रसायन विज्ञान (Chemistry) में विलयन (Solutions) का अध्ययन एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है, विशेषकर जब हम अवाष्पशील विलेय (Non-volatile solute) को किसी वाष्पशील विलायक (Volatile solvent) में घोलते हैं। जब किसी शुद्ध विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाया जाता है, तो विलयन का वाष्पदाब शुद्ध विलायक के वाष्पदाब से कम हो जाता है। इस घटना को वाष्पदाब में अवनमन (Lowering of vapour pressure) कहा जाता है। इस लेख में, हम राउल्ट के नियम (Raoult's Law) की विस्तृत गणितीय व्युत्पत्ति, वाष्पदाब में आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) और विलेय के आण्विक द्रव्यमान (Molecular mass of solute) के बीच संबंध का अध्ययन करेंगे।
1. राउल्ट के नियम की विस्तृत गणितीय व्युत्पत्ति (Detailed Derivation of Raoult's Law)
राउल्ट (1886) के नियम के अनुसार, किसी तनु विलयन के वाष्पदाब में आपेक्षिक अवनमन, विलयन में उपस्थित विलेय के मोल प्रभाज (Mole fraction) के बराबर होता है。
इसे गणितीय रूप में इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है:
$$ \frac{p - p_s}{p} = \frac{n}{n + N} $$जहाँ \(n\) = विलेय के मोलों की संख्या और \(N\) = विलायक के मोलों की संख्या है。
व्युत्पत्ति (Derivation):
- शुद्ध विलायक का वाष्पदाब उसकी सतह से वाष्पीकृत होने वाले अणुओं की संख्या के कारण उत्पन्न होता है।
- जब एक अवाष्पशील विलेय को विलयन में घोला जाता है, तो सतह पर उपस्थित विलेय के अणु सतह के उस हिस्से को अवरुद्ध कर देते हैं जहाँ से वाष्पीकरण हो सकता था।
- इस कारण विलेय के कण विलयन की सतह से विलायक के अणुओं के निकास को रोकते हैं, जिससे वाष्पदाब में कमी (Lowering) आती है।
- इसलिए, विलयन का वाष्पदाब (\(p_s\)) मुख्य रूप से सतह पर मौजूद विलायक के अणुओं की संख्या पर निर्भर करता है, जो उसके मोल प्रभाज (Mole fraction) के समानुपाती होता है।
इसे हम इस प्रकार लिख सकते हैं:
$$ p_s \propto \frac{N}{n + N} $$समानुपातिकता स्थिरांक (Proportionality constant) \(k\) का उपयोग करने पर:
$$ p_s = k \left( \frac{N}{n + N} \right) $$शुद्ध विलायक के मामले में, विलेय के मोल \(n = 0\) होते हैं। इसलिए शुद्ध विलायक का मोल प्रभाज \(\frac{N}{0 + N} = 1\) होता है।
इस स्थिति में विलयन का वाष्पदाब \(p_s\), शुद्ध विलायक के वाष्पदाब \(p\) के बराबर हो जाता है, अतः उपरोक्त समीकरण से \(p = k\) सिद्ध होता है।
अब \(k\) का मान (\(k = p\)) वापस समीकरण में रखने पर:
$$ p_s = p \left( \frac{N}{n + N} \right) $$समीकरण को पुनर्व्यवस्थित (Rearrange) करने पर:
$$ \frac{p_s}{p} = \frac{N}{n + N} $$दोनों पक्षों को 1 में से घटाने पर:
$$ 1 - \frac{p_s}{p} = 1 - \frac{N}{n + N} $$इसे हल करने पर हमें राउल्ट के नियम का अंतिम गणितीय रूप प्राप्त होता है:
$$ \frac{p - p_s}{p} = \frac{n}{n + N} $$2. वाष्पदाब में आपेक्षिक अवनमन (\(\Delta P/P^\circ\)) और विलेय के आण्विक द्रव्यमान (\(M_2\)) में संबंध
अवाष्पशील विलेय का आण्विक द्रव्यमान (Molecular mass) विलयन के वाष्पदाब में होने वाले अवनमन (\(p - p_s\)) को मापकर आसानी से ज्ञात किया जा सकता है。
- माना \(W_2\) ग्राम विलेय को \(W_1\) ग्राम विलायक में घोला गया है।
- माना विलेय का आण्विक द्रव्यमान \(M_2\) और विलायक का आण्विक द्रव्यमान \(M_1\) है।
- विलेय के मोलों की संख्या (\(n\)) = \(\frac{W_2}{M_2}\)।
- विलायक के मोलों की संख्या (\(N\)) = \(\frac{W_1}{M_1}\)।
इन मानों को राउल्ट के नियम के मूल समीकरण में रखने पर:
$$ \frac{p - p_s}{p} = \frac{\frac{W_2}{M_2}}{\frac{W_2}{M_2} + \frac{W_1}{M_1}} $$बहुत तनु विलयनों (Very dilute solutions) के लिए, विलेय के मोलों की संख्या (\(\frac{W_2}{M_2}\)) विलायक की तुलना में बहुत कम होती है, इसलिए इसे हर (denominator) में नगण्य (negligible) माना जा सकता है。
इस प्रकार, तनु विलयनों के लिए अंतिम सरलीकृत समीकरण (Simplified equation) बनता है:
$$ \frac{p - p_s}{p} = \frac{W_2 \times M_1}{M_2 \times W_1} $$प्रायोगिक तौर पर \(\frac{p - p_s}{p}\) (वाष्पदाब में आपेक्षिक अवनमन) और विलायक के आण्विक द्रव्यमान (\(M_1\)) का मान ज्ञात होने पर, विलेय का अज्ञात आण्विक द्रव्यमान (\(M_2\)) आसानी से निकाला जा सकता है。
3. परीक्षा स्तर के जटिल आंकिक प्रश्न (Solved Numericals)
प्रश्न 1: 293 K पर ईथर (आण्विक द्रव्यमान = 74) का वाष्पदाब 442 mm Hg है। यदि इस तापमान पर 50 ग्राम ईथर में 3 ग्राम यौगिक A घोला जाता है, तो वाष्पदाब गिरकर 426 mm Hg हो जाता है। यौगिक A के आण्विक द्रव्यमान की गणना करें (मान लें कि ईथर में A का विलयन बहुत तनु है)。
विस्तृत हल:
यहाँ हम राउल्ट के नियम के तनु विलयन वाले सन्निकट (approximate) समीकरण का उपयोग करेंगे。
सूत्र:
$$ \frac{p - p_s}{p} = \frac{W_2 \times M_1}{M_2 \times W_1} $$दिया गया है:
- \(W_2\) (विलेय A का द्रव्यमान) = 3 ग्राम
- \(W_1\) (विलायक ईथर का द्रव्यमान) = 50 ग्राम
- \(M_1\) (विलायक ईथर का आण्विक द्रव्यमान) = 74
- \(p\) (शुद्ध विलायक का वाष्पदाब) = 442 mm
- \(p_s\) (विलयन का वाष्पदाब) = 426 mm
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
$$ \frac{442 - 426}{442} = \frac{3 \times 74}{M_2 \times 50} $$ $$ \frac{16}{442} = \frac{222}{50 \times M_2} $$ $$ M_2 = \frac{222 \times 442}{50 \times 16} $$ $$ M_2 = \frac{98124}{800} = 122.6 $$उत्तर: यौगिक A का आण्विक द्रव्यमान लगभग 123 (\(122.6\)) हैอ।
प्रश्न 2: 50°C पर 100 ग्राम जल में 18.2 ग्राम यूरिया घोला जाता है। उत्पन्न वाष्पदाब का अवनमन 5 mm Hg है। यूरिया के आण्विक द्रव्यमान की गणना करें। (50°C पर जल का वाष्पदाब 92 mm Hg है)。
विस्तृत हल:
चूँकि यह विलयन बहुत तनु नहीं है, इसलिए हम पूर्ण राउल्ट नियम (Exact Raoult's Law) समीकरण लागू करेंगे。
सूत्र:
$$ \frac{p - p_s}{p} = \frac{\frac{W_2}{M_2}}{\frac{W_2}{M_2} + \frac{W_1}{M_1}} $$दिया गया है:
- \(W_2\) (विलेय यूरिया का द्रव्यमान) = 18.2 ग्राम
- \(W_1\) (विलायक जल का द्रव्यमान) = 100 ग्राम
- \(M_1\) (जल का आण्विक द्रव्यमान) = 18
- \(p - p_s\) (वाष्पदाब में अवनमन) = 5 mm
- \(p\) (शुद्ध जल का वाष्पदाब) = 92 mm
समीकरण में मान रखने पर:
$$ \frac{5}{92} = \frac{\frac{18.2}{M_2}}{\frac{18.2}{M_2} + \frac{100}{18}} $$समीकरण को सरल करने पर:
$$ \frac{5}{92} = \frac{\frac{18.2}{M_2}}{\frac{18.2}{M_2} + 5.55} $$ $$ 5 \left( \frac{18.2}{M_2} + 5.55 \right) = 92 \left( \frac{18.2}{M_2} \right) $$ $$ \frac{91}{M_2} + 27.75 = \frac{1674.4}{M_2} $$ $$ 27.75 = \frac{1674.4 - 91}{M_2} $$ $$ 27.75 = \frac{1583.4}{M_2} $$ $$ M_2 = \frac{1583.4}{27.75} = 57.05 $$उत्तर: यूरिया का आण्विक द्रव्यमान 57.05 g/mol हैอ।