के तनाव (Water stress) से रंध्र (Stomata) बंद हो जाते हैं, जिससे \( CO_2 \) की उपलब्धता घट जाती है और पत्तियाँ मुरझा (Wilt) जाती हैं।

5. परीक्षा केंद्रित महत्वपूर्ण तथ्य एवं अपवाद (Key Exam Takeaways)

प्रकाश श्वसन (Photorespiration) - C3 पौधों की एक विनाशकारी प्रक्रिया:
रुबिस्को (RuBisCO) एंजाइम \( CO_2 \) और \( O_2 \) दोनों के साथ जुड़ सकता है (Carboxylase-Oxygenase dual nature)। जब वायुमंडल में \( O_2 \) का स्तर बढ़ता है और तापमान अधिक होता है, तो C3 पौधों में रुबिस्को \( O_2 \) से जुड़ जाता है। इस प्रक्रिया में ATP या शर्करा (Sugar) का निर्माण नहीं होता, बल्कि पहले से बनी ऊर्जा (ATP) खर्च हो जाती है और \( CO_2 \) मुक्त होती है। इस अपव्ययी (Wasteful) प्रक्रिया को प्रकाश श्वसन (Photorespiration) कहते हैं।

अपवाद: C4 पौधों (जैसे मक्का, गन्ना) में क्रान्ज शारीरिकी के कारण पर्णमध्योतक कोशिकाओं से \( CO_2 \) पंप होकर पूलाच्छद कोशिकाओं में जाती है, जिससे रुबिस्को के आसपास \( CO_2 \) की सांद्रता हमेशा उच्च रहती है। इसी कारण C4 पौधों में प्रकाश श्वसन पूर्णतः अनुपस्थित (Absent) होता है, जिससे उनकी उत्पादकता (Yield) बहुत अधिक होती है।