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Physical Chemistry: Solutions | विलयन

August 06, 2026 |

प्रस्तावना [Introduction]

भौतिक रसायन विज्ञान [Physical Chemistry] में विलयन [Solutions] का अध्ययन एक अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यावहारिक विषय है [cite: 158]। हमारे दैनिक जीवन और विभिन्न रासायनिक प्रक्रियाओं में विलयनों की भूमिका अपरिहार्य है। साधारण शब्दों में, दो या दो से अधिक पदार्थों के समांगी मिश्रण [Homogeneous Mixture] को विलयन [Solution] कहा जाता है [cite: 158]। विलयन में जो घटक अधिक मात्रा में उपस्थित होता है, उसे विलायक [Solvent] कहते हैं और जो घटक कम मात्रा में उपस्थित होता है, उसे विलेय [Solute] कहा जाता है [cite: 158]। उदाहरण के लिए, जब नमक को पानी में घोला जाता है, तो पानी विलायक और नमक विलेय होता है [cite: 158]। इस लेख में, हम विलयन की सांद्रता को व्यक्त करने की विभिन्न विधियों, राउल्ट के नियम [Raoult's Law] और विलयनों के सबसे महत्वपूर्ण भौतिक गुणों—अणुसंख्यक गुणधर्मों [Colligative Properties] का विस्तृत और गहन अध्ययन करेंगे [cite: 5, 6, 12]।

विलयन की सांद्रता व्यक्त करने की विधियाँ [Methods of Expressing Concentration of Solutions]

किसी विलायक या विलयन की निश्चित मात्रा में घुले हुए विलेय की मात्रा को विलयन की सांद्रता [Concentration of Solution] कहा जाता है [cite: 158]। सांद्रता को मापने के लिए कई रासायनिक और भौतिक इकाइयों का उपयोग किया जाता है:

1. मोलरता [Molarity - \( M \)]

एक लीटर विलयन में घुले हुए विलेय के मोलों की कुल संख्या को विलयन की मोलरता [Molarity] कहते हैं।

गणितीय रूप में:

\[ M = \frac{\text{विलेय के मोलों की संख्या } (n)}{\text{विलयन का आयतन लीटर में } (V_L)} \]

इसकी इकाई मोल प्रति लीटर (\( \text{mol/L} \)) होती है। चूँकि आयतन तापमान पर निर्भर करता है, इसलिए तापमान बदलने से मोलरता का मान भी बदल जाता है।

2. मोललता [Molality - \( m \)]

एक किलोग्राम (\( 1 \text{ kg} \)) विलायक में घुले हुए विलेय के मोलों की संख्या को विलयन की मोललता [Molality] कहते हैं [cite: 158]।

गणितीय रूप में:

\[ m = \frac{\text{विलेय के मोलों की संख्या } (n)}{\text{विलायक का द्रव्यमान किलोग्राम में } (W_{\text{kg}})} \] [cite: 159]

इसकी इकाई मोल प्रति किलोग्राम (\( \text{mol/kg} \)) होती है [cite: 159]। चूँकि द्रव्यमान तापमान से प्रभावित नहीं होता, इसलिए मोललता का मान तापमान परिवर्तन से अपरिवर्तित रहता है।

3. मोल प्रभाज या मोल अंश [Mole Fraction - \( X \)]

विलयन में किसी विशिष्ट घटक के मोलों की संख्या और विलयन में उपस्थित सभी घटकों के कुल मोलों की संख्या के अनुपात को उस घटक का मोल प्रभाज [Mole Fraction] कहते हैं [cite: 10, 160]।

यदि एक द्वअंगी विलयन [Binary Solution] में विलेय के मोल \( n_B \) और विलायक के मोल \( n_A \) हों, तो विलेय का मोल प्रभाज (\( X_B \)) होगा [cite: 11]:

\[ X_B = \frac{n_B}{n_A + n_B} \] [cite: 11]

किसी भी विलयन में उपस्थित सभी घटकों के मोल प्रभाज का योग हमेशा एक (\( X_A + X_B = 1 \)) होता है।

राउल्ट का नियम [Raoult's Law]

सन् 1886 में फ्रांसीसी रसायनशास्त्री फ्रेंकोइस राउल्ट ने वाष्पशील द्रवों के विलयन के लिए एक नियम प्रतिपादित किया। इस नियम के अनुसार, किसी निश्चित तापमान पर वाष्पशील द्रवों के विलयन में प्रत्येक घटक का आंशिक वाष्प दाब [Partial Vapor Pressure], विलयन में उसके मोल प्रभाज [Mole Fraction] के सीधे समानुपाती होता है [cite: 10, 12]।

यदि विलयन में दो वाष्पशील घटक A और B उपस्थित हैं, तो:

\[ P_A = X_A \times P_A^\circ \quad \text{और} \quad P_B = X_B \times P_B^\circ \] [cite: 10]

जहाँ \( P_A^\circ \) और \( P_B^\circ \) शुद्ध घटकों के वाष्प दाब हैं।

जब एक अवाष्पशील विलेय [Non-volatile Solute] को किसी विलायक में मिलाया जाता है, तो विलयन का वाष्प दाब शुद्ध विलायक की तुलना में कम हो जाता है, क्योंकि सतह पर विलायक के अणुओं की संख्या कम हो जाती है [cite: 10]। इस स्थिति में राउल्ट का नियम निम्नलिखित रूप लेता है [cite: 10, 12]:

\[ P_{\text{solution}} = X_{\text{solvent}} \times P^\circ_{\text{solvent}} \] [cite: 10]

विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्म [Colligative Properties of Solutions]

विलयनों के वे भौतिक गुण जो केवल विलयन में उपस्थित विलेय के कणों की संख्या (सांद्रता) पर निर्भर करते हैं, न कि विलेय के रासायनिक स्वभाव या पहचान पर, उन्हें अणुसंख्यक गुणधर्म [Colligative Properties] कहा जाता है [cite: 5, 6, 12, 17, 158]। भौतिक रसायन विज्ञान में मुख्य रूप से चार अणुसंख्यक गुणधर्मों का अध्ययन किया जाता है [cite: 5, 6, 12, 17, 158]:

1. वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन [Relative Lowering of Vapor Pressure]

शुद्ध विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलायक के वाष्प दाब में होने वाली कमी (अवनमन) और शुद्ध विलायक के वाष्प दाब के अनुपात को वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन कहते हैं [cite: 10, 12]। राउल्ट के नियम के अनुसार, यह विलेय के मोल प्रभाज के बराबर होता है:

\[ \frac{P^\circ_{\text{solvent}} - P_{\text{solution}}}{P^\circ_{\text{solvent}}} = i \cdot X_{\text{solute}} \] [cite: 5, 12]

2. क्वथनांक का उन्नयन [Boiling Point Elevation]

वह तापमान जिस पर किसी द्रव का वाष्प दाब वायुमंडलीय दाब के बराबर हो जाता है, उसका क्वथनांक [Boiling Point] कहलाता है। विलयन में अवाष्पशील विलेय मिलाने से उसका वाष्प दाब घट जाता है, जिसके कारण द्रव को उबालने के लिए अधिक तापीय ऊर्जा की आवश्यकता होती है [cite: 12]। इस प्रकार क्वथनांक में होने वाली वृद्धि को क्वथनांक का उन्नयन (\( \Delta T_b \)) कहते हैं [cite: 12, 161]।

\[ \Delta T_b = i \cdot K_b \cdot m \] [cite: 5, 12]

जहाँ \( K_b \) मोलल क्वथनांक उन्नयन स्थिरांक [Molal Boiling Point Elevation Constant] या एबुलियोस्कोपिक स्थिरांक [Ebullioscopic Constant] है और \( m \) मोललता है [cite: 5, 12]।

3. हिमांक का अमनवन [Freezing Point Depression]

वह तापमान जिस पर किसी पदार्थ की ठोस और द्रव अवस्थाओं का वाष्प दाब समान हो जाता है, उसका हिमांक [Freezing Point] कहलाता है। विलयन में विलेय के कणों की उपस्थिति विलायक के क्रिस्टल जालक [Crystal Lattice] के निर्माण में बाधा डालती है, जिससे विलायक को जमाने के लिए और अधिक कम तापमान की आवश्यकता होती है [cite: 12]। हिमांक में होने वाली इस कमी को हिमांक का अवनमन (\( \Delta T_f \)) कहते हैं [cite: 12, 161]।

\[ \Delta T_f = i \cdot K_f \cdot m \] [cite: 5, 12]

जहाँ \( K_f \) मोलल हिमांक अवनमन स्थिरांक [Molal Freezing Point Depression Constant] या क्रायोस्कोपिक स्थिरांक [Cryoscopic Constant] है [cite: 5, 12]।

4. परासरण दाब [Osmotic Pressure - \( \pi \)]

जब एक विलायक और विलयन को अर्धपारगम्य झिल्ली [Semipermeable Membrane] द्वारा पृथक किया जाता है, तो विलायक के अणुओं का स्वतः प्रवाह कम सांद्रता वाले विलयन से उच्च सांद्रता वाले विलयन की ओर होने लगता है, जिसे परासरण [Osmosis] कहते हैं [cite: 12]। इस प्रवाह को रोकने के लिए विलयन की ओर से लगाया जाने वाला न्यूनतम अतिरिक्त बाह्य दाब परासरण दाब [Osmotic Pressure] कहलाता है [cite: 12, 161, 166]।

\[ \pi = i \cdot M \cdot R \cdot T \] [cite: 5, 12]

जहाँ \( R \) सार्वभौमिक गैस नियतांक [Universal Gas Constant] और \( T \) परम ताप [Absolute Temperature] है [cite: 5, 12]। यदि विलयन पर परासरण दाब से अधिक बाह्य दाब लगाया जाए, तो विलायक का प्रवाह विपरीत दिशा में होने लगता है, जिसे उत्क्रम परासरण [Reverse Osmosis - RO] कहते हैं। इसका उपयोग जल के शुद्धिकरण में किया जाता है [cite: 12]।

वान्ट हॉफ गुणांक [van 't Hoff Factor - \( i \)]

विद्युत-अनपघट्य [Non-electrolytes] जैसे यूरिया या ग्लूकोज जल में वियोजित या संघनित नहीं होते, इसलिए उनके लिए वान्ट हॉफ गुणांक \( i = 1 \) होता है [cite: 12]। लेकिन विद्युत-अपघट्य (आयनिक विलेय जैसे \( NaCl, CaCl_2 \)) विलयन में घोलने पर अपने आयनों में टूट जाते हैं (वियोजित हो जाते हैं) [cite: 12, 171]। चूँकि अणुसंख्यक गुणधर्म कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं, इसलिए आयनिक विलेय के लिए अणुसंख्यक गुणधर्मों का मान प्रत्याशित मान से अधिक प्राप्त होता है [cite: 12, 171]।

वान्ट हॉफ गुणांक (\( i \)) को इस प्रकार परिभाषित किया जाता है [cite: 5, 12]:

\[ i = \frac{\text{वियोजन या संगुणन के पश्चात कणों के कुल मोल}}{\text{वियोजन या संगुणन से पूर्व कणों के मोल}} \]

उदाहरण के लिए, पूर्ण वियोजन की स्थिति में:

  • \( NaCl \rightarrow Na^+ + Cl^- \quad \implies i = 2 \) [cite: 5, 12, 159]
  • \( CaCl_2 \rightarrow Ca^{2+} + 2Cl^- \quad \implies i = 3 \) [cite: 170]

महत्वपूर्ण सूत्र तालिका [Important Formula Table]

अणुसंख्यक गुणधर्म [Colligative Property] गणितीय सूत्र [Mathematical Equation] मुख्य स्थिरांक एवं चर [Key Symbols]
वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन [Relative Lowering of VP] \( \frac{P^\circ - P}{P^\circ} = i \cdot X_{\text{solute}} \) \( P^\circ \) = शुद्ध विलायक का वाष्प दाब, \( P \) = विलयन का वाष्प दाब [cite: 10]
क्वथनांक का उन्नयन [Boiling Point Elevation] \( \Delta T_b = i \cdot K_b \cdot m \) \( K_b \) = मोलल उन्नयन स्थिरांक, \( m \) = मोललता [cite: 5, 12]
हिमांक का अवनमन [Freezing Point Depression] \( \Delta T_f = i \cdot K_f \cdot m \) \( K_f \) = मोलल अवनमन स्थिरांक, \( i \) = वान्ट हॉफ गुणांक [cite: 5, 12]
परासरण दाब [Osmotic Pressure] \( \pi = i \cdot M \cdot R \cdot T \) \( M \) = मोलरता, \( R \) = गैस नियतांक, \( T \) = परम ताप [cite: 5, 12]

हल किए गए परीक्षा-स्तरीय न्यूमेरिकल [Solved Exam-Level Numericals]

उदाहरण 1 (राउल्ट का नियम): \( 25^\circ\text{C} \) तापमान पर \( 18 \text{ ग्राम} \) ग्लूकोज (\( C_6H_{12}O_6 \)) को \( 162 \text{ ग्राम} \) शुद्ध जल में घोला जाता है। यदि इस तापमान पर शुद्ध जल का वाष्प दाब \( 24.0 \text{ torr} \) है, तो विलयन के वाष्प दाब की गणना कीजिए [cite: 11, 22]।

हल करने के चरण:

  1. दोनों घटकों के मोलों की संख्या ज्ञात करें:
    विलायक (जल, \( H_2O \)) का मोलर द्रव्यमान \( = 18 \text{ g/mol} \) [cite: 11]
    जल के मोल (\( n_{\text{water}} \)) \( = \frac{162}{18} = 9.0 \text{ मोल} \) [cite: 11]
    विलेय (ग्लूकोज, \( C_6H_{12}O_6 \)) का मोलर द्रव्यमान \( = 180 \text{ g/mol} \)
    ग्लूकोज के मोल (\( n_{\text{glucose}} \)) \( = \frac{18}{180} = 0.1 \text{ मोल} \)
  2. विलायक (जल) का मोल प्रभाज (\( X_{\text{water}} \)) ज्ञात करें:
    \( X_{\text{water}} = \frac{n_{\text{water}}}{n_{\text{water}} + n_{\text{glucose}}} = \frac{9.0}{9.0 + 0.1} = \frac{9.0}{9.1} \approx 0.989 \) [cite: 11]
  3. राउल्ट के नियम का उपयोग करके विलयन के वाष्प दाब की गणना करें:
    \( P_{\text{solution}} = X_{\text{water}} \times P^\circ_{\text{water}} \) [cite: 10]
    \( P_{\text{solution}} = 0.989 \times 24.0 \text{ torr} \approx 23.74 \text{ torr} \)
अतः, \( 25^\circ\text{C} \) तापमान पर ग्लूकोज विलयन का वाष्प दाब लगभग 23.74 torr है।

उदाहरण 2 (क्वथनांक उन्नयन): \( 5.85 \text{ ग्राम} \) सोडियम क्लोराइड (\( NaCl \)) को \( 100 \text{ ग्राम} \) जल में घोलकर एक विलयन बनाया जाता है। इस विलयन के क्वथनांक की गणना कीजिए। (दिया गया है: जल के लिए \( K_b = 0.512^\circ\text{C kg/mol} \), \( NaCl \) का मोलर द्रव्यमान \( = 58.5 \text{ g/mol} \), शुद्ध जल का क्वथनांक \( = 100^\circ\text{C} \) और मान लें कि \( NaCl \) का पूर्ण वियोजन होता है) [cite: 9, 20]

हल करने के चरण:

  1. विलेय के मोलों की संख्या ज्ञात करें:
    \( NaCl \text{ के मोल} = \frac{5.85}{58.5} = 0.1 \text{ मोल} \)
  2. विलायक के द्रव्यमान को किलोग्राम में बदलें:
    \( W_{\text{water}} = 100 \text{ ग्राम} = 0.1 \text{ किलोग्राम} \)
  3. विलयन की मोललता (\( m \)) ज्ञात करें:
    \( m = \frac{0.1 \text{ मोल}}{0.1 \text{ किलोग्राम}} = 1.0 \text{ m} \)
  4. वान्ट हॉफ गुणांक (\( i \)) निर्धारित करें:
    चूँकि \( NaCl \) जल में पूर्णतः वियोजित होकर दो आयन देता है (\( Na^+ \) और \( Cl^- \)), इसलिए \( i = 2 \) [cite: 5, 12, 159]।
  5. क्वथनांक का उन्नयन (\( \Delta T_b \)) ज्ञात करें:
    \( \Delta T_b = i \times K_b \times m \) [cite: 5, 12]
    \( \Delta T_b = 2 \times 0.512^\circ\text{C/m} \times 1.0 \text{ m} = 1.024^\circ\text{C} \) [cite: 9, 20]
  6. विलयन का अंतिम क्वथनांक ज्ञात करें:
    \( T_{\text{solution}} = T^\circ_{\text{water}} + \Delta T_b \)
    \( T_{\text{solution}} = 100^\circ\text{C} + 1.024^\circ\text{C} = 101.024^\circ\text{C} \) [cite: 9, 20]
अतः, सोडियम क्लोराइड के इस विलयन का क्वथनांक 101.024°C है।